रिकवरी प्रोसेस के दौरान उधार लेने वालों के साथ सही व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए, RBI ने उधार देने वालों के लिए डिटेल गाइडलाइंस जारी की हैं. इनमें उधार लेने वाले/गारंटर से केवल सुबह 8:00 बजे से शाम 7:00 बजे के बीच संपर्क करने या मिलने, और परिवार में किसी की मौत या मेडिकल इमरजेंसी जैसे मौकों पर कॉल या मुलाक़ात से बचने के निर्देश शामिल हैं.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया चौथी रिवाइज गाइडलाइंस, 2026 के अनुसार, जो 1 जनवरी, 2027 से लागू होंगी, बैंकों और नॉनबैंकिंग फाइनेंस कंपनियों सहित सभी उधार देने वालों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके कर्मचारी/रिकवरी एजेंट गालीगलौज वाली भाषा का इस्तेमाल न करें या उधार लेने वाले/गारंटर के वीडियो/ऑडियो रिकॉर्डिंग या निजी जानकारी पोस्ट करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल न करें.
उधार देने वालों को ऐसे उपाय करने होंगे, जिनमें पेनल्टी के प्रावधान भी शामिल हों, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके कर्मचारी/रिकवरी एजेंसियां किसी भी तरह से ग्राहक की जानकारी का गलत इस्तेमाल न करें. उन्हें की गई कॉल का कंटेंट/टेक्स्ट रिकॉर्ड करना होगा. इसके अलावा, उधार देने वाले मोबाइल डिवाइस जैसे मोबाइल फ़ोन, टैबलेट या लैपटॉप की कार्यक्षमता को तभी रोक या बंद कर सकते हैं, जब बैंक ने उस डिवाइस के लिए लोन दिया हो.
बैंकों को बनानी होगी पॉलिसी
RBI ने कहा कि उधार देने वालों को लोन की बकाया राशि की वसूली/रिकवरी के लिए एक पॉलिसी बनानी होगी, जिसमें उनके अपने कर्मचारी या रिकवरी एजेंट द्वारा सिक्योरिटी पर कब्जा करने की प्रक्रिया भी शामिल हो. इस पॉलिसी में रिकवरी प्रोसेस शुरू करने के कारण, लोन रिकवरी के लिए एस्केलेशन मैट्रिक्स के अनुसार चरणबद्ध कार्रवाई, और कर्मचारियों व रिकवरी एजेंटों के लिए आचार संहिता जैसे पहलू शामिल होंगे. पॉलिसी में उधार लेने वाले की मृत्यु के मामले में लोन की बकाया राशि की वसूली, वित्तीय संकट वाले मामलों को संभालने के लिए एक व्यवस्थित ढांचा जैसे पहलू भी शामिल होंगे.
रिकॉर्डिंग करनी होगी सुरक्षित
RBI ने कहा कि बैंक को लोन की बकाया राशि की वसूली के लिए अपने कर्मचारी/रिकवरी एजेंट द्वारा उधार लेने वाले/गारंटर को की गई कॉल का समय और संख्या रिकॉर्ड करनी होगी. इसके अलावा, बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी/रिकवरी एजेंट द्वारा उधार लेने वाले/गारंटर को की गई कॉल, और उधार लेने वाले/गारंटर द्वारा बैंक द्वारा दिए गए टेलीफ़ोन/मोबाइल नंबर पर की गई कॉल के कंटेंट/टेक्स्ट की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए. बैंक को यह पक्का करना होगा कि उसके रिकवरी टारगेट या कर्मचारियों के लिए इंसेंटिव का स्ट्रक्चर, या रिकवरी एजेंसी के साथ कॉन्ट्रैक्ट के तहत आने वाले लोगों के नियम, कठोर रिकवरी तरीकों को बढ़ावा न दें.
लोन कॉन्ट्रैक्ट/एग्रीमेंट में कुछ बातें साफ तौर पर लिखी होनी चाहिए, जैसे कि कब्जा लेने से पहले का नोटिस पीरियड, किन हालात में नोटिस पीरियड को हटाया जा सकता है, सिक्योरिटी का कब्जा लेने का तरीका और सिक्योरिटी की बिक्री/नीलामी से पहले लोन चुकाने के लिए उधार लेने वाले को दिया जाने वाला आखिरी मौका शामिल हों. इनमें उधार लेने वाले को सिक्योरिटी का कब्ज़ा वापस करने और उसकी बिक्री या नीलामी की प्रक्रिया भी शामिल होनी चाहिए.
लोन से खरीदे गए मोबाइल पर पाबंदी के नियम
अगर किसी लेंडर से लोन लेकर मोबाइल डिवाइस खरीदा गया है, तो लोन एग्रीमेंट में बताई गई डेडलाइन के अनुसार, उधार लेने वाले को बकाया लोन चुकाने के लिए जरूरी नोटिस देना होगा. इस नोटिस में डिवाइस के फंक्शन पर धीरेधीरे लगाई जाने वाली पाबंदियों की जानकारी भी शामिल होनी चाहिए.
हालांकि, बैंक तब तक डिवाइस के फ़ंक्शन पर कोई पाबंदी नहीं लगाएगा या उन्हें बंद नहीं करेगा , जब तक कि लोन की पेमेंट की तारीख गुजरे हुए 30 दिन न हो जाएं और उधार लेने वाले ने इस बारे में नोटिस मिलने के बावजूद बकाया रकम न चुकाई हो.
इसके बाद डिवाइस के फंक्शन पर धीरेधीरे पाबंदियां लगाई जा सकती हैं . लोन एग्रीमेंट में बताई गई सभी पाबंदियां तभी पूरी तरह लागू की जा सकती हैं जब लोन की पेमेंट की तारीख गुजरे हुए 60 दिन हो जाएं. साथ ही, जब तक लोन की पेमेंट की तारीख गुजरे हुए 60 दिन न हो जाएं, तब तक आउटगोइंग कॉल पर पाबंदी नहीं लगाई जाएगी.
मुआवजे का भी प्रावधान
अगर उधार लेने वाले से बकाया रकम वसूलने के बाद भी मोबाइल डिवाइस के फंक्शन पर लगी पाबंदियां हटाने में देरी होती है या गलत तरीके से पाबंदी लगाई है, और यह देरी बैंक की वजह से हो रही है, तो लेंडर को उधार लेने वाले को 250 रुपए प्रति घंटे की दर से मुआवजा देना होगा. यह मुआवजा तब तक दिया जाएगा जब तक कि गलत कार्रवाई को ठीक नहीं कर दिया जाता. हालांकि, बैंक द्वारा उधार लेने वाले को दिया जाने वाला कुल मुआवजा, दिए गए लोन की रकम से ज्यादा नहीं हो सकता.