IIT कानपुर के पूर्व छात्र धीरज सिंह ने आईआईटी में लगातार हो रही सुसाइड की घटनाओं को लेकर बड़ा खुलासा किया है. SC/ST छात्रों की मदद करने वाला एक प्लेटफ़ॉर्म संचालित करने वाले धीरज सिंह ने दावा किया है कि अलग अलग आईआईटी में बीते 20 वर्षों में 171 छात्रों ने सुसाइड किया है. उन्होंने यह डेटा RTI के जवाब और मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार की है. उन्होंने बताया कि यह आंकड़े साल 2006 से लेकर अब तक के हैं.

उन्होंने दावा किया कि शुरूआती 10 साल के आंकड़ों की अपेक्षा बाद के 10 साल में मौत के आंकड़े करीब 135% अधिक हैं. यानी साल 2016 के बाद मौत के मामलों में 135 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि साल 2006 से 2015 के बीच कुल 51 मौतें हुईं थीं. वहीं साल 2016 से सितंबर 2026 के बीच मौत का आंकड़ा बढ़कर 120 हो गया. धीरज सिंह के मुताबिक इनमें भी करीब 82 फीसदी सुसाइड IIT कैंपस में हुईं हैं.
परीक्षा का दबाव तो कारण नहीं?
उन्होंने ये आंकड़े देश के सामने रखते हुए सभी घटनाओं के पीछे के कारणों की बारीकी से जांच की मांग की. उन्होंने इन आंकड़ों के साथ कहा कि ज्यादातर इस तरह की घटनाएं परीक्षा या रिजल्ट के दौरान हुई है. आशंका जताई कि इन घटनाओं के पीछे परीक्षा या पढ़ाई का प्रेशर भी एक वजह हो सकता है. उन्होंने अपने आंकड़ों को वर्गीकृत करते हुए कहा कि इनमें सेमेस्टर ब्रेक के दौरान सुसाइड के मामलों में कमी देखी जा रही है.
70 फीसदी छात्रों ने लगाई फांसी
‘ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप’के नाम से अपने प्लेटफार्म का संचालन करने वाले धीरज सिंह के मुताबिक 171 सुसाइड के मामलों में से 70 फीसदी मामले फांसी लगाने के हैं. वह कहते हैं कि BTech में छात्र और PhD में छात्राएं ज़्यादा जोखिम वाले ग्रुप में पाए गए हैं. बीते 20 वर्षों में इसी वर्ग के छात्रों ने ज्यादा सुसाइड की है. इनकी सुसाइड का प्रतिशत 60 फीसदी है. इसी के साथ उन्होंने दावा किया कि इन 20 वर्षों में सामान्य वर्ग के छात्रों की अपेक्षा एससी व एसटी वर्ग के छात्रों ने ज्यादा सुसाइड किया.