नोएडा में प्रस्तावित न्यू नोएडा शहर का मास्टर प्लान बन गया है. इस नए शहर को करीब 20 हजार हेक्टेयर जमीन पर बसाया जाएगा. उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश और औद्योगिक विकास मिशन के तहत इस शहर को बसाने का उद्देश्य अगले चार साल यानी 2030 तक छह लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करना है. न्यू नोएडा के लिए चिन्हित जमीन पर औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों का आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा.

नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के मुताबिक आगामी पांचवी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में नोएडा से जुड़े करीब 35 हजार करोड़ के 120 प्रोजेक्ट धरातल पर उतर सकते हैं. इनमें डाटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्यिक रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक और संस्थागत विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल है. न्यू नोएडा के विकास के साथ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भी मजबूत करने की योजना है.
तीन मेट्रो कॉरिडोर का प्रस्ताव
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ के मुताबिक नए शहर को तीन प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर के जरिए दिल्ली एनसीआर से कनेक्ट किया जाएगा. इसमें मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब बोटैनिकल गार्डन और चार मूर्ति के रास्ते ग्रेटर नोएडा से जोड़ने की योजना शामिल है. नोएडा पहले से ही नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे यमुना एक्सप्रेसवे डीएनडी फ्लाईवे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे के जरिए प्रमुख आर्थिक क्षेत्र से जुड़ा है. नए मेट्रो कॉरिडोर से औद्योगिक लॉजिस्टिक और आवागमन को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
168 सेक्टरों में फैला है नोएडा
करीब 20 हजार हेक्टेयर में फैला मौजूद नोएडा 168 सेक्टर में विभाजित है. इसका लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र विकसित हो चुका है. पिछले तीन दशकों में यहां करीब 9500 औद्योगिक 5000 वाणिज्यिक और ढाई सौ से अधिक संस्थागत आवंटन किए गए. इन गतिविधियों से पिछले 30 से 35 वर्षों में 12 लाख से अधिक रोजगार पैदा होने का दावा किया गया. नोएडा इलेक्ट्रॉनिक और आईटी के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है. सैमसंग, डिक्सन टीसीएस, इंफोसिस,एचसीएल माइक्रोसॉफ्ट, विप्रो और एडोब जैसी कंपनियों की मौजूदगी ने इसकी पहचान को और मजबूत किया है.
6 लाख रोजगार का लक्ष्य
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक न्यू नोएडा के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है. इसके पूरा होने के बाद नए उद्योगों को जमीन आधुनिक आधारभूत सुविधाएं और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. सरकार और प्राधिकरण का फोकस केवल निवेश लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां 2030 तक करीब 5 से 6 लाख युवाओं को रोजगार देना भी है.