भारत के अमीर निवेशकों की निवेश रणनीति तेजी से बदल रही है. अब वे अपनी पूरी संपत्ति को शेयर बाजार, फिक्स्ड डिपॉजिट और रियल एस्टेट तक सीमित नहीं रखना चाहते. इसके बजाय वे निवेश के ऐसे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें पोर्टफोलियो में विविधता, लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न और जोखिम से बचाव के मौके मिल सकें. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के अमीर निवेशक अपनी संपत्ति का करीब 4045 फीसदी हिस्सा पारंपरिक निवेश विकल्पों से बाहर लगा रहे हैं. जूलियस बेयरईवाई की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय ‘फैमिली ऑफिस’ में 4045% निवेश ‘वैकल्पिक निवेशों’ में किया जा रहा है. इनमें PE, VC, प्राइवेट क्रेडिट, AIF, REIT और InvIT प्रमुख निवेश विकल्प हैं। आइए इस रिपोर्ट को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं.

अमीरों का पैसा किन निवेश विकल्पों में जा रहा है?
1. प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल
- प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल अमीर निवेशकों के पसंदीदा विकल्पों में शामिल हैं. कई फैमिली ऑफिस अपने पोर्टफोलियो का 1020 फीसदी या उससे ज्यादा हिस्सा इन निवेशों में लगा रहे हैं.
- प्राइवेट इक्विटी: इसमें ऐसी कंपनियों में निवेश किया जाता है, जो शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं होती हैं.
- वेंचर कैपिटल: इसके जरिए शुरुआती दौर के स्टार्टअप और तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में पैसा लगाया जाता है.
- टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, रिन्यूएबल एनर्जी और कंज्यूमर बिजनेस जैसे सेक्टर निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं.
2. प्राइवेट क्रेडिट में बढ़ रही दिलचस्पी
प्राइवेट क्रेडिट भी अमीर निवेशकों के लिए एक अहम विकल्प बन रहा है. इसमें निवेशक पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बाहर कंपनियों को कर्ज देने के अवसरों में पैसा लगाते हैं. इससे निवेशकों को ब्याज के रूप में कमाई का मौका मिलता है. भारत का अल्टरनेटिव एसेट मार्केट करीब 400 अरब डॉलर का आंका गया है. इसमें SEBI रजिस्टर्ड अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड का हिस्सा करीब 156 अरब डॉलर है. रिपोर्ट के अनुसार, यह बाजार 2034 तक 2 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा हो सकता है.
3. AIF में निवेश का बढ़ता चलन
अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड यानी AIF ऐसे निवेश फंड होते हैं, जो पारंपरिक म्यूचुअल फंड से अलग रणनीतियों के जरिए पैसा लगाते हैं. इनमें प्राइवेट इक्विटी, वेंचर कैपिटल, प्राइवेट क्रेडिट और दूसरे विशेष निवेश विकल्प शामिल हो सकते हैं. हालांकि, AIF में निवेश करने से पहले उसकी रणनीति, फंड मैनेजर का अनुभव, जोखिम और लॉकइन अवधि समझना जरूरी है.
4. REIT और InvIT भी बन रहे पसंद
अमीर निवेशक रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के नए तरीकों को भी अपना रहे हैं। REIT के जरिए निवेशक कमर्शियल प्रॉपर्टी, ऑफिस और अन्य रियल एस्टेट एसेट में अप्रत्यक्ष रूप से निवेश कर सकते हैं. InvIT के जरिए सड़क, बिजली ट्रांसमिशन और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में निवेश का मौका मिलता है. इन विकल्पों के जरिए निवेशक सीधे कोई प्रॉपर्टी या इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट खरीदे बिना भी उनमें हिस्सेदारी ले सकते हैं.
AI, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी पर भी बड़ा दांव
अमीर निवेशकों की नजर सिर्फ पारंपरिक सेक्टरों पर नहीं है. नई पीढ़ी के निवेशक भविष्य की टेक्नोलॉजी और उभरते उद्योगों में भी पैसा लगा रहे हैं.
