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रोटी या चावल…फैटी लिवर वालों के लिए क्या है ज्यादा बेहतर? एक्सपर्ट से समझें​

भारतीयों में फैटी लिवर की शिकायत तेजी से बढ़ रही है. शराब न पीने वालों में भी ये हेल्थ प्रॉब्लम देखी जा रही है. सबसे बड़ा कारण तलाभुना और मसालेदार खानपान है. बिगड़े हुए लाइफसाइटल की वजह से भी ऐसा हो रहा है. लिवर से जुड़ी इस शिकायत के होने पर लगो खानपान में बदलाव […]

भारतीयों में फैटी लिवर की शिकायत तेजी से बढ़ रही है. शराब न पीने वालों में भी ये हेल्थ प्रॉब्लम देखी जा रही है. सबसे बड़ा कारण तलाभुना और मसालेदार खानपान है. बिगड़े हुए लाइफसाइटल की वजह से भी ऐसा हो रहा है. लिवर से जुड़ी इस शिकायत के होने पर लगो खानपान में बदलाव करते हैं. इसमें एक सवाल ये भी है कि फैटी लिवर होने पर चावल खाने चाहिए या गेहूं की रोटी. डॉक्टर जतींदर सिंह भोगल कहते हैं कि अगर आपको फैटी लिवर है और आप रोटी और चावल में से किसी एक को चुनना चाहते हैं, तो होल व्हीट की रोटी चावल से बेहतर चॉइस हो सकती है.

खानपान में समय रहते बदलाव न किया जाए तो लिवर सिरोसिस तक हो सकता है. चावल या रोटी में किसे किसे चुनना बेहतर है. चलिए आपको डॉक्टर के जरिए समझाते हैं…

रोटी को चुनना है बेहतर

इसकी सबसे बड़ी वजह है कि रोटी में फाइबर ज्यादा मिल सकता है, खासकर जब वह होल व्हीट, ज्वार या बाजरे जैसे साबुत अनाज से बनी हो. फाइबर की वजह से खाना धीरे पचता है और पेट ज्यादा देर तक भरा रहता है. इससे बारबार भूख लगने और जरूरत से ज्यादा खाने से बचने में मदद मिल सकती है. फैटी लिवर में वजन को कंट्रोल करना काफी इम्पोर्टेन्ट है, इसलिए फाइबर वाला खाना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

अब चावल को समझते हैं

फैटी लिवर में चावल पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर आप सफेद चावल खाते हैं, तो इसकी मात्रा पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. सफेद चावल में फाइबर कम होता है और इसे ज्यादा मात्रा में खाना भी काफी आसान होता है. इसलिए एक बड़ी प्लेट चावल खाने के बजाय छोटी मात्रा में चावल लेना बेहतर है. अगर आपको चावल पसंद है, तो ब्राउन राइस जैसे साबुत अनाज वाले विकल्प भी लिए जा सकते हैं.

रोटी और चावल में फर्क क्या है

मान लीजिए आप दो होल व्हीट रोटियां खाते हैं. इनके साथ दाल और सब्जी लेने पर आपको फाइबर के साथ प्रोटीन भी मिल जाता है और पेट भी लंबे समय तक भरा रहता है. वहीं अगर आप एक बड़ी प्लेट सफेद चावल लेते हैं और साथ में दाल और सब्जी बहुत कम है, तो खाने में फाइबर और प्रोटीन कम पड़ सकते हैं. इसलिए सिर्फ चावल होने की वजह से प्रॉब्लम नहीं है, प्रॉब्लम तब होती है जब चावल की मात्रा ज्यादा हो और संतुलित खाना न हो.

इसका मतलब यह भी नहीं है कि रोटी जितनी चाहें उतनी खा सकते हैं. अगर रोटी पर बहुत ज्यादा घी या तेल लगाया गया है या उसके साथ तली हुई सब्जी, मिठाई और दूसरी ज्यादा कैलोरी वाली चीजें ली जा रही हैं, तो सिर्फ रोटी चुनने से फैटी लिवर में फायदा नहीं होगा. इसी तरह चावल की छोटी मात्रा के साथ दाल, राजमा, चना, सब्जियां या पनीर जैसी प्रोटीन वाली चीजें लेना एक संतुलित खाना हो सकता है.

इन बातों का रखें ध्यान

तो प्रैक्टिकल तौर पर, फैटी लिवर में रोज के खाने के लिए होल व्हीट, ज्वार या बाजरे की रोटी को प्रेफर किया जा सकता है. चावल खाना है तो छोटी मात्रा में लें और कोशिश करें कि सफेद चावल की जगह साबुत अनाज वाला विकल्प लिया जाए. साथ में दाल या कोई दूसरा प्रोटीन और अच्छी मात्रा में सब्जियां जरूर रखें.

और सबसे जरूरी बात, फैटी लिवर में सिर्फ रोटी या चावल बदलने से लिवर ठीक नहीं होता. पूरी डाइट पर ध्यान देना, ज्यादा तेल और प्रोसेस्ड फूड कम करना, पोर्शन कंट्रोल रखना और रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी करना भी उतना ही जरूरी है. इसलिए फैसला सिर्फ रोटी या चावल का नहीं है, बल्कि कौन सा अनाज, कितनी मात्रा और पूरी प्लेट में क्या है, इसका है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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