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48 घंटे में खत्म होगी ईरान-अमेरिका जंग! जानें क्या हुआ दोनों में समझौता

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान इस सदी की सबसे बड़ी डील के काफी करीब पहुंच गये हैं। दो अमेरिकी अधिकारियों और इस मामले से अवगत दो अन्य सूत्रों के हवाले से एक्सियोस ने इसकी जानकारी दी है। एक्सियोस ने बताया है कि वाइट हाउस का मानना है कि वह ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने और अधिक विस्तृत परमाणु वार्ताओं के लिए एक रूपरेखा तय करने के लिए एक-पृष्ठ वाले समझौता ज्ञापन (MOU) पर सहमति के करीब पहुंच रहा है।

Khabar Monkey

48 घंटे में खत्म होगी ईरान-अमेरिका जंग! जानें क्या हुआ दोनों में समझौता
48 घंटे में खत्म होगी ईरान-अमेरिका जंग! जानें क्या हुआ दोनों में समझौता

वाइट हाउस के अधिकारियों ने एक्सियोस को बताया है कि अमेरिका को अगले 48 घंटों में कई अहम मुद्दों पर ईरान से जवाब मिलने की उम्मीद है। अभी तक किसी भी बात पर सहमति नहीं बनी है लेकिन सूत्रों के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद से यह पहला मौका है जब दोनों पक्ष किसी समझौते के इतने करीब पहुंचे हैं।

अमेरिका और ईरान युद्ध खत्म करने के काफी करीब पहुंचे
एक्सियोस के मुताबिक अन्य प्रावधानों के अलावा इस समझौते में ईरान परमाणु संवर्धन पर रोक लगाने की प्रतिबद्धता जताएगा।
अमेरिका अपने प्रतिबंध हटाने और ईरान के जमे हुए अरबों डॉलर के फंड को जारी करने पर सहमत होगा
दोनों पक्ष होर्मुज़ जलडमरूमध्य से आवागमन पर लगे प्रतिबंधों को हटा लेंगे

इस ज्ञापन में बताई गई कई शर्तें अंतिम समझौते पर पहुंचने पर ही लागू होंगी ऐसे में इस बात की संभावना बनी रहती है कि या तो फिर से युद्ध छिड़ जाए या फिर एक ऐसी अनिश्चित स्थिति बनी रहे जिसमें प्रत्यक्ष युद्ध तो रुक गया हो लेकिन असल में किसी भी मुद्दे का कोई समाधान न निकला हो। वाइट हाउस का मानना है कि ईरानी नेतृत्व में फूट पड़ी हुई है और अलग-अलग गुटों के बीच आम सहमति बनाना मुश्किल हो सकता है। कुछ अमेरिकी अधिकारियों को इस बात पर अब भी शक है कि कोई शुरुआती समझौता भी हो पाएगा।

अमेरिकी अधिकारियों ने बातचीत के पिछले दौरों और मौजूदा युद्ध के दौरान कई मौकों पर किसी समझौते को लेकर उम्मीद जताई है लेकिन अभी तक कोई समझौता हो नहीं पाया है। लेकिन दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप का होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने नए घोषित ऑपरेशन से पीछे हटने और नाज़ुक युद्धविराम को टूटने से बचाने का फैसला इसी बातचीत में हुई प्रगति पर आधारित था।

एक पन्ने का 14-पॉइंट वाला समझौता ज्ञापन (MOU) ट्रंप के दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ कई ईरानी अधिकारियों के बीच सीधे तौर पर और मध्यस्थों के जरिए बातचीत के दौर से गुजर रहा है।
अपने मौजूदा रूप में यह MOU इस क्षेत्र में युद्ध को खत्म करने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने, अमेरिका के प्रतिबंधों को हटाने के लिए एक विस्तृत समझौते पर 30-दिन की बातचीत की अवधि की शुरुआत की घोषणा करेगा।
दो सूत्रों ने बताया कि ये बातचीत इस्लामाबाद या जिनेवा में हो सकती है।
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार उस 30-दिन की अवधि के दौरान जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही पर ईरान के प्रतिबंध और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी धीरे-धीरे हटा दी जाएगी।
अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यदि बातचीत विफल हो जाती है तो अमेरिकी सेना नाकेबंदी को फिर से लागू करने या सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने में सक्षम होगी।
अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यदि बातचीत विफल हो जाती है तो अमेरिकी सेना नाकेबंदी को फिर से लागू करने या सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने में सक्षम होगी। यूरेनियम एनरिचमेंट पर रोक की अवधि को लेकर बातचीत भी जोर-शोर से चल रही है। तीन सूत्रों का कहना है कि यह रोक कम से कम 12 साल की होगी जबकि एक सूत्र के मुताबिक यह 15 साल तक हो सकती है। ईरान ने एनरिचमेंट पर 5 साल की रोक का प्रस्ताव रखा था जबकि अमेरिका ने 20 साल की रोक की मांग की थी। इसके अलावा सूत्र ने बताया कि अमेरिका एक ऐसा प्रावधान शामिल करना चाहता है जिसके तहत अगर ईरान एनरिचमेंट से जुड़े किसी भी नियम का उल्लंघन करता है तो रोक की अवधि और बढ़ जाएगी। रोक की अवधि खत्म होने के बाद ईरान को 3.67% के निचले स्तर तक एनरिचमेंट करने की अनुमति होगी।

ईरान और अमेरिका के बीच क्या वादे किए जाएंगे?
ईरान इस MOU में यह वादा करेगा कि वह कभी भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा और न ही हथियारों से जुड़ी कोई गतिविधि करेगा। अमेरिका के एक अधिकारी के मुताबिक दोनों पक्ष एक ऐसे नियम पर चर्चा कर रहे हैं जिसके तहत ईरान यह वादा करेगा कि वह जमीन के नीचे बनी परमाणु सुविधाओं को चालू नहीं करेगा।
अमेरिका के अधिकारी ने यह भी बताया कि ईरान एक मजबूत निरीक्षण व्यवस्था को मानने का वादा करेगा जिसमें संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों की तरफ से अचानक किए जाने वाले निरीक्षण भी शामिल होंगे।
इस MOU के तहत अमेरिका यह वादा करेगा कि वह ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाएगा और दुनिया भर में फ्रीज किए गए ईरान के अरबों डॉलर के फंड को धीरे-धीरे जारी करेगा।
दिलचस्प बात यह है कि इस मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने यह भी दावा किया कि ईरान अपने अत्यधिक एनरिच्ड यूरेनियम को देश से बाहर भेजने पर सहमत हो सकता है। यह अमेरिका की एक अहम प्राथमिकता रही है, जिसे तेहरान अब तक मानने से इनकार करता रहा है।
एक सूत्र ने बताया कि इस सामग्री को अमेरिका भेजने के विकल्प पर भी चर्चा चल रही है।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मंगलवार को कहा “जरूरी नहीं कि हम एक ही दिन में पूरा समझौता लिख लें।” उन्होंने आगे कहा “यह बेहद जटिल और तकनीकी मामला है। लेकिन हमें एक ऐसा कूटनीतिक समाधान चाहिए जिसमें यह बिल्कुल साफ हो कि वे किन मुद्दों पर बातचीत करने को तैयार हैं और इस समझौते को सार्थक बनाने के लिए वे शुरुआत में किस हद तक रियायतें देने को तैयार हैं।” हालांकि लेकिन रूबियो ने ईरान के कुछ शीर्ष नेताओं को “दिमागी रूप से पागल” भी कहा और कहा कि यह अभी साफ नहीं है कि वे कोई समझौता करेंगे या नहीं।

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