US Suspends Green Card: अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने भारतीय आईटी कंपनियों समेत दुनिया की आठ बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है।

अमेरिकी श्रम विभाग ने इंफोसिस , टीसीएस , विप्रो , एचसीएल , कॉग्निजेंट , कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम सस्पेंड करने का ऐलान किया है।
इन कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास दिलाने वाली प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग के आरोप हैं।
The exorbitant H1B fees have already made American companies think twice about hiring Indian professionals.
Now, by suspending the PERM programme for major Indian IT companies, the Trump administration has made it harder for Indian companies operating in the US to sponsor… https://t.co/ssVpAstbg2
— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ October 8, 2026
PERM क्या है?
PERM अमेरिकी श्रम विभाग की एक प्रमाणन प्रक्रिया है, जिसके तहत कंपनियों को यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं हैं।
यह प्रक्रिया ज्यादातर रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड आवेदनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नए PERM आवेदनों पर कार्रवाई नहीं होगी
अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग के मुताबिक, निलंबन के दौरान संबंधित कंपनियों के नए PERM आवेदनों पर कार्रवाई नहीं होगी।
पहले से लंबित आवेदनों की प्रोसेसिंग भी रोक दी जाएगी। हालांकि, इस कार्रवाई से कर्मचारियों के मौजूदा H1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होंगे।
माइक्रोसॉफ्ट पर US कर्मचारियों की छंटनी का आरोप
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी ने वर्ष 2025 में हजारों अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि विदेशी कर्मचारियों के लिए बड़ी संख्या में वीजा और स्थायी निवास से जुड़े आवेदन किए।
उन्होंने अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा को इस कार्रवाई की अहम वजह बताया।
इन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रोसेस पर पड़ेगा असर
इस फैसले का असर अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ सकता है। विशेष रूप से उन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है, जो अस्थायी वीजा से स्थायी निवास की ओर बढ़ रहे हैं।
इसके अलावा कंपनियों की कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
विदेशी छात्रों से जुड़े वीजा के दुरुपयोगी की आशंका
अमेरिकी प्रशासन ने हार्वर्ड , येल और स्टैनफोर्ड समेत नौ विश्वविद्यालयों की भी जांच करने की घोषणा की है। इन संस्थानों पर विदेशी छात्रों से जुड़े वीजा कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग की जांच की जाएगी।