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55 नाबालिग लड़कियां अचानक हो गईं गर्भवती, जांच करने वाले डाक्टर के उडे होश

55 Minor Girl Pregnant: आज के आधुनिक दौर में जहां हम लगातार महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, वहीं महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (पूर्व में अहमदनगर) जिले से एक ऐसी खबर आई है जो पूरे सिस्टम पर एक करारा तमाचा है. जिले के अकोले तालुका में बाल अधिकारों की सरेआम धज्जियां उड़ती दिखी हैं. यहां के महिला एवं बाल विकास विभाग के सर्वे ने एक ऐसा खौफनाक सच उगला है, जिससे स्थानीय प्रशासन की रातों की नींद उड़ गई है.

55 नाबालिग लड़कियां अचानक हो गईं गर्भवती, जांच करने वाले डाक्टर के उडे होश
55 नाबालिग लड़कियां अचानक हो गईं गर्भवती, जांच करने वाले डाक्टर के उडे होश

ताजा जानकारी के अनुसार, अकोले तालुका में कुल 55 नाबालिग विवाहित लड़कियां और एक अविवाहित नाबालिग लड़की गर्भवती पाई गई है. यह कोई अफवाह नहीं बल्कि सरकारी सर्वेक्षण का डराने वाला जमीनी आंकड़ा है. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कुछ नाबालिग लड़कियों की तो डिलीवरी भी हो चुकी है. इस बड़े खुलासे के बाद पूरे जिले और राज्य स्तर पर भारी खलबली मच गई है.

कैसे हुआ इस खौफनाक सच का खुलासा?
अकोले और राजूर प्रोजेक्ट के तहत काम करने वाली आंगनवाड़ी सेविकाओं द्वारा हर महीने गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं का नियमित सर्वे किया जाता है. इसी घर-घर जाकर किए गए सर्वे के दौरान यह भयानक हकीकत सामने आई. अधिकारियों के होश तब और फाख्ता हो गए जब केंद्र सरकार की ‘मातृत्व वंदना योजना’ का आर्थिक लाभ लेने के लिए आए आवेदनों में भी इन गर्भवती नाबालिग लड़कियों के नाम दर्ज पाए गए. इसी से प्रशासन की आंखें खुलीं.

डर और दबाव, और बाल विवाह
स्थानीय सामाजिक स्थिति के जानकारों के अनुसार, भारी सामाजिक दबाव, बदनामी के डर और पुलिस कार्रवाई के खौफ से कई बाल विवाहों की कहीं कोई रिपोर्ट दर्ज ही नहीं होती है. कई माता-पिता महज इस निराधार डर से अपनी बेटियों की कम उम्र में शादी कर रहे हैं कि कहीं वे आगे चलकर भाग कर शादी न कर लें. जो 55 गर्भवती युवतियों का आंकड़ा सामने आया है, वह तो सिर्फ कागजों पर है; असल में गर्भवतियों की संख्या इससे कहीं अधिक होने की संभावना है.

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बाल अधिकार आयोग से जांच की मांग
अकोले बाल संरक्षण समिति के गैर-सरकारी सदस्य श्रीनिवास रेणुकादास ने महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार आयोग से इस मामले की तत्काल उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने प्रशासन से कड़ी मांग की है कि ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समितियों को तुरंत सक्रिय किया जाए, शादियों में दूल्हा-दुल्हन का जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य किया जाए और नाबालिग लड़कियों से शादी करने वालों पर सीधे आपराधिक मामले (FIR) दर्ज किए जाएं.

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