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सपा की बैठक के बीच जिस पर खफा हुए अखिलेश यादव, वो जुगेंद्र यादव कौन?​

एटा और कासगंज में समाजवादी पार्टी के संगठन पर बड़ी कार्रवाई हुई है. सपा मुखिया अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुई बैठक में नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक और गालीगलौज के बाद दोनों जिलों की पूरी कार्यकारिणी भंग कर दी गई. जिलाध्यक्ष से लेकर फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी तक हटा दिए गए, लेकिन इस कार्रवाई […]

एटा और कासगंज में समाजवादी पार्टी के संगठन पर बड़ी कार्रवाई हुई है. सपा मुखिया अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुई बैठक में नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक और गालीगलौज के बाद दोनों जिलों की पूरी कार्यकारिणी भंग कर दी गई. जिलाध्यक्ष से लेकर फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी तक हटा दिए गए, लेकिन इस कार्रवाई के पीछे सिर्फ बैठक में हुआ विवाद है या एटा की पुरानी गुटबाजी भी इसकी बड़ी वजह है? आइए जानते हैं

दरअसल, पिछले दिनों ही एटा की सियासत में एक बार फिर समाजवादी पार्टी की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई. 19 सितंबर को लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में एटा और कासगंज के पार्टी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी. मकसद था 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों और संगठन की जमीनी स्थिति का जायजा लेना, लेकिन बैठक के दौरान ही माहौल गर्म हो गया. पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव और मंजीत यादव के बीच तीखी बहस हो गई.

अखिलेश के सामने ही गालीगलौज

मामला इतना बढ़ा कि दोनों के बीच गालीगलौज तक की बात सामने आई. अखिलेश यादव के सामने हुए इस घटनाक्रम से बैठक का माहौल बिगड़ गया. अखिलेश यादव बैठक में नेताओं को समझाते और नाराजगी जाहिर करते हुए दिखाई दिए. जुगेंद्र सिंह यादव के परिवार पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश ने कहा कि जब पैसा ज्यादा हो जाता है, तब लोग ऐसे ही करते हैं. इसके बाद अखिलेश यादव बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए.

एटाकासगंज की कार्यकारिणी भंग

इसके बाद सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने एटा और कासगंज के जिलाध्यक्षों के साथ पूरी जिला कार्यकारिणी को पदमुक्त कर दिया गया. इसके अलावा दोनों जिलों के फ्रंटल संगठनों के जिलाध्यक्ष, उनकी कार्यकारिणियों के पदाधिकारी और सदस्य भी तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिए गए. यानी 2027 चुनाव से पहले सपा ने एटा और कासगंज में संगठन को लगभग पूरी तरह रीसेट कर दिया है. अब सवाल उठता है कि आखिर ये नौबत क्यों आई?

कौन हैं जुगेंद्र यादव?

एटा की राजनीति में लंबे समय से अलगअलग नेताओं और परिवारों के बीच वर्चस्व की लड़ाई की चर्चा रही है. एक तरफ पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव का प्रभाव है, तो दूसरी तरफ पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव का परिवार और दूसरे स्थानीय सपा नेताओं के अपनेअपने राजनीतिक समीकरण हैं. जुगेंद्र सिंह यादव, अलीगंज से सपा के पूर्व विधायक रहे रामेश्वर सिंह यादव के छोटे भाई हैं. जुगेंद्र खुद एटा के जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं.

मौजूदा समय में जुगेंद्र सिंह यादव की पत्नी रेखा यादव जिला पंचायत अध्यक्ष हैं. उनके परिवार के कई सदस्य भी जिला पंचायत की राजनीति में सक्रिय हैं. राजनीति के साथ जुगेंद्र सिंह यादव का कारोबारी प्रभाव भी चर्चा में रहा है. पेट्रोल पंप, स्कूल, होटल और ठेकेदारी जैसे कारोबार से उनका जुड़ाव बताया जाता है. 2022 के चुनावी हलफनामे में जुगेंद्र यादव ने अपनी संपत्ति 23 करोड़ रुपये बताई, जबकि बड़े भाई रामेश्वर सिंह यादव ने भी 23 करोड़ रुपये संपत्ति बताई थी.

सुबोध यादव कौन?

अखिलेश ने जुगेंद्र के साथ ही सुबोध यादव का नाम लिया था. सुबोध यादव पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव के बेटे हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता के तौर पर प्रैक्टिस करते हैं. राजनीतिक परिवार से आने की वजह से वह सक्रिय राजनीति में भी अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं. फर्रुखाबाद की जिला पंचायत अध्यक्षी की राजनीति से लेकर अमृतपुर विधानसभा सीट पर उनकी दावेदारी की चर्चा रही है.

अब बात मंजीत यादव की…

मंजीत यादव पूर्व विधान परिषद सभापति रमेश बाबू यादव के भतीजे हैं. वह एटा के वार्ड नंबर 9 से जिला पंचायत सदस्य भी रह चुके हैं और मारहरा विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की तरफ से अपनी दावेदारी पेश करते रहे हैं. व्यापार की बात करें तो मंजीत यादव का नाम ठेकेदारी और प्रॉपर्टी कारोबार से भी जुड़ा रहा है. रमेश बाबू यादव के बेटे आशीष यादव उर्फ आंसू पहले एटा सदर सीट से सपा के विधायक रह चुके हैं. मौजूदा समय में वह बीजेपी से एमएलसी हैं.

2017 और 2022 में सपा को नुकसान?

एटा में सपा दो खेमों में बंटी हुई है. एक और जुगेंद्र यादव और उनका परिवार है, जबकि दूसरी ओर से मंजीत यादव और सपा के नेता व कार्यकर्ता. सपा की अंदरूनी गुटबाजी का असर चुनावी नतीजों में साफ दिखाई देता है. 2022 के विधानसभा चुनाव में एटा और कासगंज की 7 में से 6 सीटों पर सपा को हार का सामना करना पड़ा था. गौर फरमाने वाली बात है कि जुगेंद्र यादव और उनके भाई रामेश्वर यादव भी चुनाव लड़े थे, लेकिन चुनाव हार गए थे.

अखिलेश से हुई थी शिकायत

सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव के बारबार जुगेंद्र यादव के परिवार की शिकायत आ रही थी. शिकायत करने वालों का कहना था कि ये परिवार किसी और नेता को खड़े नहीं होने देना चाहते हैं… सभी पद इनके ही परिवार को चाहिए… इस पर अखिलेश ने जुगेंद्र यादव के परिवार को समझाने की कोशिश की, लेकिन मामला उस वक्त बिगड़ गया, जब अखिलेश के सामने ही दोनों गुट के नेता गालीबाजी करने लगे. अखिलेश इससे बेहद खफा हो गए.

इसके बाद अखिलेश ने दोनों गुटों के नेताओं को बाहर कर दिया. हालांकि, इसके बाद जुगेंद्र यादव ने अपना बयान जारी करते हुए अखिलेश यादव को अपना बड़ा भाई बताया और कहा कि मैं उनके परिवार का हूं, खून का रिश्ता है.. वो डांट सकते हैं. खैर, अब देखने वाली बात होगी कि सपा में जुगेंद्र यादव के परिवार का रुतबा बरकरार रहता है या फिर उनके विरोधी गुट को अखिलेश तवज्जो देते हैं. फिलहाल, एटाकासगंज की सियासत की चर्चा हर तरफ है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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