शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
छोटे शहरों में खुल रहे गोल्ड स्टोर, मेट्रो सिटीज में स्पेस की कमी बनी बड़ी वजह​ | टीम इंडिया से नजरअंदाज हो रहे युजवेंद्र चहल ने लिया संन्यास, क्या अब IPL और भारत के लिए नही खेलेंगे क्रिकेट?​ | UP Home Guard Result: यूपी होमगार्ड भर्ती का फाइनल रिजल्ट जारी, 41424 अभ्यर्थियों का चयन​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

फोन से फ्रिज तक, 10 साल में बदला कर्ज का बाजार; क्या EMI के तले दब रहा आम आदमी?​

भारत में कर्ज लेने का तरीका पिछले 10 साल में काफी बदल गया है. एक दशक पहले पहली बार कर्ज लेने वाले यानी न्यूटूक्रेडिट ग्राहकों के लिए खेती से जुड़े लोन और टूव्हीलर लोन बड़े एंट्री पॉइंट हुआ करते थे, लेकिन अब लोग मोबाइल फोन, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे कंज्यूमरड्यूरेबल्स के लिए पहली बार लोन […]

भारत में कर्ज लेने का तरीका पिछले 10 साल में काफी बदल गया है. एक दशक पहले पहली बार कर्ज लेने वाले यानी न्यूटूक्रेडिट ग्राहकों के लिए खेती से जुड़े लोन और टूव्हीलर लोन बड़े एंट्री पॉइंट हुआ करते थे, लेकिन अब लोग मोबाइल फोन, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे कंज्यूमरड्यूरेबल्स के लिए पहली बार लोन ले रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आदमी अपने शौक और आराम पर खर्च करके कहीं EMI के जंजाल में फंसता तो नहीं चला जा रहा है?

ट्रांसयूनियन सिबिल और फाइनेंस इंडस्ट्री डेवलपमेंट काउंसिल की स्टडी के मुताबिक, जून 2026 में खत्म हुई तिमाही में पहली बार क्रेडिट लेने वाले ग्राहकों को दिए गए लोन में NBFCs की हिस्सेदारी 50% तक पहुंच गई. 2016 की इसी अवधि में यह हिस्सेदारी सिर्फ 24% थी. यानी 10 साल में NTC ग्राहकों को लोन देने में NBFCs की भूमिका दोगुने से ज्यादा बढ़ी है.

अब फोन और फ्रिज से हो रही क्रेडिट की शुरुआत

NTC यानी न्यूटूक्रेडिट ऐसे ग्राहक होते हैं, जिनका रिटेल क्रेडिट ब्यूरो में इससे पहले कोई लोन रिकॉर्ड नहीं होता. ऐसे ग्राहकों के लिए कंज्यूमरड्यूरेबल लोन अब फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम में एंट्री का सबसे बड़ा जरिया बन गया है.

जनवरी से जून 2026 के बीच NTC लोन में कंज्यूमरड्यूरेबल लोन की हिस्सेदारी 30% रही. इसके बाद पर्सनल लोन 12%, गोल्ड लोन 11% और टूव्हीलर लोन 10% रहे. बाकी 37% लोन दूसरे प्रोडक्ट्स के थे.

यानी अब पहली बार कर्ज लेने वाला ग्राहक जरूरी नहीं कि बाइक या खेती के लिए ही लोन ले. मोबाइल, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे रोजमर्रा के सामान को EMI पर खरीदना भी उसके फॉर्मल क्रेडिट सफर की शुरुआत बन रहा है.

क्यों लोन ले रहा भारतीय?

10 साल पहले खेती से जुड़ा था क्रेडिट का पहला कदम

2016 की पहली छमाही में तस्वीर बिल्कुल अलग थी. उस समय किसान क्रेडिट कार्ड NTC लोन में सबसे बड़ा प्रोडक्ट था. इसकी हिस्सेदारी 18% थी. इसके बाद एग्रीकल्चर लोन 11%, टूव्हीलर लोन 10%, गोल्ड लोन 8% और कंज्यूमरड्यूरेबल लोन सिर्फ 6% था.

