Personal Loan vs Credit Card: आज के दौर में अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग अक्सर कर्ज लेते हैं. इनमें पर्सनल लोन से लेकर क्रेडिट कार्ड तक का इस्तेमाल आम बात हो गई है. लेकिन असली समस्या तब शुरू होती है जब आप एक साथ कई तरह के कर्ज के नीचे दब जाते हैं. मान लीजिए कि आपके ऊपर 2 लाख रुपये का क्रेडिट कार्ड का बिल बकाया है. उसी के साथ आपको 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन भी चुकाना है. जब हर महीने ईएमआई और भारीभरकम बिल सामने आता है, तो महीने का पूरा बजट बिगड़ जाता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आपको सबसे पहले कौन सा कर्ज चुकाना चाहिए. ज्यादातर लोग कर्ज की रकम देखकर फैसला लेते हैं. उन्हें लगता है कि 5 लाख रुपये का लोन बड़ा है, इसलिए इसे पहले खत्म करना चाहिए. लेकिन वित्तीय मामलों के जानकारों की राय इससे बिल्कुल अलग है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि कर्ज चुकाने की रणनीति सिर्फ बकाए की रकम पर निर्भर नहीं होनी चाहिए. इसमें ब्याज दर, चुकाने की शर्तें, आपके क्रेडिट प्रोफाइल पर पड़ने वाला असर जैसी कई चीजें अहम होती हैं.

ब्याज दर तय करेगी आपकी प्राथमिकता
किसी भी कर्ज को चुकाने का सबसे पहला नियम उसकी ब्याज दर को समझना है. पर्सनल लोन की तुलना में क्रेडिट कार्ड का कर्ज बहुत ज्यादा महंगा होता है. ज़ैगल के फाउंडर एग्जीक्यूटिव चेयरमैन राज पी नारायणन के मुताबिक, फैसला बकाए की रकम नहीं बल्कि ब्याज दर के आधार पर होना चाहिए. पर्सनल लोन पर आमतौर पर 12 से 18 प्रतिशत सालाना ब्याज लगता है. वहीं दूसरी तरफ, क्रेडिट कार्ड पर बकाया रखने पर ये चार्ज बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. अगर आप कार्ड का पूरा बिल समय पर नहीं भरते हैं, तो उस पर 36 से 42 प्रतिशत सालाना तक का भारी ब्याज लग सकता है. मिनी ईएमआई डॉट एआई के फाउंडर सीओओ कपिल मखीजा कहते हैं कि कार्ड का कर्ज तेजी से बढ़ता है. इसलिए 2 लाख रुपये का क्रेडिट कार्ड का कर्ज, 5 लाख रुपये के पर्सनल लोन से कहीं ज्यादा महंगा साबित होता है. इसलिए सबसे पहले ज्यादा ब्याज वाले कर्ज को खत्म करने पर जोर देना चाहिए. इसे विकल्प के तौर पर नहीं बल्कि एक बेहद जरूरी काम के रूप में लेना चाहिए.
मिनिमम पेमेंट के जाल से बचें
क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले लोग अक्सर एक बड़ी गलती कर बैठते हैं. जब भारी भरकम बिल सामने आता है, तो लोग सिर्फ 5 प्रतिशत का मिनिमम अमाउंट जमा कर देते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है. कपिल मखीजा बताते हैं कि ये एक बहुत बड़ी भूल है. आपके दिमाग में ये होता है कि आपने मिनिमम ड्यू भर दिया है, लेकिन बाकी बचे पैसे पर 40 प्रतिशत की दर से ब्याज जुड़ता रहता है. ये ब्याज इतनी तेजी से बढ़ता है कि आप कर्ज के एक ऐसे चक्रव्यूह में फंस जाते हैं, जहां से बाहर निकलना नामुमकिन सा लगने लगता है. इसलिए सिर्फ मिनिमम अमाउंट भरने से हमेशा बचना चाहिए. आपका लक्ष्य क्रेडिट कार्ड के पूरे बकाए को एक साथ खत्म करना होना चाहिए.
सिबिल स्कोर पर पड़ता है असर
आपके कर्ज चुकाने के तरीके का सीधा असर आपके सिबिल स्कोर पर पड़ता है. पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड दोनों का आपके क्रेडिट प्रोफाइल पर अलगअलग असर होता है. अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड की लिमिट का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, तो इसे हाई यूटिलाइजेशन माना जाता है. हर महीने क्रेडिट कार्ड की लिमिट फुल रखने से आपका क्रेडिट स्कोर तेजी से नीचे गिरने लगता है. दूसरी तरफ, पर्सनल लोन का मामला थोड़ा अलग है. अगर आप अपने पर्सनल लोन की ईएमआई हर महीने समय पर चुका रहे हैं, तो ये आपके क्रेडिट प्रोफाइल को मजबूत बनाता है. समय पर ईएमआई भरने से सिबिल स्कोर में सुधार होता है. इसलिए समझदारी इसी में है कि पर्सनल लोन की ईएमआई बिना किसी देरी के चलने दें.
कर्ज से बाहर निकलने का स्मार्ट तरीका
वित्तीय तनाव से बचने के लिए एक ठोस रणनीति बनाना बहुत जरूरी है. सबसे पहले ये तय करें कि आपके पास हर महीने कुल कितना पैसा बच रहा है. अपने बजट से खर्चों को कम करके ज्यादा से ज्यादा पैसा बचाएं. इस बचे हुए पैसे या किसी भी तरह के बोनस को सीधे क्रेडिट कार्ड के बिल में जमा करें. अगर आपके पास एकमुश्त पैसा नहीं है और क्रेडिट कार्ड का बिल बहुत ज्यादा हो गया है, तो आप एक और तरीका अपना सकते हैं. आप अपने क्रेडिट कार्ड के भारी बकाए को कम ब्याज वाली ईएमआई में बदल सकते हैं. इससे आप 40 प्रतिशत के भारी ब्याज से बच जाएंगे और कर्ज चुकाना आसान हो जाएगा.