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हम तुम्हारे गुलाम नहीं…ट्रंप के बीजिंग से लौटते ही चीन पर भयंकर भड़क गया ताइवान

ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने कहा कि ताइवान की स्वतंत्रता का अर्थ है कि यह द्वीप न तो बीजिंग का है और न ही उसके अधीन है। केवल ताइवानी लोग ही अपने भविष्य का फैसला कर सकते हैं। लाई ने अमेरिकी हथियारों की खरीद का भी बचाव किया और इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका से हथियारों की खरीद क्षेत्रीय संघर्ष और अस्थिरता को रोकने का सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। लाई चिंग-ते का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में अपनी चीन यात्रा को पूरा कर वापस लौटे हैं और इस यात्रा के दौरान ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बीजिंग में मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद से ही ताइवान को लेकर एक नई बहस छिड़ चुकी है। दरअसल ट्रंप ने चीन से लौटने के बाद कहा था कि अमेरिका ऐसा नहीं चाहता है कि कोई यह कह दे कि हम स्वतंत्रता की घोषणा कर दें क्योंकि अमेरिका हमारे पीछे खड़ा है। बस ट्रंप के इसी बयान के बाद ताइवान में भी चिंता बढ़ गई कि कहीं अमेरिका अपने समर्थन को लेकर ढीला तो नहीं पड़ रहा।

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इन सब मामलों के बीच ताइपे में अपनी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की 40वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में बोलते हुए ताइवान के राष्ट्रपति लाइचिंग ने कह दिया कि 1999 में उनकी पार्टी ने जो प्रस्ताव पास किया था वही आज भी पार्टी की नीति है और उसके मुताबिक ताइवान पहले से ही एक संप्रभु और स्वतंत्र देश है जिसका आधिकारिक नाम रिपब्लिक ऑफ चाइना है। लाइ ने कहा कि ताइवान इंडिपेंडेंस का असली मतलब यह नहीं है कि कोई नई स्वतंत्रता घोषित की जाए। बल्कि इसका मतलब यह है कि ताइवान पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का हिस्सा नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि रिपब्लिक ऑफ चाइना और पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना एक दूसरे के अधीन नहीं है। आप खुद सुनिए कि उन्होंने क्या कुछ कहा है। सो जीस को जी को चीन लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता आ रहा है और उसने कभी भी बल प्रयोग से पीछे हटने की बात को नहीं मानी है। खास करके तब जब उसे लगे कि ताइवान अनौपचारिक रूप से स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहा है। 1949 में गृह युद्ध हारने के बाद रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार ताइवान चली गई थी। जबकि माउथसेतुंग की कम्युनिस्ट पार्टी ने मुख्य भूमि चाइना में पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की थी।

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लाइ ने अपने भाषण में यह भी कहा कि रिपब्लिक ऑफ चाइना का अस्तित्व चाइना से है और इसके क्षेत्र में पेंगू, किनमैन और मैक्सू जैसे द्वीप भी शामिल है। हालांकि उन्होंने अपने भाषण में ट्रंप का नाम नहीं लिया और ना ही पत्रकारों के सवाल का जवाब दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे अहम बात जो निकल कर सामने आ रही है वो यह कि अमेरिका अब भी ताइवान का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थक माना जाता है। लेकिन ट्रंप ने अब यह भी कह दिया है कि उन्होंने अभी तक ताइवान को आगे हथियार भेजने का कोई फैसला नहीं लिया है। जबकि 1979 के ताइवान रिलेशंस एक्ट के तहत अमेरिका पर ताइवान की मदद की जिम्मेदारी मानी जाती है। यानी साफ है कि ताइवान अमेरिका और चीन के बीच तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। लाइचिंगटे के बयान ने एक बार फिर बीजिंग और ताइपे के बीच के पुराने विवाद को दुनिया के सामने ला दिया है और ताइवान के स्टैंड को सामने रख दिया है कि ताइवान एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है जो कि चीन के आगे नहीं झुकने वाला है। वहीं ट्रंप के दौरे के बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि ताइवान के ऊपर चीन कभी भी हमला कर सकता है।

Khabar Monkey

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