रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपना पब्लिक ऑफरिंग बंद होने से पहले ही भारत के IPO रिकॉर्ड बुक में नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए हैं. इस डिजिटल यूनिट ने अब तक का सबसे बड़ा इश्यू साइज, किसी मेगा IPO के लिए सबसे तेज सब्सक्रिप्शन और एंकर निवेशकों की ओर से जबरदस्त डिमांड हासिल की है. BSE की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को खुलने के 100 मिनट के भीतर ही 30,213 करोड़ रुपए का यह इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया, जो इसे अब तक का सबसे तेज़ी से सब्सक्राइब होने वाला IPO बनाता है. यह इश्यू 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा. आइए इन रिकॉर्ड्स के बारे में विस्तार से बात करते हैं…

देश का सबसे बड़ा आईपीओ
पहला रिकॉर्ड इश्यू के साइज से जुड़ा है. जियो का IPO, 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,870 करोड़ के इश्यू को पीछे छोड़ते हुए, मूल्य के हिसाब से भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बनने जा रहा है. ₹1,065 से ₹1,119 के प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर, जियो प्लेटफॉर्म्स का मूल्यांकन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपए है. इस इश्यू में 27 करोड़ शेयर शामिल हैं और यह पूरी तरह से एक ‘फ्रेश इश्यू’ है. इसमें ‘ऑफरफॉरसेल’ का कोई हिस्सा नहीं है, जिसका अर्थ है कि मौजूदा निवेशक इस IPO के जरिए अपने शेयर नहीं बेच रहे हैं. कंपनी की योजना इस इश्यू से मिलने वाली राशि में से 27,500 करोड़ रुपए का उपयोग अपने कर्ज को चुकाने या समय से पहले भुगतान करने के लिए करने की है, जबकि बाकी बची राशि का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा.
सबसे जल्दी सब्सक्राइब होने का रिकॉर्ड
दूसरा रिकॉर्ड सब्सक्रिप्शन की गति से बना है. BSE की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को खुलने के 100 मिनट के भीतर ही 30,213 करोड़ रुपए का यह इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया, जो इसे अब तक का सबसे तेज़ी से सब्सक्राइब होने वाला IPO बनाता है. ‘क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स’ के लिए आरक्षित हिस्सा पहले 10 मिनट के भीतर ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया और 30 मिनट से भी कम समय में यह लगभग दोगुना सब्सक्राइब हो गया. अंततः, QIB हिस्सा 2.86 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि पूरा इश्यू 0.83 गुना सब्सक्राइब हुआ था. इसके बाद, इश्यू खुलने के 100 मिनट के भीतर ही पूरी बुक भर गई.
एंकर बुक का रिकॉर्ड
तीसरा रिकॉर्ड पब्लिक इश्यू खुलने से पहले ही बन गया था. जियो प्लेटफॉर्म्स की 8,110 करोड़ रुपए की ‘एंकर बुक’ के लिए लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपए की बोलियां प्राप्त हुईं, जो उपलब्ध शेयरों की तुलना में 30 गुना से भी अधिक थीं. यह किसी भारतीय IPO के लिए अब तक की सबसे बड़ी ‘एंकर डिमांड’ है. एंकर निवेशकों को ₹1,119 प्रति शेयर की कीमत पर शेयर आवंटित किए गए. यह आवंटन 212 निवेशक खातों और योजनाओं को दिया गया. निवेशकों के समूह में ग्लोबल एसेट मैनेजर, सॉवरेन वेल्थ फंड, घरेलू म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और पेंशन फंड शामिल थे.
निवेशकों में LIC, ब्लैकरॉक, फिडेलिटी, सिंगापुर का GIC, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, BNP परिबास, एलियांज, जेपी मॉर्गन और कई भारतीय म्यूचुअल फंड हाउस शामिल थे. एंकर एलोकेशन में घरेलू म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी काफी बड़ी रही. 95 म्यूचुअल फंड स्कीमों को लगभग ₹2,785 करोड़ मूल्य के 2.49 करोड़ शेयर मिले, जो एंकर बुक का 34.34% है. इसके अलावा, 22 बीमा कंपनियों और पेंशन फंड खातों को लगभग ₹1,090 करोड़ मूल्य के शेयर मिले. LIC सबसे बड़े एंकर आवंटियों में से एक रही, जिसे लगभग ₹500 करोड़ मूल्य के 44.68 लाख शेयर मिले, जो एंकर हिस्से का 6.17% है.
सभी के लिए बनाया हाई स्टैंडर्ड
मांग के इस स्तर ने इश्यू के बाकी हिस्से के लिए एक हाई स्टैंडर्ड तय कर दिया है और जियो प्लेटफॉर्म्स को इस साल भारत में बाजार की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक बना दिया है. यह IPO लगभग दो दशकों में रिलायंस इंडस्ट्रीज की पहली पब्लिक ऑफरिंग भी है. इस शानदार रिस्पांस से रिलायंस के डिजिटल व्यवसायों में निवेशकों की दिलचस्पी का पता चलता है. वहीं दूसरी ओर, बाजार यह भी परख रहा है कि क्या जियो अपने बड़े ग्राहक आधार को डिजिटल सेवाओं, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए अधिक मार्जिन वाले रेवेन्यू में बदल सकता है, क्योंकि अब सब्सक्राइबरों की संख्या में बढ़ोतरी विकास का उतना बड़ा जरिया नहीं रह गई है.
टेलीकॉम से काफी आगे की है कंपनी
जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने कंपनी को एक ऐसे टेक्नोलॉजी व्यवसाय के रूप में पेश किया है, जिसके अवसर टेलीकॉम से कहीं आगे तक फैले हैं. उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी पहला उत्पाद था जिसे हमने उस प्लेटफॉर्म पर बनाया था. अब हम इसके ऊपर डिजिटल सेवाएं, AI और क्लाउड जैसी चीजें जोड़ रहे हैं. यह इश्यू पूरी तरह से ‘प्राइमरी’ है, जिसका मतलब है कि मेटा, गूगल, पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड, KKR, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स और सिल्वर लेक जैसे मौजूदा निवेशक इस ऑफरिंग के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर नहीं निकल रहे हैं.