पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है. रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट ने कहा है कि भारत को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति लगातार जारी रहेगी. ऐसे समय में जब तेल सप्लाई और शिपिंग रूट्स को लेकर चिंता बढ़ रही है, रूस का यह भरोसा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. इससे देश को तेल की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है.

रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के प्रमुख इगोर सेचिन ने कहा है कि भारत और चीन को रूसी तेल की सप्लाई स्थिर बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि रूस वैश्विक ऊर्जा बाजार का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसे सप्लाई चेन से अलग नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार भारत और चीन के साथ रूस की ऊर्जा साझेदारी दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद साबित हुई है. सेचिन ने दावा किया कि अप्रैल 2022 से अब तक भारत और चीन को रियायती दरों पर रूसी तेल मिलने से 40 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक लाभ हुआ है. इससे इन देशों को महंगे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है रूसी तेल
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने कई देशों को रियायती कीमतों पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया था. इसका सबसे बड़ा फायदा भारत को मिला. भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ाया, जिससे देश की आयात लागत कम हुई और घरेलू बाजार में ईंधन कीमतों पर दबाव घटाने में मदद मिली. आज रूस भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है. भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए स्थिर और सस्ती सप्लाई देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है.
आने वाले वर्षों में बढ़ेगी भारत की ऊर्जा मांग
इगोर सेचिन ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2035 तक भारत की तेल खपत करीब 80 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है. यह वर्तमान स्तर की तुलना में लगभग 44 फीसदी अधिक होगी. तेज आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार और बढ़ती आबादी के कारण भारत दुनिया में ऊर्जा मांग बढ़ाने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल रहेगा. ऐसे में रूस और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हो सकता है.
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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल तेल सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है. हालांकि रूस का कहना है कि वह भारत को तेल सप्लाई जारी रखेगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा हालात भारत को ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में और तेजी से काम करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं.
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