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क्या E20 पेट्रोल इंजन खराब करता है? जानिए वायरल दावों का पूरा सच​

देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. कोई कह रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है, तो कोई दावा कर रहा है कि इससे गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है. वहीं कुछ लोगों का […]

देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. कोई कह रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है, तो कोई दावा कर रहा है कि इससे गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि E20 बनाने में हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है या फिर इससे वाहन की वारंटी खत्म हो जाती है.

अब इन सभी दावों पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तार से जवाब दिया है और साफ किया है कि इनमें से ज्यादातर दावे पूरी तरह गलत या भ्रामक हैं.

1. अफवाह एक लीटर एथेनॉल बनाने में लगता है 10,000 लीटर पानी

सच्चाई सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है. सरकार के अनुसार यह आंकड़ा पूरी तरह भ्रामक है. एथेनॉल प्लांट में एक लीटर एथेनॉल बनाने के लिए केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की जरूरत होती है. आधुनिक डिस्टिलरी जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक का इस्तेमाल करती हैं, जिससे पानी को दोबारा उपयोग में लाया जाता है. इसके अलावा अब एथेनॉल उत्पादन में मक्का का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिसे धान की तुलना में काफी कम पानी की जरूरत पड़ती है.

2. अफवाह E20 एक नया और जोखिम भरा प्रयोग

सच्चाई एक और बड़ा दावा यह किया जाता है कि E20 भारत में किया जा रहा एक नया और जोखिम भरा प्रयोग है. सरकार ने इसे भी पूरी तरह गलत बताया है. एथेनॉल का उपयोग दुनिया में पिछले 100 साल से भी ज्यादा समय से हो रहा है. अमेरिका में E10 सामान्य ईंधन है और वहां E15 और E85 भी इस्तेमाल किए जाते हैं. ब्राजील में पहले से E27 लागू है और इसे लगभग 35 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी है. कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में भी एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग किया जा रहा है.

3. अफवाह कम हो जाता है गाड़ी का माइलेज

सच्चाई E20 को लेकर यह भी कहा जाता है कि इससे गाड़ी का माइलेज काफी कम हो जाता है. सरकार का कहना है कि यह दावा भी भ्रामक है. ARAI, IOCL, IIP देहरादून और SIAM की ओर से किए गए लंबे परीक्षणों में कारों को 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों को 20,000 किलोमीटर तक चलाया गया. इन परीक्षणों में माइलेज पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं मिला. विशेषज्ञों का कहना है कि माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, टायर प्रेशर, सर्विसिंग, इंजन ऑयल और एयर फिल्टर जैसी कई चीजों का भी उस पर असर पड़ता है.

4. अफवाह इंजन के पुर्जों में जंग लग सकती है

सच्चाई सरकार ने बताया कि इस विषय पर ARAI ने वर्षों पहले अध्ययन किया था. जांच में इंजन, धातु और प्लास्टिक के पुर्जों पर कोई गंभीर समस्या नहीं मिली. केवल कुछ पुराने वाहनों में रबर की सील या गैस्केट को सामान्य से थोड़ा पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा E20 के इस्तेमाल से कार्बन मोनोऑक्साइड और बिना जले हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन भी कम पाया गया.

5. अफवाह वारंटी और इंश्योरेंस प्रभावित

सच्चाई सोशल मीडिया पर यह अफवाह भी फैली कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर वाहन की वारंटी और इंश्योरेंस खत्म हो जाएगा. सरकार ने इसे पूरी तरह गलत बताया है. वाहन निर्माता कंपनियों और बीमा कंपनियों ने साफ कहा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से वाहन की वारंटी या बीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा. SIAM और PIB Fact Check ने भी इस दावे का खंडन किया है.

6. अफवाह पेट्रोल टैंक पर चींटियां लग जाती हैं

सच्चाई E20 पेट्रोल में चीनी होने की वजह से पेट्रोल टैंक पर चींटियां और मधुमक्खियां आती हैं. BPCL ने इन दावों को भी वैज्ञानिक आधार से रहित बताया है. कंपनी के अनुसार ईंधन में इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल पूरी तरह प्रोसेस किया जाता है और उसमें किसी प्रकार की चीनी नहीं होती. साथ ही इसमें ऐसे पदार्थ मिलाए जाते हैं जो कीड़ों को दूर रखते हैं.

7. अफवाह पेट्रोल में गन्ने का रस

सच्चाई कुछ वीडियो में यह भी दिखाया गया कि गन्ने का रस सीधे पेट्रोल में मिलाया जा रहा है. सरकार ने ऐसे वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताया है. सरकार के अनुसार ईंधन में इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल आधुनिक औद्योगिक प्रक्रिया से तैयार किया जाता है और गुणवत्ता की सभी जांच के बाद ही पेट्रोल में मिलाया जाता है.

8. अफवाह फ्यूल टैंक में पानी

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल से वाहन के फ्यूल टैंक में पानी नहीं जाता. आधुनिक वाहनों और पेट्रोल पंपों में ऐसी तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था मौजूद होती है, जिससे पानी टैंक में प्रवेश नहीं कर सकता.

9. अफवाह क्या E20 एक “प्रयोग” है?

सच्चाई इसके अलावा सरकार ने यह दावा भी खारिज किया कि सुप्रीम कोर्ट में E20 को “प्रयोग” बताया गया था. अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि अदालत में ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया था और मीडिया से न्यायिक कार्यवाही की सही रिपोर्टिंग करने की अपील की गई.

10. अफवाह एथेनॉल प्लांट किसानों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं

सच्चाई सरकार का कहना है कि आधुनिक एथेनॉल प्लांट पर्यावरणीय नियमों का पालन करते हैं और Zero Liquid Discharge जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं. किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया है. 930 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन में कमी और 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल की बचत हुई है.

2001 में हुई थी शुरुआत

भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की शुरुआत 2001 में हुई थी. पहले 5% एथेनॉल मिश्रण का परीक्षण किया गया और बाद में इसे कई राज्यों तक बढ़ाया गया. 2009 की राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति में 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा गया था. इसके बाद सरकार ने नई नीतियों, निवेश और उत्पादन बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए. इसका नतीजा यह हुआ कि देश की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 201314 के 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 2,000 करोड़ लीटर प्रति वर्ष हो गई. दिसंबर 2025 में भारत ने तय समय से पहले 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया. सरकार के अनुसार इस कार्यक्रम से अब तक 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बची है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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