जब से फेड रिजर्व ने ब्याज दरों में इजाफा किया है और मिडिल ईस्ट में टेंशन बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची हैं. तब से सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है. जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में ये उतार चढ़ाव जारी रहने का अनुमान है. इसकी सबसे बड़ी वजह US डेटा, वेस्ट एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमत है. जिनका असर सोने और चांदी दोनों पर देखने को मिल सकता है.

जानकारों की मानें तो अगले हफ्ते अमेरिकी इकोनॉमिक डेटा सामने होगा, साथ ही महंगाई के आंकड़े भी सामने आएंगे. वहीं दूसरी ओर मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई, फेड रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणी और US नॉनफार्म पेरोल रिपोर्ट भी सामने होगी. जिन सबका असर इंटरनेशनल मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों पर देखने को मिलेगा.
जियो पॉलिटिकल अनिश्चितता, खासकर USईरान के बीच तनाव, अपनी भूमिका निभाती रहेगी. US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिसमें नौसैनिक नाकेबंदी हटाने के बदले एक हफ्ते के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने की बात कही गई थी. महात्मा गांधी जयंती के कारण शुक्रवार को कमोडिटी मार्केट बंद रहेंगे.
सोना ढाई और चांदी 3 फीसदी सस्ती
LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट VP जतिन त्रिवेदी ने कहा कि बाजार का नजरिया सतर्क बना हुआ है और उतारचढ़ाव ज्यादा रहने की संभावना है. बाज़ार की नजरें आने वाले US नॉनफार्म पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़ों पर होंगी. ये आंकड़े फेडरल रिजर्व के अक्टूबर के पॉलिसी फैसले के बारे में उम्मीदें तय करने में अहम होंगे. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के फ़्यूचर्स पिछले हफ्ते 3,500 रुपए या लगभग 2.3 प्रतिशत गिरकर 1.5 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए. चांदी के फ्यूचर्स 6,907 रुपए या 3 प्रतिशत गिरकर 2.34 लाख रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गए. त्रिवेदी ने कहा कि पिछले हफ्ते सोने की कीमतों में काफी उतारचढ़ाव रहा. यह 1.51.54 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड करता रहा और 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुआ.
सोने और चांदी पर दिखा डॉलर का प्रेशर
डॉलर इंडेक्स का 101 से ऊपर लगातार बने रहना सोने पर दबाव बढ़ा सकता है, मजबूत डॉलर से डॉलर में कीमत तय होने वाली बुलियन की मांग कम हो जाती है. ग्लोबल मार्केट में, दिसंबर डिलीवरी के लिए कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स पिछले हफ्ते 103.7 डॉलर या 2.34 फीसदी गिरकर 4,321.2 डॉलर प्रति औंस पर आ गए. न्यूयॉर्क में चांदी की कीमत 2.35 डॉलर या 3.5% गिरकर 64.80 डॉलर प्रति औंस हो गई. JM फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के EBG कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर ने कहा कि पिछले हफ्ते ज्यादातर ट्रेडिंग सेशन में गोल्ड फ्यूचर्स एक दायरे में ट्रेड करते रहे, लेकिन कुल मिलाकर उन पर बिकवाली का दबाव बना रहा और इंटरनेशनल कीमतें 4,300 डॉलर प्रति औंस के आसपास बंद हुईं. उन्होंने कहा कि सोने के साथसाथ इंडस्ट्रियल मेटल्स में कंसोलिडेशन और करेक्शन की वजह से सिल्वर फ्यूचर्स में भी साप्ताहिक गिरावट देखी गई.
ये भी हैं अहम फैक्टर
दबाव सिर्फ करेंसी की वजह से नहीं है. US 10साल के ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि 30साल के यील्ड 2004 के ऊंचे स्तर के करीब हैं. लंबे समय के लिए ज्यादा यील्ड से सोना और चांदी जैसी एसेट्स की मांग पर असर पड़ता है, भले ही वेस्ट एशिया और रूसयूक्रेन के बीच तनाव बना हुआ हो.
ऑयल मार्केट एक और अहम फैक्टर है. मेर ने कहा कि रूस और यूक्रेन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहे हैं, लेकिन सऊदी अरब और इराक से ज़्यादा सप्लाई की वजह से इस महीने उपलब्धता बेहतर हुई है और क्रूड की कीमतों पर दबाव पड़ा है.
त्रिवेदी ने कहा कि सोने के लिए अगली बड़ी परीक्षा US जॉब्स रिपोर्ट होगी. मजबूत आंकड़े से ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें मज़बूत हो सकती हैं और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है, जबकि कमज़ोर रोजगार डेटा से उन उम्मीदों पर लगाम लग सकती है और डॉलर के कमजोर होने से बुलियन को सपोर्ट मिल सकता है.