Lata Mangeshkar : हिंदी सिनेमा में कुछ गाने ऐसे होते हैं, जो समय बीतने के बाद भी लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखते हैं। ऐसा ही एक गीत है, जिसे सुनकर आज भी मां और बेटे के रिश्ते की गहराई महसूस होती है। स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आवाज में सजा यह गाना साल 2006 में आई फिल्म रंग दे बसंती का है। गाने के बोल हैं ‘लुका छुपी बहुत हुई’। इस गीत में एक मां की अपने बेटे को वापस बुलाने की तड़प है, जो सुनने वालों की आंखें नम कर देती है।

Lata Mangeshkar के गीत ‘लुका छुपी’ में छिपा है मांबेटे के बिछड़ने का दर्द
‘लुका छुपी’ को लता मंगेशकर और एआर रहमान ने अपनी आवाज दी थी। इसके बोल प्रसून जोशी ने लिखे थे, जबकि संगीत एआर रहमान ने तैयार किया था। यह गीत केवल एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि उस मां की भावनाओं को सामने लाता है, जो अपने बेटे को खोने के बाद भी उसे पुकारती रहती है।
गीत में मां अपने बच्चे से सामने आने और घर लौटने की गुहार लगाती है। उसकी आवाज में चिंता, बेचैनी और बिछड़ने का दर्द साफ महसूस होता है। वहीं बेटे की आवाज उस दुनिया की झलक देती है, जहां वह अब लौटकर नहीं आ सकता। यही भाव इस गीत को खास बनाते हैं।
फिल्म के इस दृश्य ने दर्शकों को कर दिया था भावुक
राकेश ओमप्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी फिल्म रंग दे बसंती में आर माधवन ने फ्लाइट लेफ्टिनेंट अजय सिंह राठौड़ का किरदार निभाया था। वहीदा रहमान फिल्म में उनकी मां की भूमिका में थीं।
कहानी में अजय की विमान दुर्घटना में मौत हो जाती है। इसके बाद जब उसका पार्थिव शरीर घर पहुंचता है, तब मां के दर्द को इस गीत के जरिए दिखाया जाता है। प्रसून जोशी के शब्द, एआर रहमान का संगीत और लता मंगेशकर की भावपूर्ण आवाज मिलकर इस दृश्य को बेहद मार्मिक बना देते हैं।
Lata Mangeshkar के करियर का यादगार आखिरी फिल्मी गीत
‘लुका छुपी’ को लता मंगेशकर के आखिरी फिल्मी गीत के रूप में याद किया जाता है। हालांकि, इसके बाद भी उन्होंने गैरफिल्मी गीत रिकॉर्ड किए। साल 2019 में उनका गीत ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी की’ रिलीज हुआ था, इसलिए आखिरी फिल्मी गीत और आखिरी रिलीज गीत में अंतर समझना जरूरी है।
लता मंगेशकर की आवाज ने ‘लुका छुपी’ को ऐसी भावनात्मक पहचान दी, जो आज भी कायम है। मांबेटे के रिश्ते, जुदाई और यादों को महसूस कराने वाला यह गीत भारतीय सिनेमा के यादगार गीतों में शामिल है।