Varanasi News: वाराणसी में एक तस्वीर खिंचवाने का शौक आठ दोस्तों के लिए जिंदगी का सबसे दर्दनाक पल बन गया. विंध्याचल धाम में मां के दर्शन करके लौट रहे दोस्तों ने प्रयागराजवाराणसी हाईवे पर एक ओवरब्रिज पर अपनी स्कॉर्पियो रोकी. सभी गाड़ी से नीचे उतरे और साथ में तस्वीरें लेने लगे. किसी को अंदाजा नहीं था कि चंद मिनट बाद यही तस्वीर उनकी जिंदगी की आखिरी याद बन जाएगी. पीछे से तेज रफ्तार में आए एक ट्रक ने स्कॉर्पियो को टक्कर मार दी और वहां खड़े दोस्तों को रौंदता हुआ निकल गया. हादसे में पांच दोस्तों की मौत हो गई, जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हैं. इनमें से किसी को कुछ दिन बाद नई नौकरी जॉइन करनी थी तो कोई अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहा था. एक झटके में कई परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं…

सेल्फी लेने के कुछ मिनट बाद मच गई चीखपुकार
हादसा बीते सोमवार सुबह करीब 6 बजे वाराणसी के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के रूपापुर गांव के पास प्रयागराजवाराणसी हाईवे के ओवरब्रिज पर हुआ. सभी दोस्त निखिल के जन्मदिन पर विंध्याचल धाम में दर्शन करने गए थे. दर्शन के बाद वे काशी लौट रहे थे. रास्ते में ओवरब्रिज पर स्कॉर्पियो रोककर तस्वीरें लेने लगे. हादसे से कुछ मिनट पहले की एक तस्वीर भी सामने आई है. इसमें सात दोस्त स्कॉर्पियो के आगे खड़े नजर आ रहे हैं, जबकि आठवां दोस्त उनकी तस्वीर खींच रहा था.
यही तस्वीर अब उनके परिवारों और परिचितों के लिए आखिरी याद बन गई है. तभी पीछे से सेब से लदा एक तेज रफ्तार ट्रक आया. ट्रक ने स्कॉर्पियो को जोरदार टक्कर मारी. टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. आसपास खड़े दोस्त ट्रक की चपेट में आ गए. हादसे के बाद मौके पर चीखपुकार मच गई.
ओवरब्रिज पर बिखरे पड़े थे शव
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ दोस्तों के शव ओवरब्रिज पर ही पड़े मिले, जबकि एक युवक नीचे गिर गया. एक अन्य युवक भी पुल के नीचे घायल अवस्था में मिला. पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया. इस हादसे में आनंद यादव , आलोक मिश्रा , प्रदीप सिंह , विद्वांशु यादव और किशन यादव की मौत हो गई. सावन यादव , राजकुमार यादव और निखिल गंभीर रूप से घायल हुए हैं. तीनों का ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है.
किसी नौकरी जॉइन करने वाला था, किसी के कंधों पर…
हादसे में जान गंवाने वाले दोस्तों की अपनीअपनी जिंदगी और सपने थे. आलोक मिश्रा वाराणसी के पिसौर, शिवपुर के रहने वाले थे. उनके पिता अजय किसान हैं और मां उर्मिला गृहिणी हैं. तीन भाईबहनों में दूसरे नंबर पर रहे आलोक ने 12वीं तक पढ़ाई की थी. उनके पिता के मुताबिक, आलोक पांच दिन बाद जियो कंपनी में नौकरी जॉइन करने वाले थे. परिवार को उम्मीद थी कि अब बेटे की नौकरी से घर की स्थिति बेहतर होगी, लेकिन उससे पहले ही सब कुछ खत्म हो गया.
विद्वांशु यादव वीडीए कॉलोनी, शिवपुर के रहने वाले थे. वह ठेकेदारी करते थे. पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी. तीन भाइयों में दूसरे नंबर के विद्वांशु की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. उनकी मां मृदुला देवी गृहिणी हैं. प्रदीप सिंह चोलापुर के रहने वाले थे और ईकॉमर्स कंपनी मीशो में मैनेजर के पद पर काम करते थे. उनके एक बेटा है. पति की मौत की खबर सुनकर पत्नी सोना का रोरोकर बुरा हाल हो गया. आनंद यादव शिवपुर के रहने वाले थे. वहीं, किशन यादव भी शिवपुर में रहते थे. उनका एक भाई और एक बहन है. किशन की अभी शादी नहीं हुई थी. वह एक मार्केट के मालिक थे. एक ही हादसे ने इन परिवारों से उनके बेटे, भाई और सहारा छीन लिया.
8090 की रफ्तार में था ट्रक
पुलिस के मुताबिक, ट्रक भी प्रयागराज की ओर से वाराणसी आ रहा था. उसमें सेब लदा था और उसकी रफ्तार करीब 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे थी. ओवरब्रिज पर अचानक स्कॉर्पियो खड़ी होने के कारण चालक वाहन संभाल नहीं पाया और पीछे से टक्कर मार दी. टक्कर के बाद स्कॉर्पियो करीब 30 से 40 मीटर तक घिसटती चली गई. हादसे के बाद चालक करीब 200 मीटर दूर ट्रक छोड़कर फरार हो गया.
पुलिस सीसीटीवी फुटेज की मदद से उसकी पहचान और तलाश में जुटी है. स्कॉर्पियो के अंदर से प्रसाद के डिब्बे, नारियल और चुनरी भी मिली है. मिर्जामुराद के इंस्पेक्टर गोपालजी कुशवाह के मुताबिक, आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला कि कार सवार लोग ओवरब्रिज पर खड़े होकर सेल्फी ले रहे थे. हालांकि, हादसे की असली वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.
सांसद ने परिवारों को बंधाया ढांढस
पांच दोस्तों की मौत की खबर मिलने के बाद चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शोकाकुल परिवारों को सांत्वना दी. इससे पहले सपा जिलाध्यक्ष सुजीत यादव लक्कड़ भी घटनास्थल पर पहुंचे थे. सोमवार देर शाम आलोक मिश्रा, प्रदीप सिंह, आनंद यादव और विद्वांशु यादव का मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया.
निखिल के जन्मदिन पर शुरू हुआ यह सफर दोस्तों के लिए कभी न भूलने वाला हादसा बन गया. जिस तस्वीर में वे एक साथ मुस्कुराते नजर आ रहे थे, वह अब उनके परिवारों के लिए दर्दनाक याद बनकर रह गई है. पीछे छूट गए सपने, अधूरे अरमान और अपनों को खोने का गम इन परिवारों के लिए जिंदगी भर का दुख बन गया है.