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25 हजार की थी मांग, बढ़े 3 हजार.. पंचायत सहायकों की 5 में से 4 मांग को UP सरकार ने माना​

लखनऊ में कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे 57 हजार से ज्यादा पंचायत सहायकों के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला किया है. सरकार ने पंचायत सहायकों के मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी का ऐलान किया है. यानी अब 6 हजार रुपये की जगह हर महीने 9 हजार रुपये मानदेय […]

लखनऊ में कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे 57 हजार से ज्यादा पंचायत सहायकों के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला किया है. सरकार ने पंचायत सहायकों के मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी का ऐलान किया है. यानी अब 6 हजार रुपये की जगह हर महीने 9 हजार रुपये मानदेय मिलेगा. इसके साथ ही सेवा सुरक्षा, कैशलेस इलाज और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी.

सरकार का दावा है कि पंचायत सहायकों की 5 में से 4 मांगें मान ली गई हैं, लेकिन सबसे बड़ी मांग यानी 20 से 25 हजार रुपये मानदेय की मांग अभी भी पूरी नहीं हुई है. दिलचस्प ये है कि सिर्फ दो दिन पहले पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने साफ कहा था कि 20 से 25 हजार रुपये मानदेय मिलने की उम्मीद दिमाग से निकाल दें. अब जानिए कि पंचायत सहायकों की कौनकौन सी मांगें मानी गईं और किस मांग पर अब भी पेंच फंसा है.

2025 हजार की मांग, 9 हजार का ऐलान

लखनऊ के ईको गार्डन में कई दिनों से पंचायत सहायक अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे. प्रदेश के 57 हजार से ज्यादा पंचायत सहायकों की सबसे बड़ी मांग थी मानदेय बढ़ाने की. मांग थी कि 6 हजार रुपये के मौजूदा मानदेय को बढ़ाकर 20 से 25 हजार रुपये किया जाए, लेकिन सरकार की ओर से जो फैसला हुआ… उसमें मानदेय को 6 हजार से बढ़ाकर 9 हजार रुपये कर दिया गया है. यानी सरकार ने 3 हजार रुपये की बढ़ोतरी की है.

5 में 4 मांगों पर सरकार का फैसला

पंचायत सहायकों की कुल 5 प्रमुख मांगें थीं. पहली मानदेय बढ़ाकर 20 से 25 हजार रुपये किया जाए. दूसरी संविदा व्यवस्था खत्म कर पंचायत सहायकों को स्थायी किया जाए. तीसरी मानदेय सीधे बैंक खाते में भेजा जाए. चौथी नौकरी से हटाने से पहले उचित जांच हो… और पांचवीं आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं… सरकार के फैसले के बाद तस्वीर ये है कि इन पांच मांगों में से चार पर राहत दी गई है, लेकिन स्थायी करने की मांग पर फैसला न हुआ.

मानदेय अब सीधे खाते में

सरकार ने सिर्फ मानदेय बढ़ाने का ऐलान नहीं किया है. भुगतान की व्यवस्था में भी बदलाव किया जाएगा. अभी पंचायत सहायकों को मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है. अब कैबिनेट की स्वीकृति के बाद DBT यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए मानदेय सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था लागू की जाएगी. यानी भुगतान को लेकर पंचायत सहायकों को पंचायत स्तर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

प्रधानसचिव मनमाने तरीके से नहीं हटा सकेंगे

कई पंचायत सहायकों की शिकायत रही है कि ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव के स्तर पर उन्हें हटाने की कार्रवाई की जाती है. सरकार ने अब सेवा सुरक्षा को लेकर भी फैसला किया है. नई व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे. किसी पंचायत सहायक को हटाने का फैसला अब जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी के स्तर से होगा. यानी नौकरी से हटाने से पहले जांच और कमेटी की प्रक्रिया जरूरी होगी.

आंदोलन के मुकदमे भी वापस होंगे

सरकार ने आंदोलन कर रहे पंचायत सहायकों को एक और राहत दी है. धरनाप्रदर्शन के दौरान जिन पंचायत सहायकों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं. उन्हें वापस लिया जाएगा. आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों पर कार्रवाई कर उन्हें हटाया गया है, उन्हें दोबारा बहाल करने की बात भी कही गई है. यानी सरकार के फैसले में सिर्फ आर्थिक राहत नहीं है… बल्कि आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई से जुड़े मामलों में भी राहत का ऐलान किया गया है.

महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश

महिला पंचायत सहायकों के लिए भी सरकार ने सुविधा का ऐलान किया है. महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश दिया जाएगा. इसके अलावा पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा भी मिलेगी. यानी मानदेय के अलावा पहली बार सेवा से जुड़ी कुछ अतिरिक्त सुविधाओं का दायरा बढ़ाने का फैसला किया गया है.

धरना खत्म

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर फैसले के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आंदोलन कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की. प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सरकार के फैसलों की जानकारी दी गई. इसके बाद पंचायत सहायकों ने अपना धरना समाप्त कर दिया.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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