यानी 10 साल में क्रेडिट की जरूरत और उसे पूरा करने वाले प्रोडक्ट दोनों बदले हैं. पहले खेती और वाहन जैसे बड़े खर्च के लिए लोन लेना ज्यादा आम था, जबकि अब छोटे टिकट साइज के कंज्यूमर लोन भी बड़ी संख्या में लोगों को फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम से जोड़ रहे हैं.

फोन की EMI बन रही क्रेडिट एंट्री का जरिया

ट्रांसयूनियन सिबिल के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव भावेश जैन के मुताबिक, कंज्यूमरड्यूरेबल लेंडिंग में फोन फाइनेंसिंग सबसे तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा है.

उनका कहना है कि युवा कर्जदार अक्सर सबसे पहले मोबाइल फोन खरीदते हैं. ऐसे में फोन की EMI उनके लिए फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम में एंट्री का एक आसान जरिया बन सकती है.

2026 की पहली छमाही में जेनरेशन Z के उधारकर्ताओं को दिए गए करीब 46% क्रेडिट NBFCs से मिले. हालांकि, CIBIL के डेटा में फोन के लिए लिए गए लोन को अलग से पहचानना संभव नहीं है. इसलिए लोन के टिकट साइज के आधार पर फोन फाइनेंसिंग की ग्रोथ का अंदाजा लगाया जाता है.

50 हजार रुपये से कम के लोन सबसे ज्यादा

कंज्यूमरड्यूरेबल लोन के बढ़ते चलन का एक और संकेत इसके छोटे टिकट साइज से मिलता है. जून 2026 में खत्म हुई तिमाही में कंज्यूमरड्यूरेबल लोन में 50 हजार रुपये से कम के लोन की हिस्सेदारी 93% थी.

ऐसे लोन की संख्या जून 2019 में खत्म हुई तिमाही के मुकाबले 2.6 गुना बढ़ गई है. इसका मतलब है कि कंज्यूमर लोन का बड़ा हिस्सा बहुत बड़े खर्च के लिए नहीं, बल्कि छोटे और रोजमर्रा के सामान की खरीद के लिए लिया जा रहा है.

NBFCs की क्रेडिट मार्केट में पकड़ बढ़ी

स्टडी के मुताबिक, जून 2026 में खत्म हुई तिमाही में रिटेल लोन की कुल संख्या में NBFCs की हिस्सेदारी 43% रही. वैल्यू यानी कुल लोन रकम के हिसाब से उनकी हिस्सेदारी 30% थी.

2016 की इसी अवधि में NBFCs की हिस्सेदारी संख्या के हिसाब से 33% और वैल्यू के हिसाब से 22% थी. यानी पिछले 10 साल में NBFCs की पहुंच रिटेल क्रेडिट मार्केट में बढ़ी है.

FIDC के चीफ एग्जीक्यूटिव रमन अग्रवाल के मुताबिक, NTC ग्राहकों में NBFCs की 50% हिस्सेदारी यह दिखाती है कि वे लोगों को फॉर्मल फाइनेंशियल सिस्टम से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. इससे ग्राहक अपना क्रेडिट रिकॉर्ड बना सकते हैं और आगे चलकर बैंक से लोन लेने के लिए योग्य हो सकते हैं.

क्या EMI का बढ़ता चलन कर्ज का बोझ भी बढ़ा रहा है?

कर्ज का दायरा बढ़ने का मतलब यह भी है कि अब ज्यादा लोग EMI वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन सिर्फ NTC और कंज्यूमरड्यूरेबल लोन के बढ़ने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आम आदमी कर्ज के बोझ तले दब रहा है. हालांकि, यह जरूर है कि EMI के जरिए सामान खरीदने का ट्रेंड जरूर बढ़ा है.

रिपोर्ट में NBFCs की बढ़ती हिस्सेदारी और छोटे कंज्यूमर लोन के विस्तार को क्रेडिट सिस्टम के बदलते पैटर्न के तौर पर देखा गया है. वहीं, एक्सपर्ट महामारी के बाद फोन की बढ़ती जरूरत और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सुधार को युवाओं के लोन पैटर्न में बदलाव की संभावित वजह बताया है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY