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‘हम नहीं करेंगे काम…’ लखनऊ में लाठीचार्ज के विरोध में वकीलों का कार्य बहिष्कार; बड़े आंदोलन की तैयारी

Lucknow News: लखनऊ में पुराने हाईकोर्ट परिसर कैसरबाग के आसपास अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई के बाद वकीलों और प्रशासन के बीच टकराव गहरा गया है. रविवार को नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में आज वकीलों ने कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है. सेंट्रल बार एसोसिएशन समेत कई बार संगठनों ने कोर्ट में काम नहीं करने का फैसला लिया है, जबकि लखनऊ बार एसोसिएशन ने आपात बैठक बुलाकर बड़े आंदोलन की रणनीति तैयार करने के संकेत दिए हैं.

‘हम नहीं करेंगे काम…’ लखनऊ में लाठीचार्ज के विरोध में वकीलों का कार्य बहिष्कार; बड़े आंदोलन की तैयारी
‘हम नहीं करेंगे काम…’ लखनऊ में लाठीचार्ज के विरोध में वकीलों का कार्य बहिष्कार; बड़े आंदोलन की तैयारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने 11 मार्च 2026 को पुराने हाईकोर्ट परिसर के आसपास नाले पर बने अवैध चैंबरों और दुकानों को हटाने का आदेश दिया था. बाद में 7 अप्रैल की सुनवाई में कोर्ट ने प्रशासन को 25 मई तक अतिक्रमण हटाकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे. इसी आदेश के पालन में रविवार सुबह नगर निगम की टीम पुलिस बल के साथ कार्रवाई करने पहुंची थी.

विरोध, पथराव और फिर लाठीचार्ज

नगर निगम की कार्रवाई का वकीलों ने जमकर विरोध किया. वकीलों का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना और संवाद के अचानक बुलडोजर चलाया गया. देखते ही देखते विरोध उग्र हो गया और मौके पर पथराव शुरू हो गया. हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को नियंत्रित किया. इस दौरान कई वकीलों के चोटिल होने की भी बात सामने आई है.

वकीलों की आजीविका पर हमला

लखनऊ बार एसोसिएशन के महामंत्री जीत यादव ने पुलिस कार्रवाई को बर्बर बताते हुए कहा कि प्रशासन ने वकीलों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया. उन्होंने आरोप लगाया कि न कोई नोटिस दिया गया और न ही बातचीत की कोशिश की गई. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, लेकिन पुलिस ने जिस बर्बरता से वकीलों को पीटा और दौड़ाया, उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. वकील संगठनों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर वकीलों की आजीविका पर सीधा हमला किया गया है.

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आज आपात बैठक, हो सकते हैं बड़े फैसले

घटना के बाद वकील संगठन एकजुट हो गए हैं. सोमवार को बुलाई गई आपात बैठक में प्रदेशव्यापी आंदोलन, न्यायिक कार्य से दूरी और विरोध प्रदर्शन जैसे बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. वकीलों ने यह भी साफ किया है कि 25 मई को हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई के दौरान वे अपना विरोध दर्ज कराएंगे. कैसरबाग और पुराने हाईकोर्ट परिसर के आसपास माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सतर्क है.

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