केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 8 अक्टूबर 2026 को इनकम टैक्स नियमों के तहत Form 161 का संशोधित प्रारूप जारी किया है. इसके जरिए पात्र करदाता आय की गलत जानकारी देने या अन्य निर्धारित मामलों में लगी पेनल्टी माफ कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं. हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तों को पूरा करना जरूरी है.

अगर इनकम टैक्स विभाग ने आप पर पेनल्टी लगाई है, तो आपको इससे राहत पाने का मौका मिल सकता है. CBDT ने Form 161 में बदलाव किया है, जिससे पात्र टैक्सपेयर पेनल्टी माफ कराने और कुछ मामलों में कानूनी से राहत पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं. पहले आय की गलत जानकारी देने से जुड़े कुछ मामलों में इस प्रक्रिया के तहत राहत का विकल्प उपलब्ध नहीं था.
हुआ ये बदलाव
भारत के ईगजट में प्रकाशित अधिसूचना G.S.R. 871 के मुताबिक, संशोधित फॉर्म 8 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है. इस बदलाव का मकसद टैक्स विवादों को जल्दी सुलझाना और लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचने का अवसर देना है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नए फॉर्म से पात्र करदाताओं को पेनल्टी माफी और अभियोजन से राहत मांगने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होगी. हालांकि, यह राहत अपने आप नहीं मिलेगी. इसके लिए कानून में तय शर्तों को पूरा करना होगा.
पेनल्टी माफी के लिए क्या हैं शर्तें?
इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 440 के तहत राहत पाने के लिए करदाता को असेसमेंट या दोबारा असेसमेंट के आदेश के अनुसार तय समय में टैक्स और ब्याज चुकाना होगा. आय की गलत जानकारी से जुड़े निर्धारित मामलों में करदाता को कम बताई गई आय पर बनने वाले टैक्स के बराबर एक्स्ट्रा टैक्स भी देना पड़ सकता है. कुछ अन्य निर्धारित मामलों में यह रकम संबंधित टैक्स की 120% होगी. इसके अलावा, करदाता ने संबंधित असेसमेंट और पेनल्टी के आदेश के खिलाफ अपील नहीं की होनी चाहिए. उसे संबंधित आदेश मिलने वाले महीने के खत्म होने के एक महीने के भीतर असेसिंग ऑफिसर के पास Form 161 जमा करना होगा.
फॉर्म में असेसमेंट, कम बताई गई आय, टैक्स देनदारी और किए गए भुगतान की जानकारी देनी होगी. साथ ही, अपील नहीं करने से जुड़ा घोषणापत्र भी देना होगा. अगर संबंधित अध्याय के तहत अभियोजन की कार्यवाही पहले ही शुरू हो चुकी है, तो यह राहत नहीं मिल सकती.
आवेदन के बाद क्या होगा?
आवेदन मिलने के बाद असेसिंग ऑफिसर को उसकी जांच करनी होगी और आवेदन प्राप्त होने वाले महीने के अंत से तीन महीने के भीतर फैसला करना होगा. आवेदन खारिज करने से पहले करदाता को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा. अगर आवेदन स्वीकार हो जाता है, तो करदाता संबंधित असेसमेंट या दोबारा असेसमेंट के आदेश को बाद में अपील या रिवीजन के जरिए चुनौती नहीं दे सकेगा.