उत्तर प्रदेश के हरदोई में ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी खरीद व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हैरानी की बात यह है कि ठगी किसी आम नागरिक के साथ नहीं, बल्कि खुद पुलिस के ही साथ हो गई है. अब नगर कोतवाली में इस संबंध में एफआईआर दर्ज किया गया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक थानों में CCTV कैमरे लगाने के लिए मुंबई की एक फर्म के साथ करार हुआ था.

करार के मुताबिक फर्म को 52 लाख 51 हजार 672 रुपये का भुगतान भी कर दिया गया. आरोप है कि छह महीने बीतने के बाद भी न तो फर्म के कर्मचारी पहुंचे और ना ही कैमरे और इससे संबंध दूसरे उपकरण ही आए हैं. अब सवाल यह है कि काम हुआ तो नहीं तो भुगतान पूरा कैसे हुआ? इसी के साथ यह भी सवाल है कि पूरा भुगतान हो गया ते सामान आखिर गया कहां? फिलहाल इस मामले में पुलिस बयान देने से बच रही है.
यह है पूरा मामला
पुलिस सूत्रों के मुताबिक सरकारी खरीद पोर्टल GeM के जरिए मुंबई के अंधेरी ईस्ट की फर्म Light Force Buildimt Limited को CCTV कैमरे और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई थी. प्रतिसार निरीक्षक यशवंत प्रताप सिंह की तहरीर के मुताबिक, करार के मुताबिक भुगतान हो गया, लेकिन इसके बाद फर्म संचालक अमित राय से बारबार संपर्क किया गया, लेकिन हर बार बहाने बनाकर वह आपूर्ति टालते रहे.
अब दर्ज हुई एफआईआर
आखिरकार छह महीने बाद इस संबंध में शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है. हरदोई के पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने के आदेश दिए हैं. इसी क्रम में शहर कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.
पूरी प्रक्रिया पर उठे सवाल
सवाल सिर्फ 52 लाख रुपये का नहीं, बल्कि सरकारी खरीद प्रक्रिया की निगरानी का भी है. जब पूरा भुगतान हो गया तो सामान की आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या भुगतान से पहले सभी जरूरी शर्तों और आपूर्ति की स्थिति की पर्याप्त जांच हुई थी? अगर कैमरे नहीं पहुंचे, तो इस देरी का पता समय रहते क्यों नहीं चला? इन सवालों के जवाब जांच में सामने आने चाहिए, क्योंकि यह जनता के पैसे और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा मामला है.