: सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और वोटरों के नाम काटे जाने के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के कई नेताओं ने याचिका दाखिल कर SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी से भी जवाब मांगा है।

गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने राहुल गांधी , समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ) और अन्य नेताओं की सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने से संबंधित अलग याचिका पर भी नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि वह अगली सुनवाई पर याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण के बारे में सवाल करना चाहेगी।
‘कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं बना सकता’
सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का जिक्र किया। इस पर पीठ ने टिप्पणी की, “कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं बना सकता। हम हाथीदांत के मीनारों में बैठकर काम नहीं कर रहे हैं।” मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगली सुनवाई पर याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण के बारे में पूछा जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित मामलों को पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ा जाएगा।
SIR प्रक्रिया को चुनौती, वोटरों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से 12 अक्टूबर को दाखिल याचिका में चुनाव आयोग के SIR से जुड़े फैसलों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि मतदाता सूची से किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले। याचिका में बूथवार उन मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है, जिनके नाम हटाए गए हैं। साथ ही, नाम हटाने के कारण और संबंधित जनसांख्यिकीय विवरण प्रकाशित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि SIR से जुड़े फैसलों की संवैधानिक वैधता की जांच होनी चाहिए। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 324, निर्वाचन आयोग से संबंधित 2023 के कानून और सुप्रीम कोर्ट के टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया गया है।
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विपक्ष के कई बड़े नेता याचिका में शामिल
इस याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे , समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, NCP नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना नेता संजय राउत समेत कई विपक्षी नेता शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने असदुद्दीन ओवैसी समेत अन्य नेताओं की ओर से चुनाव आयोग से जुड़े अलगअलग मामलों में दाखिल याचिकाओं पर भी केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं।
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दिल्ली में CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली में भी कई प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। इसी दौरान 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने के आरोपों से जुड़ा मामला भी सुप्रीम कोर्ट के सामने आया।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि बिना शर्त माफी देने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित कार्रवाई का बचाव नहीं किया जा सकता।
इस पर पीठ ने कहा कि वह मीडिया रिपोर्टों के आधार पर यह संज्ञान नहीं ले रही कि अधिकारियों ने अदालत के सामने बिना शर्त माफी मांगी है। यह अवमानना मामला सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के कथित उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें 10 अक्टूबर को कॉकroach जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाने को कहा गया था। फिलहाल, SIR और मतदाता सूची से नाम हटाने के आरोपों पर चुनाव आयोग को अपना जवाब दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई में अदालत याचिकाकर्ताओं के आचरण से जुड़े सवाल पर भी चर्चा कर सकती है।
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