मंगलवार, 29 सितंबर 2026 ब्रेकिंग
शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 700 अंक टूटा, रुपया भी 96 के पार कमजोर, जानिए आज बाजार में गिरावट की असली वजहें|​ | गजब! थाने के बाहर से सीज डंपर उड़ा ले गए बदमाश, खबर मिलते मचा हड़कंप​ | भारत के एस्सार ग्रुप का अमेरिका में बजा डंका: 1.73 लाख करोड़ रुपये के निवेश से आयोवा में स्थापित होगा नया स्टील प्लांट|​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

IRDAI Guidelines: 28% वाला कमीशन घटकर होगा 2%, अब बदल जाएगा इंश्योरेंस का पूरा गणित​

IRDAI Guidelines: बीमा क्षेत्र के रेगुलेटर IRDAI ने जीवन बीमा कंपनियों के लिए एक नया खाका तैयार किया है. इसका असर देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC समेत कई अन्य कंपनियों पर पड़ने वाला है. IRDAI के चेयरमैन अजय सेठ ने साफ कर दिया है कि बीमा कंपनियों को अपने मैनेजमेंट खर्च में बड़ी […]

IRDAI Guidelines: बीमा क्षेत्र के रेगुलेटर IRDAI ने जीवन बीमा कंपनियों के लिए एक नया खाका तैयार किया है. इसका असर देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC समेत कई अन्य कंपनियों पर पड़ने वाला है. IRDAI के चेयरमैन अजय सेठ ने साफ कर दिया है कि बीमा कंपनियों को अपने मैनेजमेंट खर्च में बड़ी कटौती करनी होगी. इसका सबसे बड़ा फायदा आम ग्राहकों को मिलेगा, क्योंकि कंपनियों का खर्च घटने से पॉलिसीधारकों को बेहतर रिटर्न की उम्मीद बंधेगी. जो कंपनियां पहले से ही कम खर्च पर काम कर रही हैं, उन्हें भी अपनी व्यवस्था को और चुस्तदुरुस्त करना होगा.

खर्च घटाने का नया टारगेट

मौजूदा समय में बीमा कंपनियों का मैनेजमेंट खर्च करीब 16 प्रतिशत के आसपास रहता है. रेगुलेटर ने अगले पांच सालों में इसे घटाकर 12.5 प्रतिशत तक लाने का प्रस्ताव रखा है. अजय सेठ का मानना है कि जो कंपनियां 12 प्रतिशत पर काम कर रही हैं, उनके पास इसे 10 प्रतिशत से नीचे लाने की पूरी गुंजाइश है.

SBI Life का खर्च फिलहाल 11 प्रतिशत है, जबकि LIC का आंकड़ा 12 प्रतिशत के करीब है. तय नियमों के हिसाब से ये दोनों दिग्गज कंपनियां सही दायरे में हैं. इसके बावजूद रेगुलेटर चाहता है कि ये कंपनियां अगले पांच सालों में अपना खर्च 10 प्रतिशत के करीब ले आएं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, SBI Life के कम लागत वाले बैनकाश्योरेंस मॉडल व LIC के मजबूत एजेंसी डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को देखते हुए ये लक्ष्य दोनों के लिए हासिल करना संभव है. अजय सेठ का कहना है कि अगर बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली कंपनियां कम लागत में काम कर सकती हैं, तो 20 से 25 प्रतिशत खर्च करने वाली कंपनियों को भी अपने मॉडल में बदलाव लाना चाहिए.

बैंकों की कमाई पर पड़ेगा तगड़ा असर

इस नए ढांचे के लागू होने से बैंकों के जरिए बेची जाने वाली बीमा पॉलिसियों के पेआउट में भारी गिरावट आ सकती है. क्रेडिटलाइफ इंश्योरेंस पर मिलने वाले कमीशन को 2 प्रतिशत तक सीमित किया जा सकता है. फिलहाल ये कमीशन 28 प्रतिशत से लेकर 45 प्रतिशत तक होता है.

कमीशन में इस भारी कटौती का सीधा असर बैंकों की बैलेंस शीट पर पड़ेगा. मैक्वेरी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव से HDFC बैंक व Axis बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2026 में Axis बैंक की कुल कमाई में बैनकाश्योरेंस फीस की हिस्सेदारी बढ़कर 2.4 प्रतिशत हो गई है. वहीं इसके मुनाफे में इसका योगदान 9.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.5 प्रतिशत हो गया है. इसी तरह HDFC बैंक की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 में बीमा फीस की हिस्सेदारी कमाई में 1.9 प्रतिशत व मुनाफे में 7.3 प्रतिशत रही है.

दूसरी तरफ ICICI बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक व SBI पर इसका असर काफी कम देखने को मिलेगा. वित्त वर्ष 2026 में ICICI बैंक के मुनाफे में बीमा फीस का योगदान सिर्फ 0.6 प्रतिशत रहा. वहीं कोटक महिंद्रा बैंक के मुनाफे में 5.8 प्रतिशत व SBI के मुनाफे में 2.6 प्रतिशत का ही योगदान रहा है. एक अनुमान के मुताबिक, अन्य NBFCs को भी इससे 4 से 8 प्रतिशत तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है.

छोटी कंपनियों के लिए बड़ा मौका

IRDAI की इस नई पहल से बीमा बाजार का पूरा खेल बदल सकता है. खर्चे कम होने से बाजार में एक नया कंपीटिशन देखने को मिलेगा. अजय सेठ ने स्पष्ट किया है कि ये नियम सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है. अगर छोटी बीमा कंपनियां अपनी क्षमता बढ़ाती हैं, तो वे बड़े स्थापित खिलाड़ियों को आसानी से पीछे छोड़ सकती हैं.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY