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अब कम उम्र में भूलने की आदत ज्यादा हो रही है? ऐसा क्यों हो रहा? एक्सपर्ट ने बताया​

तकनीक हमारे सोचने, सीखने और याद रखने के तरीके को किस तरह बदल रही है? एक अहम सवाल, जिस पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है, वह यह है कि क्या आज हम कम उम्र में ही चीजें भूलने लगे हैं या फिर जानकारी को याद रखने का हमारा तरीका बदल रहा है? हम ऐसे […]

तकनीक हमारे सोचने, सीखने और याद रखने के तरीके को किस तरह बदल रही है? एक अहम सवाल, जिस पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है, वह यह है कि क्या आज हम कम उम्र में ही चीजें भूलने लगे हैं या फिर जानकारी को याद रखने का हमारा तरीका बदल रहा है? हम ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहां लगभग हर चीज को डिजिटल रूप में सहेजकर रखा जा सकता है. हम मैसेज के स्क्रीनशॉट लेते हैं, आर्टिकल बुकमार्क करते हैं, सोशल मीडिया पोस्ट सेव करते हैं और स्मार्टफोन में नोट्स बनाते हैं.

हम सोचते हैं कि बाद में इन चीजों को दोबारा देखेंगे. लेकिन क्या हम वास्तव में ऐसा करते हैं? और इससे भी जरूरी सवाल यह है कि इस जानकारी में से हमें कितना सचमुच याद रहता है?

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

डॉ. अस्तिक जोशी बताते हैं कि मनोविज्ञान के नजरिए से देखें तो याददाश्त की शुरुआत ध्यान देने से होती है. किसी जानकारी को लंबे समय तक याद रखने के लिए पहले उस पर ध्यान देना, उसे समझना और फिर मस्तिष्क में दर्ज करना जरूरी है.

लगातार आने वाले नोटिफिकेशन, एक साथ कई काम करने की आदत और बिना रुके सोशल मीडिया स्क्रॉल करना इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं.

डिजिटल ऑफलोडिंग क्या है?

एक दूसरी अहम अवधारणा है ‘डिजिटल ऑफलोडिंग’. इसका मतलबा है जानकारी याद रखने के लिए बाहरी चीजें, जैसे मोबाइल और डिजिटल नोट्स, पर निर्भर रहना. यह फैसिलिटी काफी काम आती है लेकिन इस पर ज्यादा डिपेंड रहना खुद से जानकारी याद करने की प्रैक्टिस को कम कर सकती है. चिंता की बात सिर्फ यह नहीं है कि हम ज्यादा भूल रहे हैं, बल्कि यह भी है कि हम जानकारी को सक्रिय रूप से समझने और सीखने में कम समय दे रहे हैं. किसी चीज को सेव करना, उसे सीखने के बराबर नहीं है और पढ़ना, उसे याद रखने के समान नहीं है.

हालांकि, तकनीक अपने आप में नुकसानदायक नहीं है. डिजिटल रिमाइंडर, कैलेंडर और नोट्स हमारी मदद कर सकते हैं. जरूरत इस बात की है कि हम इनका इस्तेमाल अपनी मानसिक क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए करें, न कि पूरी तरह उन पर निर्भर हो जाएं.

इन बातों का रखें खास ध्यान

इसके लिए सक्रिय रूप से याद करने का अभ्यास करें, बिना किसी व्यवधान के पढ़ें, सीखी हुई बातों को अपने शब्दों में दोहराएं, बातचीत करें और पूरी नींद लें. साथ ही, अपने दिमाग को डिजिटली एक्टिव रखने वाली चीजों से दूर रहकर खुद को याद रखने का समय दें.

शायद असली सवाल यह नहीं है कि हम कितनी जानकारी सहेज सकते हैं, बल्कि यह है कि उसमें से कितना ज्ञान अपने पास बनाए रख सकते हैं. स्क्रीनशॉट के इस दौर में, आइए याद रखने की अहमियत को न भूलें.

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों पर आधारित है और इसका उद्देश्य सिर्फ सामान्य जानकारी प्रदान करना है. टीवी9 हिंदी लेख में शामिल जानकारी की पुष्टि नहीं करता. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें और स्वास्थ्य से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श करें.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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