कीव। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लेकर भारत में सुरक्षा संबंधी बहस तेज हो गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आरोप लगाया है कि यूक्रेन में स्टारलिंक की सेवाओं पर लगी पाबंदियों से उसकी सेना के सैन्य अभियान प्रभावित हुए हैं। दूसरी ओर, भारत में स्टारलिंक को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने के लिए अभी सुरक्षा संबंधी मंजूरियों और नियामकीय प्रक्रियाओं को पूरा करना है। इन घटनाओं ने एक अहम सवाल खड़ा किया है—क्या किसी विदेशी कंपनी के नियंत्रण वाले इंटरनेट नेटवर्क पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह भरोसा किया जा सकता है?

यूक्रेन में स्टारलिंक को लेकर क्यों उठा विवाद?
रूसयूक्रेन युद्ध के दौरान स्टारलिंक यूक्रेन के लिए संचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। इसका इस्तेमाल सैन्य संचार, ड्रोन संचालन और युद्धक्षेत्र में सूचनाओं के आदानप्रदान के लिए किया जाता रहा है।
अक्टूबर 2026 में यूक्रेनी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि स्टारलिंक की कुछ सेवाओं पर अचानक लगाई गई सीमाओं के कारण सैन्य ड्रोन मिशन प्रभावित हुए। जेलेंस्की ने भी कहा कि सेवा पर प्रतिबंध पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। हालांकि, इन सीमाओं के पीछे कंपनी का तकनीकी निर्णय था या अमेरिकी प्रशासन की कोई भूमिका, इसे लेकर विवाद बना हुआ है।
भारत की चिंता सिर्फ इंटरनेट की नहीं, सुरक्षा की भी है
भारत में स्टारलिंक की शुरुआत को लेकर सरकार की प्राथमिक चिंताओं में राष्ट्रीय सुरक्षा, संवेदनशील क्षेत्रों में नेटवर्क पर नियंत्रण और भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा शामिल हैं। सैटेलाइट इंटरनेट पारंपरिक मोबाइल टावरों और फाइबर नेटवर्क से अलग तरीके से काम करता है, इसलिए इसके नेटवर्क पर निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
सरकार चाहती है कि भारत में इस्तेमाल होने वाले नेटवर्क पर भारतीय कानूनों के अनुसार निगरानी की जा सके। इसमें भारतीय इंटरनेट ट्रैफिक को देश के भीतर स्थित गेटवे से गुजारना, अधिकृत एजेंसियों के लिए कानूनी निगरानी की व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर निर्धारित क्षेत्रों में सेवाओं को प्रतिबंधित करने की क्षमता जैसे पहलू शामिल हैं।
स्टारलिंक को भारत में अभी तक हरी झंडी क्यों नहीं?
स्टारलिंक को भारत में आवश्यक लाइसेंस और अंतरिक्ष नियामक INSPACe की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने के लिए सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाएं और स्पेक्ट्रम से जुड़े कदम अभी बाकी हैं। सरकार का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देने वाली सभी कंपनियों को सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।
संचार मंत्रालय के मुताबिक, स्टारलिंक के साथ रिलायंस जियो की सैटेलाइट इकाई और भारती एयरटेल समर्थित वनवेब की सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जा रही है। सरकार ने इस प्रक्रिया को किसी एक कंपनी के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताए जाने के आरोपों को खारिज किया है।