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मुगल बादशाह बाबर के लिए काबुल क्यों था खास? अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव के बीच जानें जवाब​

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पक्तिका और कुनार प्रांत पर हवाई हमले किये हैं. इस एयर स्ट्राइक में कई लोगों के मारे जाने और भारी नुकसान की खबरें आम हैं. इस हमले की वह से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों की चर्चा तेज हो चली है. अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव का इतिहास बहुत पुराना […]

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पक्तिका और कुनार प्रांत पर हवाई हमले किये हैं. इस एयर स्ट्राइक में कई लोगों के मारे जाने और भारी नुकसान की खबरें आम हैं. इस हमले की वह से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों की चर्चा तेज हो चली है. अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव का इतिहास बहुत पुराना है. दोनों देशों के रिश्तों में सीमा, राजनीति, सुरक्षा और पहचान से जुड़े कई विवाद रहे हैं. जब अफगानिस्तान की चर्चा काबुल के बिना अधूरी मानी जाएगी. देश की राजधानी होने की वजह से इसका अपना महत्व है. आइए, इसी बहाने जानते हैं कि बाबर काबुल से भारत क्यों आया और काबुल मुगलों के लिए इतना अहम क्यों रहा?

बाबर का जन्म फरगना में हुआ था. यह क्षेत्र आज के मध्य एशिया में स्थित था. बाबर ने कम उम्र में सत्ता संभाली. लेकिन उसे अपने राज्य को बचाने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा. बाबर के सामने सबसे बड़ी चुनौती समरकंद पर नियंत्रण बनाए रखना था. समरकंद उस समय मध्य एशिया का एक प्रमुख शहर था. यह व्यापार, संस्कृति और राजनीति का केंद्र माना जाता था. बाबर ने कई बार समरकंद पर कब्जा किया. लेकिन वह वहां अपना शासन लंबे समय तक कायम नहीं रख सका.

उज्बेक शासक मुहम्मद शायबानी खान की शक्ति तेजी से बढ़ रही थी. उसने मध्य एशिया के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया. बाबर के लिए फरगना और समरकंद दोनों असुरक्षित हो गए. उसे एक ऐसे स्थान की तलाश थी, जहां वह अपनी शक्ति फिर से जमा कर सके. यही कारण था कि बाबर ने काबुल की ओर रुख किया.

बाबर ने काबुल को अपना आधार क्यों बनाया?

बाबर ने 1504 में काबुल पर कब्जा किया. उस समय काबुल में राजनीतिक अस्थिरता थी. स्थानीय शासक कमजोर थे. अलगअलग गुटों के बीच संघर्ष चल रहा था. बाबर ने इस स्थिति का लाभ उठाया. उसने काबुल पर अपना नियंत्रण स्थापित किया. काबुल, बाबर के लिए सिर्फ एक शहर नहीं था. यह उसके लिए सुरक्षित आधार बना. यहां से वह मध्य एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप दोनों पर नजर रख सकता था.

मुगल बादशाह बाबर. फोटो: AI Generated

काबुल की भौगोलिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण थी. काबुल पहाड़ों के बीच स्थित है. यह मध्य एशिया और भारत को जोड़ने वाले रास्तों के पास है. यहां से खैबर दर्रे के रास्ते भारत पहुंचा जा सकता था. दूसरी ओर, काबुल से कंधार, बल्ख और समरकंद की ओर भी जाना संभव था. काबुल पर अधिकार मिलने के बाद बाबर को एक स्थायी राज्य मिला. उसने यहां अपनी सेना को संगठित किया. स्थानीय सरदारों को अपने साथ जोड़ा. उसने प्रशासन को मजबूत किया. इसके बाद उसकी नजर भारत की ओर जाने लगी.

बाबर की नजर भारत पर क्यों थीं?

बाबर ने भारत के बारे में अपने संस्मरण बाबरनामा में कई बातें लिखी हैं. उसने भारत की विशालता और संपन्नता का उल्लेख किया. भारत में उपजाऊ मैदान थे. यहां बड़ी आबादी थी. कई नगर व्यापार के प्रमुख केंद्र थे. उस समय दिल्ली सल्तनत पर लोदी वंश का शासन था. सुल्तान इब्राहिम लोदी के साथ कई अफगान सरदार नाराज थे. उसके शासन में आंतरिक असंतोष बढ़ रहा था. पंजाब के कुछ प्रभावशाली लोगों ने बाबर से संपर्क किया. उन्होंने उसे भारत आने का निमंत्रण दिया. बाबर पहले भी भारत की ओर छोटे अभियान कर चुका था. लेकिन वह भारत में स्थायी शासन स्थापित नहीं कर पाया था. काबुल पर नियंत्रण मिलने के बाद उसकी स्थिति बदल गई. अब उसके पास सेना थी. उसके पास अनुभव था. उसके पास एक सुरक्षित ठिकाना भी था. बाबर ने भारत पर हमला केवल धन के लिए नहीं किया. वह एक स्थायी राज्य बनाना चाहता था.

