पेरेंट्स की अक्सर शिकायत होती है कि बच्चा दूसरों के सामने बात करने से बहुत झिझकता है. कोई अगर कुछ पूछे तो जवाब नहीं दे पाता है. ऐसे में मातापिता परेशान हो जाते हैं कि आगे चलकर बच्चा बाहर किस तरह से सर्वाइव करेगा. इसी प्रेशर में कई बार पेरेंट्स गलती करते हैं कि वो बच्चे से कहते हैं, बेटा अंकल को कविता सुनाओ, उन्हें टेबल सुनाओ, इससे बच्चा इरिटेट हो सकता है. उसमें और भी ज्यादा हीन भावना आ जाती है. ऐसे ये गलती न करें. बच्चे में पब्लिक स्पीकिंग की आदत आए और वो सोशल बिहेवियर सीखे. इसके लिए यहां दिए गए आसान तरीकों को अपनाएं.

अगर आप सच में चाहते हैं कि आपके बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़े और वो मेहमानों से लेकर स्कूल में स्टेज तक पर बिना किसी डर के बोलना सीखे तो आपको उसपर काम करना चाहिए. चलिए जान लेते हैं कि किन टिप्स की मदद से आप बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ा सकते हैं.
घर पर दें एक सेफ जोन
आपके बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़े और वो पब्लिक स्पीकिंग सीखे इसका पहला रूल है कि आप उसे घर पर ही एक सेफ माहौल दें. खेलखेल में बच्चे को छोटीछोटी स्पीच बोलने दें और उसकी तारीफ करें. इससे बच्चा सीखता है कि वो किस तरह से अपनी बात रख सकता है, क्योंकि आपको एक ऐसा बच्चा नहीं बनाना है जो बस बोलता जाए. आपको ऐसा बच्चा तैयार करना है जो सही तरह से बोले.
बच्चे से सवाल पूछे और ध्यान से सुनें
पेरेंट्स को चाहिए कि वो बच्चे से कम्यूनिकेशन सही रखें. जब बच्चा बाहर से खेलकर आए या फिर स्कूल से आए तो उनके पास कुछ देर बैठें और उनसे पूछें कि उनका दिन कैसा रहा. दोस्तों के साथ खेलने में मजा आया. उनके टीचर ने क्या पढ़ाया, क्या कहा. उन्होंने बातों का जवाब किस तरह से दिया. इसी के साथ जब बच्चा आपको चीजें शेयर कर रहा है तो उसे ध्यान से सुनें. इससे वो अपनी बात जब आपके सामने कहने लगेगा तो दूसरों के सामने भी खुलकर बात करना सीखेगा.
बारबार टोकने की आदत छोड़ें
अक्सर देखा जाता है कि बच्चे जब बोलते हैं तो फिर चुप होने का नाम नहीं लेते हैं लेकिन दूसरों के सामने चुप हो जाते हैं. दरअसल ज्यादातर ऐसा होता है कि जब हमारा बच्चा किसी के सामने बात कर रहा होता है तो हम उसे टोक देते हैं या फिर उसकी ग्रामर, बोलने का तरीका ठीक करने लगते हैं. इससे बच्चे का कॉन्फिडेंस कम होता है. जब तक कि आपका बच्चा किसी बड़े से बदतमीजी से न बोल रहा हो तब तक उसे अपनी बात रखने देना चाहिए और उसे बोलने देना चाहिए.
गलतियां करने की आजादी दें
बच्चा जब कुछ काम करता है तो गलतियां भी करता है. बच्चे को यह समझाएं कि गलती हर किसी से होती है और ये सीखने का ही एक हिस्सा है. बच्चा जब किसी भी घर के काम या स्कूल के प्रोजेक्ट में गलती करे तो उसे डांटे नहीं, बल्कि प्यार से समझाएं और डर को दूर करने में मदद करें. इससे बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ता है.
दूसरे बच्चों से न करें तुलना
पेरेंट्स अक्सर ये गलती करते हैं कि वो अपने बच्चों की तुलना दूसरों से करते हैं. कि देखो उसके नंबर कितने अच्छे आए हैं. वो कितना बढ़िया बोलता है. हर बच्चे की अपनी प्रतिभा और सीखने की क्षमता होती है, जिसे बढ़ावा देना चाहिए. तुलना करने से आपका बच्चा और भी ज्यादा अंडरकॉन्फिडेंट हो जाता है. अपने बच्चे की खूबियां पहचानें और उन पर काम करने में उसकी मदद करें.