एशिया के सबसे अमीर इंसान और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने अपनी कंपनी से इस साल भी कोई सैलरी नहीं ली है. ये लगातार छठा साल है जब मुकेश अंबानी ने एक भी रुपए की सैलरी नहीं ली है. कंपनी की एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक मुकेश अंबानी ने वित्त वर्ष 2025-26 में वेतन, भत्ते, सुविधाओं और सेवानिवृत्ति लाभ के रूप में कोई राशि नहीं ली है. मुकेश अंबनी के लिए कमाई का मुख्स स्रोत डिविडेंड ही बना हुआ है.

इससे पहले मुकेश अंबानी ने वित्त वर्ष 2008-09 से 2019-20 तक अपने वार्षिक पारिश्रमिक को 15 करोड़ रुपये पर सीमित रखा था. इसके बाद वित्त वर्ष 2020-21 से उन्होंने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर स्वेच्छा से अपना वेतन छोड़ दिया था.
आखिर क्यों लिया ये फैसला
रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी ने ये फैसला इसलिए लिया था कि जब तक कंपनी और उसके सभी कारोबार अपनी पूर्ण कमाई क्षमता पर वापस नहीं आ जाते तबतक वह वेतन नहीं लेंगे. उन्होंने पूरी तरह स्वैच्छिक रूप से अपने इस फैसले को वित्त वर्ष 2021-22, 2022-23, 2023-24, 2024-25 और अब 2025-26 में भी जारी रखा है. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2025-26 में 95,754 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे ज्यादा मुनाफा कमाया और कंपनी का बाजार मूल्य 18.19 लाख करोड़ रुपये रहा.
डिविडेंड से की 9.66 करोड़ की कमाई
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करीब 100 अरब डॉलर के नेटवर्थ के साथ दुनिया के 21वें सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी की कमाई का मुख्य स्रोत लाभांश आय है. रिलायंस में उनकी सीधे तौर पर 1.61 करोड़ शेयर की हिस्सेदारी है, जिससे उन्हें वित्त वर्ष 2024-25 के लिए घोषित छह रुपये प्रति शेयर के लाभांश के आधार पर 9.66 करोड़ रुपये की लाभांश आय हुई. अंबानी के चचेरे भाई निखिल और हितल मेसवानी का पारिश्रमिक 25-25 करोड़ रुपये पर स्थिर रहा. इसमें वेतन, भत्ते, सेवानिवृत्ति लाभ और मुनाफे पर कमीशन शामिल है. कार्यकारी निदेशक पी एम एस प्रसाद का पारिश्रमिक वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 20.58 करोड़ रुपये हो गया, जो 2024-25 में 19.96 करोड़ रुपये था.
बच्चों को भी नहीं मिली सैलरी
अंबानी के तीनों बच्चों ईशा, आकाश और अनंत को अक्टूबर, 2023 में निदेशक मंडल में शामिल किया गया था. हालांकि, इसके लिए उन्हें कोई वेतन नहीं मिला. उन्हें केवल बैठक शुल्क और मुनाफे पर कमीशन मिला. आकाश और ईशा को पांच-पांच लाख रुपये बैठक शुल्क और 2.5-2.5 करोड़ रुपये कमीशन मिला. अंबानी 1977 से रिलायंस के निदेशक मंडल में हैं. जुलाई, 2002 में समूह संस्थापक धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद उन्हें कंपनी का चेयरमैन बनाया गया था. वर्ष 2023 में उन्हें अप्रैल, 2029 तक पांच साल के लिए फिर से रिलायंस का प्रमुख नियुक्त किया गया. इस दौरान भी उन्होंने वेतन नहीं लेने का फैसला किया है.





