आज भारतीय सिनेमा के लिए बड़ा दिन है। आज ही के दिन यानी 14 मई 1923 को भारतीय समानांतर सिनेमा आंदोलन के प्रमुख स्तंभ मृणाल सेन का जन्म हुआ था। मृणाल सेना को भुवन सोम, मृगया और एक दिन प्रतिदिन जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। मृणाल सेन ने मिथुन चक्रवर्ती और अमिताभ बच्चन को पहला फिल्मी ब्रेक भी दिया था। उनकी फिल्म भुवन सोम में अमिताभ ने नरेटर के तौर पर अपनी आवाज दी थी।

मृणाल सेन सिर्फ एक फिल्म निर्देशक नहीं थे, बल्कि समाज और राजनीति को पर्दे पर उतारने वाले ऐसे कहानीकार थे जिन्होंने भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी। उनकी फिल्मों में आम आदमी की बेचैनी, राजनीति का असर और बदलते समाज की तस्वीर साफ दिखाई देती थी। लेकिन उनकी जिंदगी के कई ऐसे किस्से हैं, जिनके बारे में कम लोग जानते हैं।
Khabar Monkey
मृणाल सेन भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली फिल्म निर्देशकों में गिने जाते हैं। सत्यजीत रे और ऋतिक घटक के साथ उन्हें भारतीय ‘समानांतर सिनेमा’ या ‘न्यू वेव सिनेमा’ आंदोलन का प्रमुख स्तंभ माना जाता है।
सुभाष चंद्र बोस से कराया था दांत दर्द का इलाज
मृणाल सेन का जन्म 14 मई 1923 को तत्कालीन अविभाजित भारत के फरीदपुर (अब बांग्लादेश) में हुआ था। मृणाल ने अपने कई इंटरव्यू और बातचीतों में बचपन का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया था, जो सुभाष चंद्र बोस से जुड़ा है। मृणाल सेन के मुताबिक, बचपन में उन्हें भयंकर दांत दर्द हुआ था। उस समय उनके परिवार का संपर्क नेताजी से था, क्योंकि बोस अक्सर फरीदपुर और कोलकाता के लोगों से जुड़े रहते थे।
मृणाल सेन ने बताया था कि जब उनके दांत में असहनीय दर्द था, तब नेताजी ने उन्हें एक जर्मन दवा दी थी। वह दवा लगाने या लेने के कुछ समय बाद उनका दर्द तुरंत कम हो गया। सेन इस घटना को मजाकिया अंदाज में याद करते हुए कहते थे कि नेताजी उनके जीवन के पहले डेंटिस्ट बन गए थे।
साइंस के छात्र थे मृणाल सेन
बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले मृणाल सेन का रुझान विज्ञान की पढ़ाई की ओर था। उन्होंने कोलकाता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज से फिजिक्स की पढ़ाई की थी। पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव राजनीति, साहित्य और थिएटर की तरफ बढ़ने लगा। कॉलेज के दिनों में वे वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हुए और समाज को करीब से समझने लगे। यही अनुभव बाद में उनकी फिल्मों की पहचान बने।
मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की नौकरी भी की
फिल्मों में आने से पहले मृणाल सेन ने कई छोटे-मोटे काम किए। उन्होंने कुछ समय तक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की नौकरी भी की। नौकरी के सिलसिले में उन्हें अलग-अलग शहरों में जाना पड़ता था। इसी दौरान उन्होंने आम लोगों की जिंदगी, संघर्ष और सामाजिक असमानता को करीब से देखा। बाद में यही यथार्थ उनकी फिल्मों की कहानियों में नजर आया।
किताब ने बदल दी जिंदगी
मृणाल सेन की जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया जब उन्होंने फिल्मों की तकनीक और सौंदर्यशास्त्र पर आधारित एक किताब पढ़ी। इस किताब ने उनके भीतर सिनेमा को लेकर गहरी दिलचस्पी पैदा कर दी। इसके बाद उन्होंने तय कर लिया कि वे फिल्मों की दुनिया में ही अपना करियर बनाएंगे।
उन्होंने भौतिकी से स्नातक करने के बाद, मृणाल सेन ने फिल्मों में आने से पहले एक मेडिकल सेल्समैन और फिल्म स्टूडियो में साउंड तकनीशियन के रूप में भी काम किया था।
पहली फिल्म रही फ्लॉप
मृणाल सेन ने 1955 में अपनी पहली फिल्म ‘रात भोर’ बनाई, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने लगातार ऐसी फिल्में बनाईं जो सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को सामने लाती थीं।
‘भुवन सोम’ ने बदल दी किस्मत
1969 में आई ‘भुवन सोम” ने मृणाल सेन को नई पहचान दिलाई। इस फिल्म को भारतीय समानांतर सिनेमा की शुरुआत करने वाली फिल्मों में गिना जाता है। कम बजट में बनी इस फिल्म ने यह साबित कर दिया कि बिना बड़े सितारों के भी दमदार कहानी के जरिए दर्शकों को प्रभावित किया जा सकता है।
फिल्मों में दिखाया समाज का आईना
मृणाल सेन की फिल्मों में हमेशा समाज और राजनीति की झलक दिखाई दी। एक दिन प्रतिदिन, आकालेर संधाने, खंडहर और मृगया जैसी फिल्मों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी फिल्मों में मनोरंजन से ज्यादा सामाजिक संदेश और यथार्थवाद देखने को मिलता था।
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से हुए सम्मानित
मृणाल सेन को भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें पद्म भूषण, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनकी फिल्मों को कान्स, बर्लिन और मॉस्को जैसे अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी सराहा गया।
भारतीय सिनेमा के विचारशील फिल्ममेकर
मृणाल सेन उन फिल्मकारों में रहे जिन्होंने सिनेमा को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को समझने और सवाल उठाने का माध्यम बनाया। उनकी फिल्में आज भी फिल्म छात्रों और सिनेमा प्रेमियों के लिए प्रेरणा मानी जाती हैं।





