टाटा ट्रस्ट और टाटा संस विवाद में देश के 2 बड़े वकीलों की एंट्री ने मामले को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया है. टाटा ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी तो टाटा संस की तरफ से सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे कोर्ट में पेश होंगे. यह विवाद टाटा संस के चेयरमैन और आईपीओ से जुड़ा है. हाल ही में टाटा संस ने चंद्रशेखरन को 5 साल के लिए चेयरमैन नियुक्त किया है.

टाटा ग्रुप की तरफ से वकील अपॉइंट होने के बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने पूरे विवाद को दुखद बताया. कुछ लोगों पर नियमों के खिलाफ जाकर काम करने का आरोप लगाया. वहीं हरीश साल्वे का कहना है कि टाटा संस को लेकर जो भी फैसले हुए हैं, वो सही है.
टाटा ग्रुप और संस के बीच विवाद क्या है?
टाटा संस टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग और निवेश कंपनी है, जिसमें टाटा ट्रस्ट की 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है. यानी टाटा संस के सभी बड़े फैसलों में टाटा ट्रस्ट की सहमति जरूरी है. रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा ट्रस्ट के प्रमुख हैं. वहीं टाटा संस के चेयरमैन पद पर चंद्रशेखरन काबिज हैं.
17 सितंबर को विवाद तब बढ़ा, जब एक बैठक में चंद्रशेखरन के कार्यकाल को 5 साल के लिए बढ़ा दिया गया, जबकि चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने की बात कही थी.
रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रस्ट की बैठक में चंद्रशेखरन को लेकर ट्रस्ट के 2 सदस्य के वोट बंट गए, जिसके बाद एक अन्य मेंबर हरीश मनवानी ने चंद्रशेखरन के पक्ष में मतदान कर दिया. नोएल टाटा ‘आर्टिकल ऑफ असोसिएशन’ का हवाला देकर विरोध कर रहे हैं. .
साल्वेसिंघवी को ही दोनों ने वकील क्यों बनाया?
साल 2016 में टाटा संस के चेयरमैन पद से साइरस मिस्त्री को हटाया गया था. उस वक्त वे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. इस केस में टाटा संस की तरफ से हरीश साल्वे और अभिषेक मनु सिंघवी कोर्ट में पेश हुए. 2021 में इस मामले में फैसला आया. सर्वोच्च न्यायालय ने टाटा संस की दलीलों को सही ठहराया.
कोर्ट ने कहा कि निवेशकों के हित में टाटा संस का फैसला सही है. सिंघवी और हरीश साल्वे ने इस पूरे विवाद में टाटा ग्रुप और टाटा संस के पक्ष को बेहतरीन तरीके से कोर्ट के सामने रखा.
टाटा ट्रस्ट के वकील हायर होने के बाद सिंघवी ने सोशल मीडिया पर लिखा टाटा संस के विवाद के वक्त मुझे रतन टाटा के साथ काम करने का और टाटा ग्रुप को समझने के मौका मिला था. इस विवाद को सही तरीके से न सुलझा पाना दुखद है.
टाटा संस की तरफ से वकील हायर होने वाले हरीश साल्वे का कहना है कि यह अंदरूनी विवाद है. टाटा ट्रस्ट नहीं चाहता है कि टाटा संस की लिस्टिंग की जाए. श्रीनिवासन को भी इसके लिए पत्र लिखा गया था. यानी हरीश साल्वे को भी टाटा ग्रुप की एकएक अंदरूनी बातों की जानकारी है.
अभिषेक सिंघवी VS हरीश साल्वे: एकएक डिटेल
जोधपुर में जन्मे अभिषेक मनु सिंघवी 34 साल की उम्र में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट बन गए. 37 साल की उम्र में सिंघवी भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बनाए गए. सिंघवी की पहचान सुप्रीम कोर्ट के तेजतर्रार वकीलों में होती है. सिंघवी आम तौर पर एक मामले में पेश होने के लिए 1225 लाख रुपए तक लेते हैं. अमूमन सिंघवी संविधान, पब्लिक लॉ, क्रिमिनल लॉ और कॉरपोरेट लॉ मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पेश होते हैं.
सिंघवी की पढ़ाई लिखाई कैम्ब्रिज और हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में हुई है. Siddh AI समूह ने सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड को लेकर एक रिसर्च रिपोर्ट जारी की है. इसके मुताबिक 2021 से 2026 के बीच सिंघवी कम से कम 2043 केस में पेश हुए.
दूसरी तरफ महाराष्ट्र के धुले में जन्मे 65 साल के हरीश साल्वे भी देश के मशहूर वकील हैं. एक केस की सुनवाई के लिए साल्वे भी 15 लाख रुपए तक लेते हैं. नागपुर विश्वविद्यालय से कानूनी की पढ़ाई कर चुके साल्वे चार्टर्ड अकाउंटेंट की परीक्षा भी पास कर चुके हैं.
Siddh AI की डेटा रिपोर्ट के मुताबिक 2021 से 2026 तक साल्वे 337 केसों में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. इस दौरान 884 हियरिंग में उन्होंने भाग लिया.