शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई. मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने, फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम होने और अन्य अहम वजहों से सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों में 0.8 फीसदी से ज्यादा इजाफा देखने को मिला. शुक्रवार के ट्रेडिंग सेशन के दौरान सेंसेक्स 650 अंक चढ़ा, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 24,350 के स्तर के ऊपर पहुंच गया. इस तेजी की वजह से सेंसेंक्स करीब दो महीने के हाई पर कारोबार कर रहा है. वहीं 7 मई के बाद से सेंसेक्स पहली बार 78 हजार अंकों के लेवल को पार कर गया है. इस ज़बरदस्त तेज़ी से BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में लगभग 2.65 लाख करोड़ का इजाफा हुआ, जिससे यह बढ़कर 482 लाख करोड़ रुपए को पार कर गया.

IT शेयरों में भी मजबूत बढ़त जारी रही. HCL टेक, टेक महिंद्रा, इंफोसिस और TCS के शेयरों में 25 फीसदी की तेजी आई और इन्होंने सेंसेक्स में बढ़त की अगुवाई की. इनके बाद टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में भी 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखी गई. हालांकि, बाज़ार के इस रुख के उलट, शुक्रवार सुबह M&M के शेयरों में लगभग 1 फीसदी की गिरावट आई.

वहीं, ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले कमज़ोर रहा. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में सिर्फ 0.2% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.5% की बढ़त हुई. इस दौरान इंडिया VIX 1 फीसदी से ज़्यादा गिरकर 12.13 पर आ गया. सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी IT इंडेक्स में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई और इसने बढ़त की अगुवाई की. निफ्टी मेटल इंडेक्स में भी 1.5 फीसदी से ज्यादा की बढ़त हुई. हालांकि, निफ्टी ऑटो और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई. कुल मिलाकर बाज़ार का रुख सकारात्मक रहा. NSE पर 1,832 शेयरों में बढ़त और 607 शेयरों में गिरावट देखी गई, जबकि 91 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ. आइए आपको भी बताते हैं वो 7 कारण जिनकी वजह से शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली है…

1) फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की चिंताएं कम हुईं

गुरुवार को जारी आंकड़ों से पता चला कि जून में अमेरिका में नौकरियों में बढ़ोतरी की रफ़्तार काफ़ी धीमी हो गई और पिछले दो महीनों के पेरोल आंकड़ों को भी घटाकर दिखाया गया. इससे लेबर मार्केट में सुस्ती का संकेत मिला और फाइनेंशियल मार्केट ने निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें कम कर दीं. पिछले महीने बेरोज़गारी दर मई के 4.3% से घटकर 4.2% हो गई, क्योंकि कई कामगार लेबर फ़ोर्स से बाहर हो गए, जिससे पार्टिसिपेशन रेट पांच साल से ज़्यादा के निचले स्तर पर पहुंच गई. CME ग्रुप के फेडवॉच टूल के अनुसार, ट्रेडर्स अब इस बात की 46.8% संभावना मान रहे हैं कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक 1516 सितंबर की बैठक में दरों को स्थिर रखेगा, जबकि एक दिन पहले यह संभावना 35.8% थी.

2) रुपया बढ़त के साथ खुला

शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 18 पैसे बढ़कर 95.17 पर पहुंच गया. नौकरियों की कमजोर रिपोर्ट के बाद अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से ऐसा हुआ. डॉलर इंडेक्स, जो कई मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की चाल को मापता है, गुरुवार को 0.5% की गिरावट के बाद 0.2% गिरकर 100.77 पर आ गया. यह अप्रैल की शुरुआत के बाद से अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है.

3) FII की निकासी कम हुई

NSE के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने गुरुवार को लगभग 312 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे वे भारतीय शेयरों के नेट सेलर बने रहे. यह इस साल की शुरुआत में मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के दौरान देखी गई भारी FII निकासी की तुलना में बहुत कम है.

4) IT शेयरों में जबरदस्त खरीदारी

HCL Tech, TCS और Infosys जैसे बड़े IT शेयरों में जबरदस्त खरीदारी से बाज़ार का मूड बेहतर हुआ है. इस हफ़्ते की शुरुआत में 52हफ़्ते के नए निचले स्तर पर गिरने के बाद, आज IT शेयरों में तेज़ी देखी जा रही है. IT कंपनियां अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा नॉर्थ अमेरिकन मार्केट से हासिल करती हैं. US में ब्याज दरों में बढ़ोतरी या महंगाई बढ़ने से लोगों के गैरज़रूरी खर्च पर असर पड़ सकता है, जिससे इस सेक्टर की ग्रोथ की संभावनाओं पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए, फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की कम उम्मीदों और कम वैल्यूएशन के कारण IT शेयरों में तेज़ी आ रही है.

5) ग्लोबल बाज़ार से अच्छे संकेत

आज दलाल स्ट्रीट भी ग्लोबल बाज़ारों की तरह तेज़ी दिखा रहा है. शुक्रवार सुबह साउथ कोरिया का Kospi 2.5% चढ़ा, जबकि जापान का Nikkei लगभग 1% ऊपर रहा. हांगकांग का Hang Seng और चीन का Shanghai Composite भी लगभग 11% बढ़े. वॉल स्ट्रीट पर, Dow Jones Industrial Average गुरुवार को 1% से ज़्यादा बढ़कर रिकॉर्ड क्लोजिंग हाई पर पहुंचा और लगातार चौथे हफ़्ते बढ़त दर्ज की. कल यूरोप के बाज़ार भी अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए.

6) ईरानUS शांति कोशिशें

“कोई खबर न होना ही अच्छी खबर है” यही आज के बाज़ार के हालात का सार है. मिडिल ईस्ट में शांति की कोशिशें अब तक सफल रही हैं और तनाव बढ़ने की कोई खबर नहीं है. यह सब ईरान और US के बीच इस हफ़्ते की शुरुआत में दोहा में हुई शांति वार्ता के बाद हुआ है.

ईरान अब दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा है, जिनकी मार्च की शुरुआत में मौत के बाद भयंकर युद्ध छिड़ गया था. इस बीच, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने चल रही डिप्लोमैटिक बातचीत में लगभग सभी अमेरिकी शर्तें मान ली हैं, साथ ही उन्होंने ज़ोर दिया कि बातचीत का मुख्य मकसद तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है.

7) तेल की कीमतें

तेल की कीमतें थोड़ी बढ़कर $72 प्रति बैरल हो गईं, लेकिन शांति की कोशिशें सफल रहने के कारण ये युद्ध से पहले के स्तर के आसपास ही बनी हुई हैं. रॉयटर्स ने गुरुवार को सूत्रों के हवाले से बताया कि कुवैत का तेल उत्पादन मई में 580,000 बैरल प्रति दिन से बढ़कर जून में 1.65 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया, क्योंकि OPEC के इस सदस्य देश ने USईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के बाद एक्सपोर्ट बढ़ा दिया था. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के लगभग 10 मिलियन बैरल तेल से लदे कम से कम पांच सुपरटैंकर होर्मुज स्ट्रेट से निकल चुके हैं. साथ ही, सऊदी अरामको एशिया में बिक्री बढ़ाने के लिए स्पॉट प्राइसिंग का तरीका अपना रही है.