रिपोर्ट में जिन प्रमुख क्षेत्रों का जिक्र किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- क्लाइमेट टेक्नोलॉजी
- सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी
- सेमीकंडक्टर
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग
- क्लाउड सर्विसेज
- डेटा सेंटर
- एनर्जी स्टोरेज और रोबोटिक्स
इन क्षेत्रों में निवेश का मकसद आने वाले वर्षों में बढ़ने वाली मांग और कारोबारी अवसरों का फायदा उठाना है.
विदेशों में भी निवेश कर रहे हैं अमीर भारतीय
भारतीय अमीर परिवार अब सिर्फ घरेलू बाजार पर निर्भर नहीं रहना चाहते. वे अमेरिका और दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी निवेश के अवसर तलाश रहे हैं. इसके पीछे कई वजहें हैं. पहली, निवेश को अलगअलग देशों में बांटकर जोखिम कम करना. दूसरी, विदेशी बाजारों में उपलब्ध नई टेक्नोलॉजी और कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल करना. इसके अलावा, विदेशी निवेश से करेंसी डायवर्सिफिकेशन का भी मौका मिलता है. हालांकि, इसमें करेंसी एक्सचेंज और विदेशी बाजारों से जुड़े जोखिम भी होते हैं.
निवेश की सोच में क्यों आ रहा है बदलाव?
- अमीरों की संख्या बढ़ना: भारत में 3 करोड़ डॉलर यानी 30 मिलियन डॉलर से ज्यादा संपत्ति वाले अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल की संख्या 19,000 से अधिक बताई गई है. 2031 तक यह आंकड़ा 25,000 के पार जाने का अनुमान है.
- नई पीढ़ी का निवेश के प्रति नजरिया: युवा निवेशक सिर्फ पैसा बचाने के बजाय उसे तेजी से बढ़ाने के अवसर तलाश रहे हैं. वे स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल बिजनेस में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं.
- पारिवारिक संपत्ति का बढ़ना: सफल IPO, स्टार्टअप में हिस्सेदारी बेचने और कारोबार से मिलने वाली बड़ी रकम के कारण कई परिवारों के पास निवेश के लिए ज्यादा पूंजी उपलब्ध हुई है.
क्या अल्टरनेटिव निवेश में जोखिम भी है?
ज्यादा रिटर्न की संभावना के साथ इन निवेश विकल्पों में जोखिम भी अधिक होता है. इसलिए अमीर निवेशक भी इन विकल्पों में पैसा लगाने से पहले कई बातों पर ध्यान देते हैं.
- लंबा लॉकइन पीरियड: प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल में पैसा कई साल तक फंसा रह सकता है. कुछ निवेशों में 5 से 10 साल तक पूंजी निकालना मुश्किल हो सकता है.
- पारदर्शिता की कमी: शेयर बाजार की तरह इन निवेशों की कीमत हर दिन सामने नहीं आती. इसलिए निवेशक को वास्तविक वैल्यू का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है.
- फंड मैनेजर का चुनाव: गलत फंड मैनेजर चुनने से निवेश पर बड़ा नुकसान हो सकता है. इसलिए उसका पुराना प्रदर्शन, फीस और निवेश की रणनीति समझना जरूरी है.
- लिक्विडिटी का जोखिम: जरूरत पड़ने पर निवेश को तुरंत नकदी में बदलना आसान नहीं होता.
आम निवेशकों के लिए क्या है सीख?
इस रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि आम निवेशकों को भी अपनी 4045 फीसदी संपत्ति अल्टरनेटिव निवेश में लगा देनी चाहिए. अमीर परिवारों और सामान्य निवेशकों की वित्तीय क्षमता, जोखिम उठाने की ताकत और निवेश की अवधि अलगअलग होती है. आम निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे अपनी जरूरत, लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से निवेश करें. शेयर, म्यूचुअल फंड, FD और दूसरे विकल्पों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है. किसी भी AIF, प्राइवेट क्रेडिट या अनलिस्टेड कंपनी में निवेश करने से पहले उसके नियम, जोखिम, लॉकइन और निकासी की शर्तों को अच्छी तरह समझना चाहिए.