भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों भारी बिकवाली और मंदी का दौर देखने को मिल रहा है। पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और रुपये में कमजोरी के कारण घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस मंदी के चलते निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

शुरुआती कारोबार और सूचकांक की स्थिति
सप्ताह के दूसरे दिन बाजार की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई। 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 200 अंकों की गिरावट के साथ 72,633.68 पर खुला। वहीं, 50 शेयरों वाला निफ्टी ने 22,732.45 पर अपने कारोबार की शुरुआत की।
सुबह 9 बजकर 37 मिनट पर सेंसेक्स 704.88 अंक की भारी गिरावट के साथ 72,066.84 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसके अलावा, सुबह 9 बजकर 39 मिनट पर निफ्टी भी 203.55 अंक यानी 0.89 फीसदी लुढ़ककर 22,576.70 के स्तर पर आ गया।
सेंसेक्स के टॉप गेनर्स और लूजर्स
कारोबार के दौरान सेंसेक्स के 30 शेयरों में से अधिकांश में बिकवाली हावी रही:
- टॉप गेनर्स: शुरुआती घंटों में सनफार्मा और अडानी पोर्ट्स ही हरे निशान में नजर आए।
- टॉप लूजर्स: बाजार में गिरावट के कारण बजाज फाइनेंस , एचडीएफसी बैंक , कोटक महिंद्रा बैंक , रिलायंस इंडस्ट्रीज और इन्फोसिस में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी के शेयरों का हाल
सुबह 10 बजकर 2 मिनट पर निफ्टी के 50 शेयरों में से केवल 6 शेयरों में तेजी और 44 शेयरों में मंदी देखी गई:
- निफ्टी गेनर्स: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड , सिप्ला और सनफार्मा बढ़त पर रहे।
- निफ्टी लूजर्स: टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड , एचडीएफसी लाइफ , जियो फाइनेंस , बजाज फाइनेंस और विप्रो नुकसान उठाने वाले प्रमुख शेयर रहे।
निवेशकों के डूबे 8 लाख करोड़ रुपये
बीते कारोबारी सत्र यानी सोमवार को भी बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली थी। सोमवार को सेंसेक्स 1,124.02 अंक लुढ़ककर 72,771.72 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 360.25 अंक गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ था।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सोमवार के इस भारी उतारचढ़ाव के कारण बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर करीब 474 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। इस एक दिन की गिरावट में निवेशकों के लगभग 8 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
बाजार में गिरावट की मुख्य वजहें
भारतीय शेयर बाजार में इस समय आ रही गिरावट के पीछे कई बड़े वैश्विक और आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं:
- पश्चिम एशिया का तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ है, जिससे कच्चे तेल की सप्लाई में अड़चन आई है। परिणामस्वरूप, कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं।
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में ऐतिहासिक तेजी आने के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर वहां निवेश कर रहे हैं। सितंबर 2026 के इस महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने घरेलू बाजार से 25 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच दिए हैं।
- रुपये में कमजोरी: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और यह 96 के स्तर को पार कर 96.1450 के आसपास कारोबार करता हुआ दिखाई दिया है।