Hospital Stocks: शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से हॉस्पिटल सेक्टर के शेयरों में भारी उथलपुथल मची है. इसकी वजह सरकार का वो सख्त रुख है, जो दवाओं की मनमानी कीमतों को लेकर सामने आया है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी कैंसर की दवाओं पर भारी मार्जिन को लेकर कड़ा ऐतराज जताया था. इन सब खबरों से निवेशकों में डर का माहौल बना. नतीजे के तौर पर दिग्गज अस्पतालों के शेयर काफी नीचे आ गए. लेकिन विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज इस गिरावट को एक बेहतरीन मौके की तरह देख रही है. जेफरीज का मानना है कि इन कंपनियों के बुनियादी आधार बेहद मजबूत हैं.

दवाओं की कीमतों पर सख्ती
दरअसल सरकार मेडिकल उपकरणों से लेकर जरूरी जीवन रक्षक दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाने पर विचार कर रही है. फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने पाया था कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले सिरिंज, आईवी सेट, कार्डियक कैथेटर, पेसमेकर जैसी चीजों की खरीद कीमत के मुकाबले उनकी एमआरपी 10 से 20 गुना ज्यादा है. वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने भी कैंसर की एक दवा को लेकर हैरानी जताई थी. कोर्ट ने पाया कि जिस दवा की खरीद कीमत 2,700 रुपये है, उसकी एमआरपी 27,000 रुपये रखी गई. कोर्ट ने इन पर 16 फीसदी का एक समान मार्जिन कैप लगाने का सुझाव दिया है. इन्ही चिंताओं के कारण शेयरों में बिकवाली देखने को मिली.
जेफरीज ने चुने ये 6 शेयर
इन तमाम मुश्किलों के बीच जेफरीज ने 6 बड़े हॉस्पिटल शेयरों में निवेश बनाए रखने की सलाह दी है. ब्रोकरेज ने इन्हें ‘बाय’ रेटिंग दी है. इनमें फोर्टिस हेल्थकेयर का टारगेट प्राइस 1,125 रुपये रखा गया है. इसके अलावा डॉ अग्रवाल हेल्थकेयर के लिए 600 रुपये, मणिपाल के लिए 870 रुपये का लक्ष्य तय किया गया है. लिस्ट में मैक्स हेल्थ को 1,260 रुपये, अपोलो हॉस्पिटल्स को 10,350 रुपये वहीं मेदांता को 1,660 रुपये के टारगेट के साथ शामिल किया गया है.
नुकसान से निपटने की रणनीति
ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि अगर सरकार मार्जिन कैप लागू करती है, तो अस्पतालों के कुल रेवेन्यू पर असर पड़ेगा. इससे उनके एबिटा में 2 से 5 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है. लेकिन अस्पतालों के पास इस नुकसान से निपटने के कई तरीके मौजूद हैं. करीब एक दशक पहले जब हार्ट स्टेंट समेत कई चीजों के दाम 70 से 85 फीसदी तक कम किए गए थे, तब भी अस्पतालों ने इसका रास्ता निकाल लिया था. उन्होंने अगले 12 से 15 महीनों में इलाज के बाकी खर्चों को धीरेधीरे बढ़ाकर अपने नुकसान की भरपाई कर ली थी. अपोलो जैसे अस्पतालों ने कुछ ही तिमाहियों में अपना मुनाफा वापस पहले वाले स्तर पर ला दिया था.
निवेशकों के लिए खास मौका
जेफरीज का कहना है कि सेक्टर की डिमांड अभी भी काफी मजबूत है. हालिया गिरावट के बाद इन शेयरों का वैल्युएशन काफी आकर्षक हो गया है. पहले जहां ये शेयर 25 से 35 गुना के वैल्युएशन पर ट्रेड कर रहे थे, वहीं अब ये घटकर 20 से 27 गुना पर आ गए हैं. इतिहास भी गवाह है कि जब भी ऐसी रेगुलेटरी पाबंदियां आई हैं, शेयरों ने 3 से 6 महीने में दोबारा शानदार वापसी की है. इसलिए लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ये गिरावट एक मुनाफे वाला एंट्री पॉइंट साबित हो सकती है.