उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए वोटिंग 23 अक्टूबर को कराई जाएगी. इन सीटों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं. वोटिंग से पहले 21 अक्टूबर को चुनाव प्रचार थम गया है. अंतिम दिन भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने जमकर पसीना बहाया है. इस बीच एक दिलचस्प वाक्या सामने आया है. दरअसल, इलाहाबादझांसी स्नातक MLC सीट की वोटर लिस्ट में अजबगजब एंट्री दिखाई दी है, जिससे राजनीति का पारा हाई हो सकता है.

इलाहाबादझांसी स्नातक सीट की वोटर लिस्ट में मतदाता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ मिला है. यही नहीं, पिता का नाम ‘मूर्खचंद यादव’ है. साथ ही फतेहपुर में मतदाता के नाम के कॉलम में ‘अली के पास है’ नाम दर्ज है. 23 अक्टूबर को वोटिंग से पहले वोटर लिस्ट में निकली गड़बड़ी बड़े सवाल खड़े करती है.
27 अक्टूबर को होगी वोटों की गिनती
चुनाव आयोग के मुताबिक, यूपी एमएलसी चुनाव में 152 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. वोटों की गिनती 27 अक्टूबर की जाएगी. इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को खत्म हो रहा है. इन चुनावों के लिए मतदान सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा. प्रदेश में कुल 2697 मतदान केंद्र बनाए गए हैं और 14 लाख 81 हजार 310 वोटर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा 3 लाख 13 हजार 531 वोटर हैं. इसके बाद वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 2 लाख 88 हजार 622 और इलाहाबादझांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 2 लाख 64 हजार 233 वोटर हैं.
पांच स्नातक की कौनकौन सीटें?
- लखनऊ मंडल स्नातक
- वाराणसी मंडल स्नातक
- आगरा मंडल स्नातक
- मेरठ मंडल स्नातक
- इलाहाबादझांसी मंडल स्नातक
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की 6 सीटें कौनकौन?
- लखनऊ मंडल शिक्षक
- वाराणसी मंडल शिक्षक
- आगरा मंडल शिक्षक
- मेरठ मंडल शिक्षक
- बरेलीमुरादाबाद मंडल शिक्षक
- गोरखपुरफैजाबाद मंडल शिक्षक
भाजपा और सपा के लिए नाक की लड़ाई
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले एमएलसी चुनाव भाजपा और सपा के लिए नाक की लड़ाई है. इसे सेमीफाइनल बताया जा रहा है. यही कारण है कि इन 11 सीटों के लिए योगी सरकार के एक दर्जन से ज्यादा मंत्रियों ने प्रचार के दौरान पूरी ताकत झोंक रखी थी. भाजपा और सपा के 100 से ज्यादा सांसदों और विधायकों ने निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर प्रचार किया और मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए हरसंभव जुगत की. दोनों ही पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है.
भाजपा डबल डिजिट में चाहती है जीत
पिछली बार इन सीटों पर सपा की बढ़त थी. उसने 6 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा के खाते में 5 सीटें गई थीं. इस बार भाजपा की कोशिश है कि वह डबल डिजिट को छुए. इसके लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोर्चा संभाल रखा था. उन्होंने गोरखपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, आगरा और गाजियाबाद समेत कई जिलों में उम्मीदवारों के समर्थन में जनसभाएं की. हालांकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कोई भी जनसभा नहीं की, लेकिन चुनाव की जिम्मेदारी सांसदों और विधायकों को दी थी, ताकि वे डोरटूडोर जाकर मतदाताओं से पार्टी के पक्ष में माहौल बनाया जा सके. इसके अलावा, जिलाध्यक्षों, महानगर अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं की टीमों को भी चुनाव में लगाया गया.