Noida News: शेयर बाजार में कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर साइबर ठगी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है. एक व्यक्ति से 4.75 लाख रुपये की ठगी की जांच करतेकरते पुलिस ऐसे बैंक खाते तक पहुंची, जिसमें महज दो महीने के भीतर करीब 2.97 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था. जांच में यह खाता देशभर में दर्ज 17 साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़ा मिला है. पुलिस ने ओडिशा के भुवनेश्वर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है.

साइबर सेल के मुताबिक, पीड़ित रामचंदर यादव को Bull Market Dhan Club H10608 नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया था. ग्रुप में मौजूद लोग खुद को शेयर बाजार और IPO निवेश का विशेषज्ञ बताते थे. आरोपियों ने पीड़ित को भरोसा दिलाया कि उनके बताए तरीके से निवेश करने पर कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. शुरुआत में पीड़ित को फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर उसकी रकम बढ़ती हुई दिखाई गई. मुनाफा देखकर उसे लगा कि उसका पैसा सही जगह निवेश हो रहा है. इसके बाद उसने UPI और नेट बैंकिंग के जरिए करीब 4.75 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए.
रकम निकालने पर मांगे 12 लाख
कुछ समय बाद जब पीड़ित ने अपना पैसा और मुनाफा निकालने की कोशिश की तो ठगों ने नया बहाना बना दिया. उससे कहा गया कि रकम निकालने के लिए 12 लाख रुपये प्रोसेसिंग या विथड्रॉल चार्ज के तौर पर जमा करने होंगे. इतनी बड़ी रकम की मांग होने पर पीड़ित को शक हुआ. उसे समझ आ गया कि मुनाफे का लालच देकर उसके साथ ठगी की गई है. इसके बाद उसने पुलिस से शिकायत की. मामले में साइबर थाना शाहदरा में 1 अप्रैल को केस दर्ज किया गया.
एक बैंक खाते में पहुंचे 3.75 लाख रुपए
पुलिस ने रकम की मनी ट्रेल खंगालनी शुरू की. जांच में पता चला कि पीड़ित से ठगी गई रकम में से करीब 3.75 लाख रुपये सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में पहुंचे थे. यह खाता Fusion Enterprises नाम की फर्म से जुड़ा था. खाते में सुब्रत कुमार साहू और संतोष कुमार लेंका के नाम दर्ज थे. बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर की तकनीकी जांच के बाद पुलिस सुब्रत कुमार साहू तक पहुंची और उसे भुवनेश्वर से गिरफ्तार कर लिया.
दो महीने में 2.97 करोड़ का लेनदेन
जांच के दौरान पुलिस को सबसे चौंकाने वाली जानकारी बैंक खाते की जांच से मिली. जिस खाते में पीड़ित की रकम पहुंची थी, उसमें केवल दो महीने के दौरान करीब 2.97 करोड़ रुपये जमा हुए थे. इसके बाद पुलिस को शक हुआ कि इस खाते का इस्तेमाल सिर्फ एक व्यक्ति को ठगने के लिए नहीं, बल्कि कई साइबर अपराधों से हासिल रकम को इधरउधर करने के लिए किया जा रहा था. आगे की जांच में यह बैंक खाता देश के अलगअलग हिस्सों में दर्ज 17 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ा मिला. पुलिस अब इन मामलों में पैसों के लेनदेन और आरोपियों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है.
सात बैंक खातों में ट्रांसफर करना था पैसा
पूछताछ में आरोपी सुब्रत कुमार साहू ने बताया कि उसने साइबर ठगी की रकम को इधरउधर करने के लिए करीब सात बैंक खातों की व्यवस्था की थी. पुलिस के मुताबिक, ऐसे खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को अलगअलग खातों में भेजकर उसके असली स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता है. आरोपी के मोबाइल फोन की जांच में सहआरोपियों के साथ बैंक खातों और लेनदेन से संबंधित चैट भी मिली है. जांच में यह भी सामने आया कि वह संतोष कुमार लेंका के साथ हवाई जहाज से गुवाहाटी गया था. पुलिस इन यात्राओं और वित्तीय लेनदेन के बीच संबंध तलाश रही है.
ऐसे काम करता था साइबर ठगी का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे. खुद को शेयर बाजार का विशेषज्ञ बताकर पहले छोटी रकम निवेश कराई जाती थी. इसके बाद फर्जी ऐप पर मुनाफा दिखाकर पीड़ित का भरोसा बढ़ाया जाता था. कई मामलों में छोटी रकम वापस कर विश्वास और मजबूत किया जाता था. इसके बाद बड़ी रकम निवेश कराई जाती और पैसा निकालने पर टैक्स, वेरिफिकेशन, कंप्लायंस या विथड्रॉल चार्ज के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाती थी.
रकम मिलने के बाद आरोपी संपर्क तोड़ देते थे. पुलिस ने आरोपी के कब्जे से मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किया है. अब डिजिटल साक्ष्यों और बैंक लेनदेन के आधार पर नेटवर्क के बाकी सदस्यों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है.