श्री कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आज भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग और मजबूत पहचान बनाई है। दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है और वैश्विक स्तर पर देश की बात को गंभीरता से सुना जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती शक्ति और स्वीकार्यता प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय होना चाहिए। आचार्य प्रमोद कृष्णम के मुताबिक, राष्ट्रीय हित और देश की प्रतिष्ठा को राजनीतिक विरोध से ऊपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की उपलब्धियां किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे देश की उपलब्धियां हैं।

उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठियों से जोड़ना अनुचित
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की उत्तराखंड के लोगों को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की जनता को घुसपैठियों से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड को धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान वाली भूमि बताते हुए कहा कि बदरीनाथ और केदारनाथ जैसे प्रमुख तीर्थ इसी प्रदेश में स्थित हैं। उनके मुताबिक, राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी प्रदेश की जनता की पहचान और सम्मान को राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।
अखिलेश यादव से मांगी माफी की मांग
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अखिलेश यादव से अपनी टिप्पणी पर पुनर्विचार करने और माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव का मायका उत्तराखंड में है, इसलिए उनका परिवार भी इस प्रदेश से जुड़ा हुआ है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि जिस प्रदेश से पारिवारिक रिश्ता जुड़ा हो, वहां के लोगों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना कितना उचित है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं के शब्दों की अपनी मर्यादा होती है और राजनीतिक दलों को बयान देते समय सामाजिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए।
SIR के आरोपों पर विपक्ष से मांगे ठोस प्रमाण
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष के आरोपों पर भी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष यह दावा कर रहा है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, तो इसके समर्थन में ठोस प्रमाण सामने रखे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल बड़े आंकड़े बताने के बजाय ऐसे वास्तविक मामलों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, जिनमें किसी व्यक्ति का नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था और बाद में उसे हटा दिया गया। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में पुराने और नए रिकॉर्ड के जरिए दावे की जांच की जा सकती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आरोपों से ज्यादा महत्वपूर्ण तथ्य और प्रमाण होते हैं।
धामी सरकार की तारीफ, फिर BJP को मौका मिलने का दावा
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है और प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री के काम से खुश है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने विश्वास जताया कि प्रदेश की जनता आगामी चुनाव में एक बार फिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भारतीय जनता पार्टी को मौका देगी। हालांकि, चुनावी नतीजों को लेकर अंतिम फैसला जनता के मतदान से ही होगा।