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‘महीने में दो बार सैलरी दीजिए’, अनुपम मित्तल ने अपील करके मचा दी सनसनी

‘महीने में दो बार सैलरी दीजिए’, अनुपम मित्तल ने अपील करके मचा दी सनसनी

नई दिल्‍ली: शादी डॉट कॉम के संस्‍थापक अनुपम मित्तल ने सनसनी मचा दी है। उन्‍होंने कंपनियों से बड़ी अपील कर दी है। अपील यह है कि वे इस बात पर फिर से सोचें कि कर्मचारियों को सैलरी कैसे और कब दी जाए। उनका तर्क है कि सैलरी आदर्श रूप से महीने में दो बार दी जानी चाहिए। न कि उस ‘ब्रिटिश-जमाने’ के सिस्टम को फॉलो करते हुए जिसमें सैलरी अगले महीने दी जाती है।

‘महीने में दो बार सैलरी दीजिए’, अनुपम मित्तल ने अपील करके मचा दी सनसनी
‘महीने में दो बार सैलरी दीजिए’, अनुपम मित्तल ने अपील करके मचा दी सनसनी

स्टार्टअप फाउंडर ने किया पोस्ट
मित्तल ने सोमवार को लिंक्डइन पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्‍होंने कहा कि कई कंपनियां खुद को कर्मचारी-केंद्रित दिखाने के लिए ज्‍यादा छुट्टियां, मुफ्त खाना और रिमोट वर्क जैसे फायदों को बढ़ावा देती हैं। लेकिन, अक्सर कर्मचारियों के लिए सबसे जरूरी मुद्दों में से एक को नजरअंदाज़ कर देती हैं। वह है – समय पर सैलरी का पेमेंट।

उन्होंने लिखा, ‘ज्‍यादातर कंपनियां 7 तारीख को सैलरी देती हैं। कुछ 1 तारीख को देती हैं सिवाय तब जब उस दिन वीकेंड हो, जिसका मतलब है कि सैलरी 2, 3 या 4 तारीख को मिलेगी।’

पेरोल प्रोसेस में किया बदलाव
मित्तल ने बताया:
शादी डॉट कॉम ने कुछ साल पहले अपनी पेरोल प्रक्रिया में बदलाव किया था।
अब वह सैलरी अगले महीने देने के बजाय मौजूदा महीने के आखिर में ही दे देते हैं।
उन्होंने कहा, ‘कुछ साल पहले हमने कंपनी में फैसला किया कि सैलरी मौजूदा महीने के आखिर में ही दी जानी चाहिए, न कि अगले महीने। यह कोई ‘पर्क’ (अतिरिक्त सुविधा) नहीं है, बल्कि यह तो ‘कॉमन सेंस’ (सामान्य समझ) की बात है।’

रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ता है असर
मित्तल के अनुसार, सैलरी मिलने में देरी का कर्मचारियों के रोजमर्रा के खर्चों पर काफी असर पड़ सकता है।

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उन्‍होंने आगे कहा, ‘कारण है कि कुछ लोगों के लिए एक हफ्ते की देरी शायद सिर्फ एक ‘अकाउंटिंग डिटेल’ (हिसाब-किताब की छोटी-मोटी बात) हो सकती है। लेकिन, ज्‍यादातर लोगों के लिए इसका मतलब हो सकता है – EMI का बाउंस होना, किराए का जुगाड़ करने की हड़बड़ी, किसी को फोन करके पैसे मांगने की शर्मिंदगी या फिर किसी ऐसी समस्या को ठीक करने में आधा दिन बर्बाद करना जो असल में कभी पैदा ही नहीं होनी चाहिए थी।’

उन्होंने तर्क दिया कि सैलरी का समय पर और आसानी से मिलना कर्मचारियों की आर्थिक स्थिरता को बेहतर बनाता है। उन्होंने आगे कहा, ‘कैश फ्लो ही असल ‘गरिमा’ है।’

महीने में दो बार सैलरी का आइडिया
मित्तल ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए सुझाव दिया कि कंपनियों को कर्मचारियों को महीने में दो बार सैलरी देने पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘असल में मेरा मानना है कि कंपनियों को महीने में दो बार – 15 तारीख और 30 तारीख को सैलरी देनी चाहिए। हां, पेरोल टीम के लोग शायद थोड़ी-बहुत शिकायत करेंगे। लेकिन, 2026 के इस दौर में जब हमारे पास इतनी बेहतरीन टेक्नोलॉजी मौजूद है तो यह कोई ‘रॉकेट साइंस’ (बहुत मुश्किल काम) नहीं है।’

इस उद्यमी ने कहा कि सैलरी का ज्‍यादा बार भुगतान करने से कर्मचारियों का आर्थिक तनाव कम हो सकता है। वे कर्ज के जाल में फंसने से बच सकते हैं। इससे अर्थव्यवस्था में खर्च को भी बढ़ावा मिल सकता है।

उद्योगपति के मुताबिक, बेहतर कैश फ्लो का मतलब है कम तनाव, कम कर्ज के जाल, खर्च की तेज रफ्तार और नतीजतन जीडीपी को बढ़ावा। कर्मचारियों की जीत। कंपनियों की जीत। अर्थव्यवस्था की जीत। तो अपने एचआर को प्रेरित करें और चलिए ब्रिटिश जमाने की इस ‘अगले महीने पेमेंट’ वाली व्यवस्था को खत्म करते हैं।

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