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Sambhal Land Scam: संभल में 1000 बीघा सरकारी जमीन का महाघोटाला… रिटायर्ड SDM और पूर्व DGC समेत 6 गिरफ्तार, 19 पर FIR​

Gunnaur 1000 Bigha Land Mafia: उत्तर प्रदेश के संभल जिले की गुन्नौर तहसील में गंगा किनारे स्थित झाऊ श्रेणी की करीब 1000 बीघा सरकारी जमीन के फर्जी पट्टा आवंटन मामले में पुलिस और प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के […]

Gunnaur 1000 Bigha Land Mafia: उत्तर प्रदेश के संभल जिले की गुन्नौर तहसील में गंगा किनारे स्थित झाऊ श्रेणी की करीब 1000 बीघा सरकारी जमीन के फर्जी पट्टा आवंटन मामले में पुलिस और प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के कड़े रुख के बाद इस महाघोटाले में शामिल भूमाफियाओं और अधिकारियों के गठजोड़ को नेस्तनाबूद कर दिया गया है.

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन उप जिलाधिकारी और पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता समेत 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. वहीं वर्तमान एसडीएम करम सिंह सहित कुल 19 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है.

कैसे और कब शुरू हुआ 1000 बीघा जमीन का यह खेल?

प्राथमिकी के मुताबिक, यह पूरा मामला गुन्नौर तहसील के असदपुर, सुखैला और उसके आसपास के गांवों में गंगा किनारे स्थित झाऊ श्रेणी की चकबंदी प्रक्रिया वाली बेशकीमती सरकारी भूमि के अवैध आवंटन से जुड़ा है. साल 2007 के बाद से ही सरकारी अभिलेखों में फर्जी तरीके से प्रविष्टियां करने का खेल शुरू किया गया था. इस मामले में साल 2018 में भी तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों और 58 अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का केस दर्ज हुआ था. तब प्रशासन ने इन फर्जी प्रविष्टियों को निरस्त कर दिया था.

आरोप है कि साल 2018 में पट्टे निरस्त होने के बावजूद, साल 2019 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने नियमों को ताक पर रखकर 162 अपात्र लाभार्थियों के पक्ष में दोबारा पट्टे स्वीकृत कर दिए वर्ष 202122 में इस आवंटन में संशोधन की कार्रवाई तो हुई, लेकिन राजस्व संहिता के तहत अनिवार्य रूप से होने वाली खुली ग्राम सभा, पात्रों की सहमति या लॉटरी की कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

कागजों पर पट्टे, कब्जा गायब

साल 2023 में 17 अपात्र लाभार्थियों के पट्टे निरस्त होने के बावजूद सरकारी अभिलेखों में 145 लाभार्थियों के नाम दर्ज रहे. हैरान करने वाली बात यह है कि किसी को भी जमीन पर वास्तविक कब्जा नहीं दिलाया गया था, यानी पूरी प्रक्रिया सिर्फ कूटरचित दस्तावेजों के सहारे चल रही थी.

डीएम की जांच रिपोर्ट के बाद 2 जुलाई को दर्ज हुई FIR

इस महाघोटाले की परतें तब खुलीं जब प्रशासन द्वारा गठित एक विशेष जांच समिति ने गहन तफ्तीश के बाद 4 जून 2026 को अपनी अंतिम रिपोर्ट जिलाधिकारी संभल अंकित खंडेलवाल को सौंपी. जांच समिति ने रिपोर्ट में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल वैधानिक और विभागीय कार्रवाई की कड़ी सिफारिश की थी.

इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर, लेखपाल स्वाति शर्मा की शिकायत पर 2 जुलाई को थाना गुन्नौर में भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, दस्तावेजों में हेराफेरी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई.

गिरफ्तार हुए ये 6 मुख्य आरोपी

पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के निर्देश पर पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को 6 मुख्य आरोपियों को दबोच लिया. मेडिकल परीक्षण के बाद सभी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

  • ओमवीर सिंह तत्कालीन उप जिलाधिकारी , निवासी अलीगढ़.
  • जय भारद्वाज पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता .
  • विक्रान्त पूर्व ग्राम प्रधान, असदपुर.
  • राजवीर सिंह सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक .
  • महेंद्र सिंह रिटायर्ड सहायक चकबंदी अधिकारी.
  • भीमराव सिंह तत्कालीन चकबंदी लेखपाल.

वर्तमान SDM सहित इन 19 लोगों पर दर्ज है मुकदमा

इस हाईप्रोफाइल मामले में कुल 19 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें वर्तमान में उप जिलाधिकारी के पद पर तैनात अधिकारी भी शामिल हैं.

अधिकारी और राजस्व कर्मी: सेवानिवृत्त एसडीएम ओमवीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार व वर्तमान एसडीएम करम सिंह, लेखपाल सर्वेश कुमारी, लेखपाल ओमकार सिंह, लेखपाल अमित कुमार, सेवानिवृत्त कानूनगो राजवीर सिंह, रक्षपाल सिंह, रिटायर्ड चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह, तत्कालीन चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, तत्कालीन चकबंदी कर्ता मनवीर सिंह, सतीश गुप्ता और ओमवीर सिंह.

ग्राम प्रधान और पंचायत सदस्य: पूर्व ग्राम प्रधान विक्रांत , ग्राम पंचायत सदस्य प्रवीण कुमार, संतोष कुमार, जलधारा, मोहरश्री, किशनलाल और देवेंद्र कुमार.

एसपी संभल ने बताया कि मामले की विवेचना और कानूनी जांच अभी भी जारी है. इस घोटाले में शामिल अन्य नामजद आरोपियों और अपात्र लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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