भारत में जल्द ही पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को अपनी गाड़ी के मुताबिक अलग-अलग तरह का एथेनॉल मिला पेट्रोल चुनने का विकल्प मिल सकता है. सरकार E20, E22, E25 और E30 जैसे कई एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल बाजार में लाने की तैयारी कर रही है. इसका मकसद कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है.

सरकार ने सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के साथ-साथ निजी कंपनियों जियो-बीपी मोबिलिटी, नायरा एनर्जी और Shell को जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के निर्देश दिए हैं.
पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग लेबलिंग होगी
नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंपों पर हर एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन की अलग पहचान होगी. डिस्पेंसर पर साफ लिखा जाएगा कि पेट्रोल में कितना एथेनॉल मिला है, ताकि ग्राहक अपनी गाड़ी के हिसाब से सही विकल्प चुन सकें. इसके लिए अलग स्टोरेज टैंक, ब्लेंडिंग सिस्टम और क्वालिटी मॉनिटरिंग व्यवस्था भी तैयार की जाएगी.
फिलहाल देश के ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल मिल रहा है. हालांकि, एथेनॉल उद्योग लंबे समय से 20 प्रतिशत से ज्यादा ब्लेंडिंग की मांग कर रहा था. उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में एथेनॉल उत्पादन अब जरूरत से ज्यादा हो चुका है, इसलिए नए विकल्प लाना जरूरी है.
कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने की कोशिश
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार एथेनॉल को बड़े विकल्प के रूप में देख रही है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2014 से फरवरी 2026 के बीच एथेनॉल ब्लेंडिंग से देश को करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है. साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आई है.
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माइलेज और इंजन को लेकर बहस जारी
हालांकि, ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर लोगों में माइलेज और इंजन की परफॉर्मेंस को लेकर चिंता बनी हुई है. लेकिन सरकार का कहना है कि E20 जैसे ईंधन से गाड़ी की पिकअप बेहतर होती है और माइलेज में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत में भी ब्राजील की तरह ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग एथेनॉल ब्लेंड वाला पेट्रोल चुन सकेंगे.




