तेल संकट से बढ़ी जापान की चिंता, ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई पर दबाव के बीच सरकार के सामने बड़ी चुनौती

टोक्यो। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। ऊर्जा आपूर्ति में बाधा, कच्चे तेल की कीमतों में उतारचढ़ाव और आयात लागत बढ़ने की आशंकाओं के बीच जापान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। जापान के व्यापार घाटे के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की खबर ने सरकार की आर्थिक रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधानमंत्री सनाए तकाइची के सामने ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने की चुनौती है।
तेल आयात पर निर्भरता बनी बड़ी चिंता
जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा होता है। यदि तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो जापान को ऊर्जा खरीदने के लिए अधिक विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ सकती है।
इसका असर व्यापार संतुलन पर पड़ सकता है। महंगे ऊर्जा आयात के कारण कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है और परिवहन से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक की कीमतों पर दबाव आ सकता है।
व्यापार घाटा बढ़ने से क्यों बढ़ी चिंता?
जब किसी देश का कुल आयात उसके कुल निर्यात से अधिक होता है, तो उसे व्यापार घाटे की स्थिति का सामना करना पड़ता है। जापान के मामले में ऊर्जा आयात की लागत इस संतुलन को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक है।
हालांकि, व्यापार घाटे में बढ़ोतरी के पीछे केवल पश्चिम एशिया का संघर्ष ही जिम्मेदार हो, ऐसा मानना सही नहीं होगा। आयातनिर्यात के आंकड़े, वैश्विक मांग, मुद्रा विनिमय दर और ऊर्जा की कीमतें भी इसमें भूमिका निभाती हैं।
पीएम तकाइची की तैयारी: तेल की आपूर्ति और महंगाई पर फोकस
प्रधानमंत्री सनाए तकाइची की सरकार ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने और पश्चिम एशिया के संकट का आम लोगों पर असर कम करने के लिए कई कदम उठा चुकी है। जापान सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य से इतर वैकल्पिक रास्तों और देशों से कच्चा तेल खरीदने, तेल के रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल करने तथा ऊर्जा आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया है।
इसके अलावा, सरकार ने जुलाई से सितंबर के दौरान बिजली और प्राकृतिक गैस के बिलों में राहत देने की योजना भी घोषित की थी। बढ़ती महंगाई से परिवारों को राहत देने के लिए खाद्य पदार्थों पर उपभोग कर घटाने का प्रस्ताव भी सरकार की योजना में शामिल है।
बैंक ऑफ जापान ने भी उठाया कदम
ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और कमजोर येन के कारण महंगाई पर दबाव बना हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में बैंक ऑफ जापान ने सितंबर में अपनी प्रमुख ब्याज दर बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दी, जो लगभग 31 वर्षों का उच्चतम स्तर है। इसका उद्देश्य महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद करना है, हालांकि ऊंची ब्याज दरों का असर कर्ज लेने वालों और कारोबार पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
जापान के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है—एक तरफ ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और दूसरी तरफ महंगाई तथा बढ़ती आयात लागत से अर्थव्यवस्था को बचाना। वैकल्पिक तेल आपूर्ति, रणनीतिक भंडार और घरेलू परिवारों को राहत देने वाले उपाय इस रणनीति के अहम हिस्से हैं।
आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की कीमतें और जापान की मुद्रा येन की चाल देश के व्यापार संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सरकार के लिए ऊर्जा सुरक्षा के साथसाथ आर्थिक स्थिरता बनाए रखना भी बड़ी परीक्षा होगी।