नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिग्गज उद्योगपति दिवंगत संजय कपूर की 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद में एक बड़ा हस्तक्षेप किया है। अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ (Mediator) नियुक्त किया है।
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जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ ने यह आदेश तब दिया जब मामले से जुड़े सभी पक्ष आपसी सहमति से मध्यस्थता के लिए तैयार हो गए।
पारिवारिक कलह को मनोरंजन का जरिया न बनाएं
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों पक्षों—संजय कपूर की पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और उनकी मां रानी कपूर—से अपील की कि वे इस विवाद को सार्वजनिक मंच या सोशल मीडिया पर न ले जाएं। बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा, यह एक पारिवारिक झगड़ा है, इसे सिर्फ परिवार तक ही सीमित रहने दें। इसे जनता के लिए मनोरंजन का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। अदालत ने संजय कपूर की पूर्व पत्नी और अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों सहित सभी हितधारकों से खुले दिमाग के साथ मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने का आग्रह किया है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
यह पूरा विवाद ‘सोना ग्रुप’ की विरासत और ट्रस्ट के मालिकाना हक को लेकर है।
- मां के आरोप: 80 वर्षीय रानी कपूर का आरोप है कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने दावा किया कि 2017 में स्ट्रोक आने के बाद, प्रशासनिक कार्यों के बहाने उनसे कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए और उनकी सहमति के बिना संपत्ति को फैमिली ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।
- बेटे की मौत के बाद बढ़ा विवाद: पिछले साल जून में लंदन में संजय कपूर के निधन के बाद यह विवाद तब गहरा गया जब रानी कपूर ने आरोप लगाया कि उनकी बहू प्रिया कपूर ने ग्रुप की मुख्य कंपनियों पर नियंत्रण कर लिया, जिससे उन्हें उनकी पैतृक संपत्ति और घर से बेदखल कर दिया गया।
अदालत का मानवीय दृष्टिकोण
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का सुझाव इसलिए दिया क्योंकि रानी कपूर की आयु 80 वर्ष है। कोर्ट ने कहा कि लंबी कानूनी लड़ाई किसी के हित में नहीं होगी, विशेषकर बुजुर्ग वादी के लिए। कोर्ट का मानना है कि मध्यस्थता के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालना ही सबसे बेहतर विकल्प है।
दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त रुख
इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मामले में कड़े निर्देश जारी किए थे। हाई कोर्ट ने दिवंगत उद्योगपति के विदेशी बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स के संचालन पर रोक लगा दी है। साथ ही, 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति पर ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया है, ताकि किसी तीसरे पक्ष का अधिकार सृजित न हो सके।





