UP ED Action: ED ने उत्तर प्रदेश के रामपुर में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और बिल्डिंग को अटैच कर लिया है। इनकी कीमत 426.46 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि मौजूदा बाजार कीमत करीब 1170 करोड़ रुपये है। ये कार्रवाई आजम खान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है।

45 प्लॉट पर कब्जे का आरोप
ED ने रामपुर में दर्ज 26 FIR के आधार पर जांच शुरू की थी। इन मामलों में आरोप है कि यूनिवर्सिटी बनाने के लिए किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा किया गया। रामपुर जिला प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक, गांव सिंघानखेड़ा में शत्रु संपत्ति के 45 प्लॉट, यानी करीब 34 एकड़ जमीन पर भी अवैध कब्जा किया गया था। अब गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले विभाग ने जिला प्रशासन के जरिए इस जमीन का कब्जा वापस ले लिया है।
सरकारी पैसे से यूनिवर्सिटी में काम कराने का आरोप
ED की जांच में सामने आया कि सरकारी कामों के लिए मिले पैसे और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी बनाने में किया गया। जांच के मुताबिक, कुछ ठेकेदारों ने सरकारी ठेकों से मिले पैसों का हिस्सा यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाया। एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने कथित तौर पर बताया कि ठेके की कुल रकम का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा यूनिवर्सिटी के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में इस्तेमाल हुआ।
परिवारों के घर तोड़ने का भी मामला
ED ने आजम खान और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज 28 दूसरी FIR की भी जांच शुरू की है। इन मामलों में आरोप है कि 2016 में रामपुर में कई परिवारों के घर बुलडोजर से तोड़े गए। वहां रहने वालों के साथ मारपीट करने और नकदी, गहने व मवेशी लूटने के आरोप भी हैं। आरोप है कि घरों का मलबा यूनिवर्सिटी परिसर में ले जाया गया था।
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सरकारी फंड से बने पंडाल का भी मामला
जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी पैसे से यूनिवर्सिटी परिसर में पंडाल, छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक बनाने के लिए 23.41 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। पंडाल के लिए 2015 में मंजूर 12.16 करोड़ रुपये की शर्तों के मुताबिक, उसका मालिकाना हक सरकार के पास रहना था। लेकिन 2016 में आदेश बदलकर इसे यूनिवर्सिटी के नाम कर दिया गया।
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निर्माण खर्च और आयकर रिटर्न में अंतर
एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी की 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये और जमीन की कीमत 4.63 करोड़ रुपये थी। यानी कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये आंकी गई। वहीं, ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में केवल 78.32 करोड़ रुपये खर्च दिखाए थे। इसमें से 12.29 करोड़ रुपये के चंदे फर्जी पाए जाने की बात कही गई है।