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ओवैसी बोले- अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएगा… यूपी में मुस्लिमों को नेता कैसे बनाएगी AIMIM? पूरा प्लान​

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां जोरोंशोरों से लगी हुए हैं. इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी पार्टी AIMIM के लिए नई सियासी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है. उन्होंने चुनाव की तैयारियों के बीच 8 जिलों में चुनावी रैली कर ली है और ये सभी मुस्लिम […]

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां जोरोंशोरों से लगी हुए हैं. इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी पार्टी AIMIM के लिए नई सियासी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है. उन्होंने चुनाव की तैयारियों के बीच 8 जिलों में चुनावी रैली कर ली है और ये सभी मुस्लिम बाहुल्य जिले हैं. हाल ही में रामपुर में रैली के दौरान ओवैसी ने मुस्लिम समाज के आम व्यक्ति को राजनीति में जगह देने की बात की है.

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में रैली के दौरान AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएगा, बल्कि नेता बनेगा, विधायक और सांसद बनेगा. उन्होंने मुसलमानों से अपने वोट का सही इस्तेमाल करने और सियासी ताकत बढ़ाने के लिए एकजुट होने की अपील की.’ उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अपना नेता खुद चुनना होगा, विरोधी चाहते हैं कि अब्दुल नेता न बने और दरी बिछाने तक सीमित रहे.

मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी

उनके इस बयान के पीछे मुस्लिम समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने और अपना नेतृत्व खड़ा करने की बात है. उनके इस बयान को यूपी में AIMIM की चुनावी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है. पार्टी अब केवल अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के बजाय उन सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है.

मुस्लिम बाहुल्य जिलों पर निशाना

अक्टूबर 2026 में आई रिपोर्टों के मुताबिक, ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में करीब 200 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही है और पूर्वांचल की 36 सीटों पर खास ध्यान दिया है. AIMIM की रणनीति में उन विधानसभा क्षेत्रों को अहम माना जा रहा है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी है और चुनावी मुकाबला कड़ा रहता है. मुस्लिम समाज के आम व्यक्ति को राजनीति में लाने के लिए ओवैसी का खास प्लान अब चुनावी मैदान पर भी नजर आ रहा है.

  • AIMIM प्रमुख ओवैसी ने यूपी के 8 जिलों में चुनावी रैलियां की हैं.
  • ओवैसी ने यूपी में करीब 200 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही.
  • पूर्वांचल की 36 सीटों पर AIMIM का खास फोकस बताया गया है.
  • बिहार चुनाव 2025 में AIMIM ने जोकिहाट, बहादुरगंज, कोचाधामन, अमौर और बायसी सीटें जीतीं.
  • 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी की करीब 143 सीटों पर मुस्लिम मतदाता नतीजों को प्रभावित कर सकते थे.

किनकिन जिलों में की हैं रैलियां?

पश्चिमी यूपी में भी पार्टी लगातार जनसभाएं कर रही है. हाल में ओवैसी ने मुस्लिम बाहुल्य 8 जिलों में रैली की है, जिनमें बहराइच, बिजनौर, कानपुर, श्रावस्ती, आजमगढ़, रामपुर, कैराना और मेरठ का नाम शामिल है. इन जिलों में रैलियों के जरिए पार्टी अपनी पहुंच बढ़ाने में जुटी है. AIMIM की रणनीति का दूसरा अहम हिस्सा स्थानीय और प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़ना है. बिहार में पार्टी को सीमांचल की कुछ सीटों पर सफलता मिली, जहां स्थानीय उम्मीदवारों की पहचान और क्षेत्रीय मुद्दे महत्वपूर्ण रहे.

बिहार चुनाव की तरह है प्लानिंग

ओवैसी की रणनीति को समझने के लिए बिहार का उदाहरण भी अहम है. एनडीए और आरजेडी की पकड़ होने के बाद भी AIMIM ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में 5 सीटों पर जीत हासिल की थी. ओवैसी ने बिहार चुनाव में आरजेडी पार्टी से नाराज मुस्लिम समुदाय को आकर्षित किया और दूसरी पार्टी के नेताओं को अपनी पार्टी में लाकर चुनाव में खड़ा किया. ओवैसी की ये प्लानिंग काफी कारगर साबित हुई और जोकिहाट, बहादुरगंज, कोचाधामन, अमौर और बायसी जैसी सीटों पर पार्टी को सफलता मिली.

किन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी अच्छी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका कई विधानसभा सीटों पर अहम मानी जाती है. 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की 403 विधानसभा सीटों में से करीब 143 सीटें ऐसी थीं, जहां मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते थे. इनमें लगभग 36 सीटें ऐसी बताई गईं, जहां मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत की संभावना को मजबूत माना जाता था. पश्चिमी यूपी और रोहिलखंड में मुस्लिम आबादी की अच्छी हिस्सेदारी है.

मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका

रामपुर, मुरादाबाद, संभल, बिजनौर, अमरोहा, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ जैसे जिलों में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी महत्वपूर्ण है. रिपोर्ट के अनुसार, रामपुर में मुस्लिम आबादी 50.57%, मुरादाबाद में 47.12%, बिजनौर में 43.04% और अमरोहा में 40.78% थी. रिपोर्ट में मेरठ सदर, रामपुर सदर, संभल, मुरादाबाद ग्रामीण, कुंदरकी, अमरोहा नगर, धौलाना, बेहट और सहारनपुर देहात जैसी सीटों का भी जिक्र किया गया था, जहां मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका अहम बताई गई.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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