शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 ब्रेकिंग
राम मंदिर में चंदा चोरी पर अगले हफ्ते अपनी अंतरिम रिपोर्ट SC को सौंपेगी SIT, फाइनल के लिए राज्य सरकार से मांगा समय​ | सिर्फ हड्डियों के लिए नहीं… और भी काम आता है विटामिन डी? एक्सपर्ट से जानें सबकुछ​ | Moradabad Aligarh Greenfield Highway: 148.5 KM का नया ग्रीनफील्ड हाईवे…क्यों रुकी 21 गांवों में जमीन की रजिस्ट्री, किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

China Ethnic Unity Law: क्या अल्पसंख्यक विरोधी है चीन का नया कानून, दुनिया में क्यों हो रहा विरोध?​

चीन ने इसी एक जुलाई को एथेनिक यूनिटी लॉ यानी जातीय एकता कानून लागू किया है. इसका दुनियाभर में विरोध हो रहा है. मानवधिकार कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता इसे चीन में रह रहे अल्पसंख्यकों के खिलाफ मान रहे हैं. उनका कहना है कि चीनी सरकार की ओर से लागू नया कानून चीन में रहने वाले विभिन्न […]

चीन ने इसी एक जुलाई को एथेनिक यूनिटी लॉ यानी जातीय एकता कानून लागू किया है. इसका दुनियाभर में विरोध हो रहा है. मानवधिकार कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता इसे चीन में रह रहे अल्पसंख्यकों के खिलाफ मान रहे हैं. उनका कहना है कि चीनी सरकार की ओर से लागू नया कानून चीन में रहने वाले विभिन्न अल्पसंख्य समुदाय के लोगों को पूरी तरह चीन में घुलमिल जाने को मजबूर करने को विवश करने वाला है.

वे अपनी भाषा, रहनसहन, पहनावा तक नहीं लेकर चल पाएंगे.आइए, इस मसले को विस्तार से समझते हैं? आखिर क्या है इस कानून में? इसकी जरूरत क्यों पड़ी? चीन का इस मुद्दे पर क्या तर्क है?

चीन को इस कानून की जरूरत क्यों पड़ी?

चीन का आधिकारिक तर्क है कि यह कानून राष्ट्रीय एकता, सामाजिक स्थिरता और अलगाववाद, उग्रवाद रोकने के लिए जरूरी है. चीन का कहना है कि इस कानून से भाषासमानता और राष्ट्रीय पहचान से आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को एड्रेस करने में मदद मिलेगी. चीन इस कानून की जरूरत काफी दिनों से महसूस कर रहा था. देश को एक तार में पिरोने के लिए यह कानून लाया गया है. आलोचकों के अनुसार नया कानून भाषा, धर्म आदि पर नियंत्रण करने की कोशिश है. इसे व्यापक सिनाइज़ेशन नीति का कानूनी रूप कहा जा रहा है.

चीन का तर्क है कि यह कानून अलगाववाद और उग्रवाद रोकने के लिए जरूरी है. फोटो: GettyImages

सिनाइज़ेशन क्या है?

इसका सीधा मतलब है किसी भी व्यक्ति, समुदाय को चीनी सांचे में ढालना. जब कोई सरकार या समाज यह चाहता है कि देश के अलगअलग समुदायों जैसे मुस्लिम, बौद्ध या अन्य अल्पसंख्यक लोग अपनी पुरानी पहचान, भाषा और खास संस्कृति को छोड़कर देश की मुख्यधारा यानी चीनी संस्कृति, भाषा और रीतिरिवाजों को पूरी तरह अपना लें, तो उसे सिनाइज़ेशन कहते हैं. इसे नीचे दिए गए कुछ उदाहरण से भी समझा जा सकता है.

  • भाषा का बदलना: अगर किसी अल्पसंख्यक समुदाय की अपनी अलग भाषा है, लेकिन उसे मजबूर किया जाए कि वह केवल मैंडरिन बोले और उसी में शिक्षा ले.
  • पहचान और कपड़े: लोगों से यह उम्मीद करना कि वे अपने पारंपरिक पहनावे को छोड़कर वैसे ही कपड़े पहनें और वैसा ही व्यवहार करें जैसा चीन के बहुसंख्यक हान समुदाय के लोग करते हैं.
  • धार्मिक बदलाव: धर्म को मानने के तरीकों को सरकार की विचारधारा के अनुसार बदल देना. जैसे मस्जिदों या मठों की बनावट को बदलकर उन्हें चीनी वास्तुकला जैसा बनाना या धर्मग्रंथों की व्याख्या सरकारी सिद्धांतों के हिसाब से करना.
  • खानपान और रीतिरिवाज: स्थानीय त्योहारों की जगह राष्ट्रीय त्योहारों को प्राथमिकता देना.
  • आलोचकों का डर: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसके जरिए चीन अल्पसंख्यक समुदायों की पुश्तैनी पहचान को खत्म कर रहा है ताकि देश में सिर्फ एक ही तरह की विचारधारा और संस्कृति रहे.

चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग.

यह कानून कब लाया गया?

यह विधेयक नेशनल पीपल्स कांग्रेस के माध्यम से आगे बढ़ा. पूरा प्रॉसेस साल 202526 के दौरान हुआ. अंतिम रूप से यह कानून 12 मार्च 2026 को पास किया गया और राष्ट्रपति ने उसी दिन दस्तखत भी कर दिया. यह कानून एक जुलाई से चीन में लागू हुआ है. लागू होना यह नहीं बताता कि हर जगह पालन का तरीका एक जैसा होगा. इसे स्थानीय प्रशासन और विभाग अपनेअपने स्तर पर लागू करेंगे. आलोचक यह भी कहते हैं कि कानून की धारा और व्याख्या व्यापक व अस्पष्ट हैं, इसलिए व्यवहारिक प्रभाव और रोकटोक का दायरा समय के साथ स्पष्ट होगा.