पानीपत की जंग के बाद मुगल बादशाह बाबर की हिन्दुस्तान में एंट्री हुई. फोटो: AI Generated

पानीपत की लड़ाई और मुगल शासन की शुरुआत

बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच निर्णायक संघर्ष 1526 में हुआ. यह लड़ाई पानीपत के मैदान में लड़ी गई. बाबर की सेना संख्या में छोटी थी. लेकिन उसकी रणनीति बेहतर थी. बाबर ने तोपों का प्रभावी इस्तेमाल किया. उसने अपने रथों और सुरक्षा व्यवस्था का उपयोग किया. इब्राहिम लोदी की सेना बड़ी थी. लेकिन उसमें एकता की कमी थी. पानीपत की पहली लड़ाई में बाबर विजयी हुआ. इब्राहिम लोदी मारा गया. इसके बाद बाबर ने दिल्ली और आगरा पर कब्जा कर लिया. इस जीत के साथ भारत में मुगल साम्राज्य की नींव पड़ी.

बाबर की विजय के बाद भी उसकी चुनौतियां समाप्त नहीं हुईं. उसे राजपूत शक्तियों का सामना करना पड़ा. राणा सांगा उसके सबसे बड़े विरोधियों में से एक थे. 1527 में खानवा की लड़ाई हुई. इस युद्ध में बाबर ने विजय हासिल की. इसके बाद बाबर ने भारत में अपना शासन मजबूत किया. वह लंबे समय तक शासन नहीं कर सका. 1530 में उसकी मृत्यु हो गई. लेकिन उसने जिस साम्राज्य की नींव रखी, वह आगे चलकर बहुत शक्तिशाली बना.

अफगानिस्तान के काबुल में बनी बाबर की कब्र, जिसे बागएबाबर कहा जाता है.

मुगलों के लिए काबुल का महत्व

काबुल मुगल इतिहास में लगातार महत्वपूर्ण रहा. बाबर के बाद भी मुगल शासकों ने काबुल को अपने साम्राज्य का अहम हिस्सा माना. काबुल से उत्तरपश्चिमी सीमा पर नजर रखी जा सकती थी. मध्य एशिया से आने वाले आक्रमणों को रोकने के लिए यह क्षेत्र जरूरी था. अगर काबुल किसी विरोधी शक्ति के हाथ में चला जाता, तो भारत की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी. काबुल मध्य एशिया और भारत के बीच व्यापारिक मार्ग पर स्थित था. घोड़े, ऊन, सूखे मेवे और कई अन्य वस्तुएं काबुल के रास्ते भारत आती थीं.

भारत से कपड़ा, मसाले और अन्य सामान मध्य एशिया भेजे जाते थे. मध्य एशिया से आने वाले घोड़े मुगल सेना के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे. अच्छी नस्ल के घोड़े काबुल और कंधार के रास्ते भारत पहुंचते थे. मुगल सेना की ताकत में इन घोड़ों की बड़ी भूमिका थी. बाबर काबुल को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता था. उसने वहां लंबे समय तक शासन किया था. उसकी यादें काबुल से जुड़ी थीं. उसकी कब्र भी काबुल में स्थित है. इस वजह से काबुल मुगलों के लिए भावनात्मक महत्व रखता था.

काबुल और मुगल संस्कृति का संबंध

काबुल केवल सैन्य और व्यापारिक केंद्र नहीं था. यह संस्कृति और कला का भी महत्वपूर्ण स्थान था. मध्य एशिया की परंपराओं का प्रभाव मुगल दरबार पर दिखाई देता था. भाषा, वास्तुकला, बागवानी और खानपान में काबुल की छाप थी. बाबर को बागों का बहुत शौक था. उसने काबुल और भारत में कई बाग बनवाए.

मुगल बागों की शैली में चारबाग व्यवस्था दिखाई देती है. इसमें बाग को चार हिस्सों में बांटा जाता है. पानी की धाराएं और रास्ते इसके मुख्य भाग होते हैं. काबुल से मुगल दरबार को मध्य एशियाई पहचान भी मिलती रही. मुगल शासक भारत में रहने के बावजूद अपनी जड़ों को नहीं भूले. काबुल उनके लिए उस पुराने संसार से जुड़ाव का माध्यम था.

हमेशा से महत्वपूर्ण रहा काबुल

आज अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव की चर्चा होती है. इस माहौल में काबुल का इतिहास और भी महत्वपूर्ण लगता है. काबुल हमेशा से अलगअलग क्षेत्रों के बीच संपर्क का केंद्र रहा है. यह शहर कई साम्राज्यों की राजनीति का हिस्सा रहा. यहां से भारत जाने वाले रास्ते निकलते थे. इसी कारण काबुल पर नियंत्रण के लिए अलगअलग शक्तियों में संघर्ष होता रहा. बाबर का काबुल से भारत आना केवल एक शासक का सैन्य अभियान नहीं था. यह मध्य एशिया, अफगानिस्तान और भारत के बीच पुराने संबंधों का परिणाम था. बाबर ने काबुल को अपना आधार बनाया. फिर उसने भारत में एक नए साम्राज्य की स्थापना की.

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संपादकीय टीम

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