उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अब अपना चुनावी मोड ऑन कर दिया है. सितंबर से पार्टी ने मिशन2027 की तैयारियों को जमीन पर उतारने की कवायद तेज कर दी है. यूपी प्रभारी विनोद तावड़े के दो दिवसीय लखनऊ दौरे में संगठन और सरकार के साथ चुनावी रणनीति पर मंथन हुआ. विनोद तावड़े ने नेताओं को साफ संदेश दिया कि अब चुनाव तक अपने क्षेत्र में रहिए, संगठन की नब्ज टटोलिए और जैसी स्थिति है, वैसी ही रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को दीजिए.

खास बात ये है कि सितंबर में यूपी में बीजेपी के कई बड़े नेताओं के दौरे प्रस्तावित हैं. बीएल संतोष से लेकर नितिन नबीन और अमित शाह तक यूपी पहुंचेंगे. वहीं नवरात्रि और दीपावली के आसपास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं. सितंबर की शुरुआत के साथ ही बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में मिशन2027 की तैयारियों को रफ्तार दे दी है. यूपी प्रभारी विनोद तावड़े के दो दिवसीय दौरे में संगठन से लेकर सरकार और आगामी विधानसभा चुनाव तक पर मंथन हुआ.
विनोद तावड़े ने नेताओं को क्या दिया संदेश?
प्रदेश और क्षेत्रीय पदाधिकारियों के साथ बैठक में विनोद तावड़े ने नेताओं को साफ संदेश दिया कि अब चुनाव तक क्षेत्र ही उनकी पहली प्राथमिकता होना चाहिए. संगठन के नेताओं को अपनेअपने इलाकों में सक्रिय रहने और लगातार जमीनी फीडबैक पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाने को कहा गया. विनोद तावड़े की बैठक का सबसे अहम संदेश था कि ग्राउंड रिपोर्ट में कोई मिलावट नहीं होनी चाहिए. नेताओं से कहा गया कि क्षेत्र में संगठन की जैसी स्थिति है, उसकी वैसी ही जानकारी दी जाए.
‘स्थिति कमजोर है तो कमजोर बताइए’
स्थिति कमजोर है तो कमजोर बताइए… जनता नाराज है तो नाराजगी बताइए… और अगर सरकार के कामकाज को लेकर सकारात्मक माहौल है तो उसकी भी सही जानकारी दीजिए. यानी बीजेपी अब चुनाव से पहले जमीनी फीडबैक को लेकर किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती. 2024 के लोकसभा चुनाव नतीजों के झटके के बाद बीजेपी विधानसभा चुनाव को लेकर किसी मुगालते में नहीं रहना चाहती.
असली और ईमानदार रिपोर्ट चाहिए
दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सहप्रभारी विनोद तावड़े ने पार्टी पदाधिकारियों को साफ शब्दों में समझा दिया है, इस बार कागजी नहीं, जमीन की असली और ईमानदार रिपोर्ट चाहिए. दबाव या सिफारिश में आकर किसी कमजोर दावेदार का नाम आगे बढ़ाया, तो संगठन को भारी नुकसान होगा. विनोद तावड़े का यह रुख साफ करता है कि बीजेपी इस बार कोई रिस्क नही लेना चाहती है.
उम्मीदवारों के चयन पर भी फोकस
इसका असर उम्मीदवारों के चयन पर भी पड़ सकता है. बैठक में संकेत दिया गया कि जिले से लेकर क्षेत्र और प्रदेश स्तर तक जिन नामों को आगे बढ़ाया जाएगा, उनमें जमीनी स्वीकार्यता सबसे अहम होगी. किसी दबाव में ऐसे नाम आगे न बढ़ाए जाएं, जिनकी क्षेत्र में पकड़ कमजोर हो. 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में लगे झटके के बाद बीजेपी 2027 में उम्मीदवार चयन और संगठन की जमीनी मजबूती को लेकर ज्यादा सतर्क दिखाई दे रही है.
विनोद तावड़े ने प्रदेश बीजेपी की नई टीम के साथ परिचय बैठक भी की. प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह और प्रदेशक्षेत्रीय पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक अभियानों और आगामी कार्यक्रमों की समीक्षा हुई. वहीं सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल को लेकर विनोद तावड़े ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से भी मुलाकात की. इन बैठकों में सरकार के कामकाज, संगठन की स्थिति और 2027 के चुनावी माहौल पर चर्चा हुई.
सितंबर में बड़े दौरे
विनोद तावड़े के दौरे के बाद अब बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव संगठन बीएल संतोष का 10 और 11 सितंबर को लखनऊ दौरा प्रस्तावित है. बीएल संतोष के दौरे में सरकार, संगठन और संघ से जुड़े स्तरों पर बैठकें होंगी. संगठन की स्थिति क्या है? सरकार के कामकाज का फीडबैक क्या है? और 2027 के लिए बीजेपी की तैयारी कितनी जमीन पर पहुंची है? इन तमाम सवालों पर मंथन होगा. इसके बाद नितिन नबीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूपी दौरे भी प्रस्तावित हैं.
सितंबर क्यों अहम?
यानी सितंबर का पूरा महीना बीजेपी के लिए यूपी के नाम रहने वाला है. एक के बाद एक केंद्रीय नेताओं का दौरा… लगातार संगठनात्मक बैठकें… सरकार और संगठन के बीच समन्वय… और सबसे ऊपर 2027 के लिए जमीनी तैयारी. नवरात्रि और दीपावली के आसपास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी यूपी में कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं. ऐसे में पार्टी संगठन इन कार्यक्रमों को लेकर भी तैयारी में जुट गया है.
दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी के नतीजों ने बीजेपी को बड़ा सबक दिया. अब 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी कोई बड़ी चूक नहीं करना चाहती. इसलिए चुनाव से करीब एक साल पहले ही संगठन को चुनावी मोड में लाया जा रहा है. विनोद तावड़े का संदेश साफ है कि लखनऊ की बैठकों से नहीं, अब क्षेत्र की जमीन से रिपोर्ट आएगी. और सितंबर में बीएल संतोष से लेकर अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी तक के प्रस्तावित दौरे इस बात के संकेत हैं.