ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है, जिसमें थोड़ी सी भी चोट लगने पर फ्रैक्चर हो सकता है. इस रोग में हड्डियां खोखली या छिद्रयुक्त, घनत्व कम हो जाता है और बोन पतली, भंगुर हो जाती हैं. इसका मुख्य कारण होता है शरीर में विटामिन डी, कैल्शियम और जरूरी मिनरल्स की कमी होना. वैसे तो इसे बढ़ती उम्र की स्वास्थ समस्या माना जाता है, लेकिन क्या बच्चों को भी ये समस्या हो सकती है. इस बारे में जान लेते हैं एक्टसपर्ट का क्या कहना है.

जब हमारे शरीर में कोई हड्डी टूटती है या फिर चटक जाती है तो ट्रीटमेंट, खाने के पोषक तत्व और सप्लीमेंट्स के जरिए ये दोबारा जुड़ जाती है. हालांकि जब उम्र बढ़ती है तो शरीर में कैल्शियम की कमी होने लगती है. इससे हड्डियों के रिकवर होने की गति धीमी होने लगती है. इसपर ध्यान न दिया जाए तो ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है.
बच्चों में फ्रैक्चर होना
पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स डॉ. मनोज पद्मन ने बताया कि दौड़ते हुए या खेलकूद के दौरान बच्चों के गिरने या टकराकर चोट लगने से फ्रैक्चर होना आम बात है. वहीं लगभग 50% बच्चों को वयस्क होने से पहले कभी न कभी हड्डी में फ्रैक्टर हो सकता है. वहीं, करीब 10% बच्चों को बड़े होने से पहले एक से ज्यादा बार फ्रैक्चर हो सकता है. आमतौर पर देखा जाए तो स्वस्थ बच्चों में खेलते समय गिरने या चोट लगने से अगर हड्डी में फ्रैक्चर हो जाए तो इसे किसी गंभीर समस्या का संकेत नहीं मानते हैं और कोई खास जांच कराने की आवश्यकता नहीं मानी जाती है.
इन संकेतों पर दें ध्यान
एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि अगर 10 साल की उम्र से पहले बच्चे के हाथ या पैर में दो या उससे ज्यादा बार फ्रैक्चर हो जाए, या रीढ़ की हड्डी में बिना किसी बड़ी चोट टूटफूट हो तो इसे नजरअंदाज न करें. यह ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के कमजोर होने की समस्या का संकेत हो सकता है, जिसके लिए डिटेल में चेकअप कराना जरूरी होता है. हालांकि बच्चों में ऑस्टियोपोरोसिस बहुत आम नहीं है. जन्म से जुड़ी हुई हड्डियों या शरीर के कनेक्टिव टिश्यू से जुड़ी समस्या की वजह से ऐसा हो सकता है.
हड्डियां कमजोर होने के कारण
बच्चों में अगर हड्डियां कमजोर होने के कारणों की बात करें तो ये पोषण की कमी की वजह से हो सकता है. इसके अलावा गंभीर बीमारियों, लंबे समय तक चलने वाली हेल्थ प्रॉब्लम या फिर कुछ दवाओं के इसर से भी हड्डियां कमजोर हो सकती हैं.
कौन से किए जाते हैं टेस्ट?
बच्चों में अगर हड्डियों से जुड़ी इस तरह की समस्या देखने में आती है तो डॉक्टर उसकी फ्रैक्चर हिस्ट्री, उम्र के हिसाब से विकास, खानपान, फिजिकल एक्टिविटी, से लेकर परिवार में हड्डियों से जुड़ी बीमारियों के इतिहास तक को द्यान में रखते हैं. ऑस्टियोपोरोसिस की जांच के लिए जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट, खास इमेजिंग टेस्ट, जेनेटिक टेस्ट, बोन डेंसिटी टेस्ट और कभीकभी बोन बायोप्सी करने की सलाह भी दी जाती है.
पेरेंट्स रखें खानपान का ध्यान
बच्चों का विकास सही से हो और हड्डियां मजबूत रहें, इसके लिए मातापिता को उनके खानपान में सुधार करना चाहिए. जैसे यह तय करें कि बच्चे को खाने में ऐसी चीजें दी जाएं, जिसमें फाइबर, प्रोटीन समेत कैल्शियम और विटामिन डी और बाकी के पोषक तत्व सही मात्रा में मिलें. बच्चों को फिजिकल एक्टिविटी की आदत डालें जैसे उनकी उम्र के हिसाब से दौड़ने खालने के लिए प्रोत्साहित करें. बारबार फ्रैक्चर हो रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.