मिडिल ईस्ट में चल रहे भारी तनाव ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार के समीकरणों को बदल कर रख दिया है. कच्चे तेल के साथ-साथ प्राकृतिक गैस की कीमतों में आए इस उछाल की वजह से देश में महंगाई का ग्राफ ऊपर जाने लगा है. स्थिति यह बन गई है कि सुबह की चाय से लेकर चावल, समोसे, ब्रेड पकोड़े और लस्सी जैसे आम लोगों के खानपान की सभी चीजों के दाम बढ़ने लगे हैं. इस वैश्विक महंगाई ने अब सड़क किनारे मिलने वाले स्ट्रीट फूड से लेकर बड़े रेस्तरां तक के मेन्यू को प्रभावित करना शुरू कर दिया है.
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पुरानी दिल्ली का मशहूर जायका भी हुआ महंगा
पुरानी दिल्ली का मशहूर ‘सीताराम छोले भटूरे’ वाला भी इससे अछूता नहीं है. लोग दूर-दूर से यहाँ पर छोले भटूरे खाने आते हैं, लेकिन हाल ही में बढ़े गैस के दामों ने यहां पर भी छोले भटूरे के दाम बढ़ा दिए हैं. सीताराम दीवान चंद छोले भटूरे वालों की सबसे पुरानी पहाड़गंज ब्रांच पर TV9 भारतवर्ष ने छोले भटूरे के दाम पता किए, तो पता चला कि महंगाई की मार का असर यहां भी देखने को मिल रहा है. पहले 95 रुपये की मिलने वाली छोले भटूरे की प्लेट अब 100 रुपये और सिंगल भटूरा 55 से बढ़कर 60 रुपये का कर दिया गया है.
व्यापारियों की मजबूरी के बीच ग्राहकों का रुख
दुकान के स्टाफ का स्पष्ट कहना है कि कमर्शियल गैस के दाम इस कदर बढ़ चुके हैं कि बिना कीमतें बढ़ाए कारोबार का मार्जिन बनाए रखना मुश्किल हो रहा था. हालांकि, व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर उनका कहना है कि फुटफॉल (ग्राहकों की संख्या) में फिलहाल कोई बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है और लोग पहले की तरह ही आ रहे हैं. वहीं, इस खास जायके का लुत्फ उठाने आए ग्राहकों का नजरिया भी इस पूरी स्थिति पर काफी व्यावहारिक है.
ग्राहकों का मानना है कि वे दूर-दराज से केवल इस बेहतरीन स्वाद के लिए आते हैं, ऐसे में 5 या 10 रुपये की मामूली बढ़ोतरी उनके लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं है. उपभोक्ता भी इस बात से भली-भांति वाकिफ हैं कि दुनिया इस वक्त तेल के संकट से जूझ रही है और जैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सुधरेंगे, बाजार में भी कीमतों का दबाव अपने आप कम हो जाएगा.





