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Automobile

इलेक्ट्रिक नहीं, अब हाइब्रिड कार पर फिदा हो रहे ग्राहक! जानिए क्या है वजह​

अगर आप रोजाना अपनी कार से सफर करते हैं और पेट्रोलडीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, तो इलेक्ट्रिक कार खरीदने का विचार आपके दिमाग में जरूर आया होगा. लेकिन भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में अब एक नया रुझान तेजी से उभर रहा है, जहां लोग पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों की जगह हाइब्रिड कारों की ओर […]

अगर आप रोजाना अपनी कार से सफर करते हैं और पेट्रोलडीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, तो इलेक्ट्रिक कार खरीदने का विचार आपके दिमाग में जरूर आया होगा. लेकिन भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में अब एक नया रुझान तेजी से उभर रहा है, जहां लोग पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों की जगह हाइब्रिड कारों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं.

इलेक्ट्रिक कारों की सबसे बड़ी चुनौती चार्जिंग

भारत में ईवी को लेकर सबसे बड़ी समस्या चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है. कई शहरों और खासकर हाईवे पर पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन नहीं हैं, जिससे लंबी यात्रा के दौरान बैटरी खत्म होने का डर बना रहता है. यही चिंता कई लोगों को इलेक्ट्रिक कार खरीदने से रोक देती है.

इसके मुकाबले कारें इस समस्या का आसान समाधान देती हैं. इनमें पेट्रोल इंजन के साथ एक इलेक्ट्रिक मोटर और छोटी बैटरी होती है. खास बात यह है कि इन्हें अलग से चार्ज करने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि ये चलने के दौरान खुद ही बैटरी को चार्ज कर लेती हैं। इससे ड्राइवर को चार्जिंग स्टेशन की चिंता नहीं करनी पड़ती.

माइलेज में भी बेहतर विकल्प

का सबसे बड़ा फायदा इनका शानदार माइलेज है. शहर में धीमी गति पर ये कारें ज्यादातर इलेक्ट्रिक मोड पर चलती हैं, जिससे ईंधन की खपत कम होती है. जैसे ही स्पीड बढ़ती है, पेट्रोल इंजन सक्रिय हो जाता है और दोनों सिस्टम मिलकर काम करते हैं.

इस तकनीक की वजह से हाइब्रिड कारें आमतौर पर 25 से 28 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज दे सकती हैं. इसका सीधा फायदा यह होता है कि ईंधन का खर्च कम हो जाता है और बारबार चार्जिंग या फ्यूलिंग की परेशानी भी नहीं रहती.

रीसेल वैल्यू और भरोसा

इलेक्ट्रिक कारों को लेकर एक और बड़ी चिंता उनकी बैटरी लाइफ और रिप्लेसमेंट कॉस्ट है. समय के साथ बैटरी की क्षमता घटने पर उसे बदलना काफी महंगा साबित हो सकता है. इसी कारण कई लोग सेकंड हैंड ईवी खरीदने से भी हिचकिचाते हैं, जिससे उनकी रीसेल वैल्यू कम हो जाती है.

वहीं हाइब्रिड कारों में बैटरी छोटी होती है और इसका मेंटेनेंस भी अपेक्षाकृत आसान होता है. यही वजह है कि इनकी रीसेल वैल्यू पारंपरिक पेट्रोल कारों के बराबर बनी रहती है.

क्यों बढ़ रहा है हाइब्रिड का चलन

कम चार्जिंग झंझट, बेहतर माइलेज और मजबूत रीसेल वैल्यू के कारण हाइब्रिड कारें आज के समय में कई खरीदारों की पहली पसंद बनती जा रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भी यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है, खासकर तब तक जब तक देश में ईवी चार्जिंग नेटवर्क पूरी तरह विकसित नहीं हो जाता.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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