नये कानून का स्वरूप क्या है?

यह कानून चीन की राष्ट्रीय एकता पर जोर देता है. अलगाववाद, उग्रवाद और धार्मिक उन्माद रोकने में मददगार है. कई प्रावधान सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं. इस नए कानून के लागू होने के साथ ही सरकारी तंत्र को बेशुमार अधिकार मिल सकते हैं. शिक्षा और पाठ्यक्रमों में परिवर्तन का अधिकार भी अफसरों के पास आना तय है. धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों पर शर्तें लग सकती हैं. निगरानी और पहचान सत्यापन के उपाय कानून में समाहित हो सकते हैं.

दावा किया गया है कि नया कानून स्थानीय बाजार और रोजगार को प्रभावित कर सकता है. फोटो: Unsplash

कई चरणों में लागू होगा नया कानून

नए कानून का पूरा ड्राफ्ट पब्लिक डोमेन में नहीं है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में जो चीजें सामने आ रही हैं उसके मुताबिक यह कानून केन्द्र और स्थानीय दोनों स्तरों पर लागू करने की व्यवस्था है. स्थानीय प्रशासन के लोग भी इसमें अपना योगदान दे सकते हैं. अधिकारियों को प्रशिक्षण और कौशल केंद्र जैसे कार्यक्रम चलाने का अधिकार दिया गया है. यह भी कहा जा रहा है कि नए कानून का अर्थ और सीमा प्रशासनिक व्याख्या पर निर्भर करेगी. मतलब, सरकारी तंत्र के हिसाब से बहुत कुछ चलने वाला है.

अंतरराष्ट्रीय कानून और वैधानिक बहस

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियां अभिव्यक्ति, धर्म और संस्कृति की रक्षा करती हैं. विशेषज्ञ पूछते हैं कि चीन का यह क़दम इन संधियों के अनुरूप नहीं है. आर्थिक प्रतिबंध और संवैधानिक टिप्पणियों के चलते राजनीतिक और कानूनी बहस चल सकती है. पारदर्शिता और स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा की मांग उठती है. यह और बात है कि चीन इन सारे आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है.

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है प्रभाव

इस कानून को कठोर माना जा रहा है. ऐसे में यह स्थानीय बाजार और रोजगार को प्रभावित कर सकती है. स्कूलों और भाषा नीति से कौशल विकास के लिए दीर्घकालिक असर होता है. परिवर्तन से स्थानीय सेवा और सांस्कृतिक उद्योग प्रभावित होते हैं. कुछ क्षेत्रों से कपास, खनिज और अन्य माल की आपूर्ति वैश्विक बाजार से जुड़ी है. कई बहुराष्ट्रीय फर्म जोखिम आकलन और सप्लायर ऑडिट करने लगती हैं.

कठोर कदमों के कारण कुछ देश अपने आयात नियम बदल सकते हैं. राजनीतिक तनाव से निवेशकों की निष्ठा कम हो सकती है. क़ानूनी अनिश्चितता कंपनियों के संचालन लागत बढ़ा सकती है. व्यापार नीतियां और कस्टम प्रक्रियाओं में बदलाव लागत बढ़ा दें.

चीनी जातीय एकता कानून पर कुछ यूं आई वैश्विक प्रतिक्रिया

अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के कई देशों ने इस कानून की कड़ी निंदा की है. इन देशों का कहना है कि यह कानून अल्पसंख्यकों की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है. जी7 देशों ने अपने साझा बयानों में चीन से आग्रह किया है कि वह स्वायत्त क्षेत्रों झिंजियांग और तिब्बत में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का पालन करे.

वीज़ा रोक और प्रतिबंध भी लगे

चीन के इस कानून और इसके कार्यान्वयन से जुड़े अधिकारियों पर कई देशों ने कार्रवाई की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ग्लोबल मैग्निट्स्की एक्ट के तहत उन चीनी अधिकारियों की संपत्ति फ्रीज कर दी है और उन पर प्रतिबंध लगा दिए हैं जो इस कानून को लागू करने में शामिल हैं. कई देशों ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के उन नेताओं और अधिकारियों को वीज़ा देने से मना कर दिया है जो मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के घेरे में हैं. जवाब में चीन ने भी कुछ विदेशी राजनेताओं पर जवाबी वीज़ा प्रतिबंध लगाए हैं.

संयुक्त राष्ट्र और विशेषज्ञों की जांच की मांग

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने रिपोर्ट जारी कर चीन के इन कदमों को मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में रखा है. विशेषज्ञों के एक समूह ने मांग की है कि संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांचकर्ताओं को बिना किसी रोकटोक के झिंजियांग और तिब्बत का दौरा करने दिया जाए ताकि सिनाइज़ेशन की जमीनी हकीकत का पता चल सके.

सरल शब्दों में कहा जाए तो चीन का यह नया कानून कानूनी, आर्थिक और मानवाधिकार पहलुओं से जुड़ा हुआ है. हर पहलू का प्रभाव स्थानीय और वैश्विक स्तर पर दिखता है. विवाद का समाधान संवाद, पारदर्शिता और सम्मान से हो सकता है. यह पहल चीन को करना है. यह भी देखा जाना बाकी है कि इसके दूरगामी असर किस तरह हो सकते हैं. क्योंकि अभी तो कागज में लागू हुआ है. इसका सकारात्मक या नकारात्मक असर आने में कुछ वक्त लग सकता है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY