शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
UP MLC Election 2026: बीजेपी कर रही बूथ कैप्चरिंग… इस्लाम अपना लूंगा, आगरा में सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल कैमरे पर फूट-फूटकर रोए​ | Bihar Pataka Factory Blast: सीवान की पटाखा फैक्ट्री में भीषण ब्लास्ट, पति-पत्नी समेत 7 की मौत, डेढ़ घंटे तक होते रहे धमाके​ | Indian Cricketer S Meghana ने 30 साल की उम्र में Cricket के सभी प्रारूपों से संन्यास लिया​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

Global Hunger Index 2026: भारत 100वें स्थान पर, पाकिस्तान 106वें नंबर पर, भारत में सुधार के संकेत, चुनौतियां बरकरार​

: ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में भारत 122 देशों में 100वें स्थान पर रहा है। भारत का GHI स्कोर 24.1 है। इस स्कोर के आधार पर भारत को भुखमरी की ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कुपोषण और बच्चों में पोषण संबंधी समस्याएं अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। […]

: ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में भारत 122 देशों में 100वें स्थान पर रहा है। भारत का GHI स्कोर 24.1 है। इस स्कोर के आधार पर भारत को भुखमरी की ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कुपोषण और बच्चों में पोषण संबंधी समस्याएं अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। हालांकि, पिछले वर्षों की तुलना में कुछ संकेतकों में सुधार भी दर्ज किया गया है।

बच्चों में स्टंटिंग में सुधार, वेस्टिंग अब भी चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग की दर करीब 29.3% है। साल 2000 में यह आंकड़ा करीब 50% था। यानी दो दशकों से ज्यादा समय में स्टंटिंग में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि, बच्चों में वेस्टिंग की दर अभी भी करीब 17 से 18% के आसपास है। रिपोर्ट में इसे धीमी प्रगति वाला क्षेत्र बताया गया है।

पड़ोसी देशों से भारत की स्थिति कैसी?

में भारत की स्थिति कुछ पड़ोसी देशों की तुलना में कमजोर दिखाई देती है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल का GHI स्कोर 14.2 और बांग्लादेश का 16.8 है, जबकि भारत का स्कोर 24.1 है। दूसरी ओर, पाकिस्तान और अफगानिस्तान का स्कोर करीब 26.0 बताया गया है। भारत की रैंकिंग और स्कोर यह संकेत देते हैं कि देश में भूख और कुपोषण से निपटने के लिए अभी लगातार प्रयासों की जरूरत है।

 

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में ज्यादा बोझ

रिपोर्ट में भारत के भीतर भी पोषण की स्थिति में बड़े क्षेत्रीय अंतर की बात सामने आती है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में स्टंटिंग और वेस्टिंग का बोझ अधिक बताया गया है। वहीं केरल, गोवा, तमिलनाडु और मिजोरम जैसे राज्यों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी, मातृ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अंतर इन राज्यों के बीच असमानता की प्रमुख वजहों में शामिल हैं।

भूख की बड़ी वजह गरीबी से लेकर खराब पोषण तक

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में भूख और कुपोषण के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं। इनमें गरीबी और असमानता, महिलाओं की शिक्षा में कमी, कम उम्र में विवाह, स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच, खराब स्वच्छता और पर्याप्त पोषण वाले भोजन की कमी शामिल हैं। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पोषण से जुड़े जोखिम और ज्यादा दिखाई देते हैं। इसके अलावा, सूखा, बाढ़ और दूसरे जलवायु संकट भी खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करते हैं।

सरकार की योजनाओं से सुधार, लेकिन चुनौती बरकरार

भारत में भूख और कुपोषण कम करने के लिए POSHAN Abhiyaan, ICDS, Public Distribution System , MGNREGA, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन योजनाओं ने खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति सुधारने में योगदान दिया है। खासतौर पर बच्चों में स्टंटिंग की दर में गिरावट को सकारात्मक बदलाव माना गया है। हालांकि, वेस्टिंग और एनीमिया जैसे क्षेत्रों में प्रगति अभी सीमित है और योजनाओं की पहुंच तथा गुणवत्ता में राज्यों के बीच अंतर बना हुआ है।

पाकिस्तान की स्थिति भी गंभीर

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में पाकिस्तान 122 देशों में 106वें स्थान पर है। पाकिस्तान का GHI स्कोर 25.5 रहा, जो साल 2000 के 36.2 के मुकाबले बेहतर है, लेकिन 2018 के बाद स्थिति में गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की करीब 16.1% आबादी कुपोषित है, जबकि 33.6% बच्चे स्टंटिंग और 9.8% बच्चे वेस्टिंग से प्रभावित हैं। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 5.6% बताई गई है। रिपोर्ट में आर्थिक अस्थिरता, खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी और जलवायु संबंधी चुनौतियों को पाकिस्तान में भूख और कुपोषण की प्रमुख वजहों में शामिल किया गया है।

आगे क्या करने की जरूरत?

रिपोर्ट में भूख कम करने के लिए पोषण योजनाओं को और मजबूत करने, गरीब परिवारों तक खाद्य सुरक्षा योजनाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने, महिलाओं की शिक्षा और मातृ स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पानी और स्वच्छता सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत बताई गई है। साथ ही, ज्यादा प्रभावित राज्यों के लिए अलग रणनीति बनाने और पोषण से जुड़े आंकड़ों की नियमित निगरानी करने पर जोर दिया गया है।

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY